कठपुतली कलाकार सरला श्रीवास जयंती पखवाड़ा: कला और AI के संगम की नई पहल

कठपुतली कलाकार एवं शांति दूत सरला श्रीवास की जयंती पखवाड़े का आयोजन गाजियाबाद के पत्रकार परिसर में किया गया। वरिष्ठ पत्रकार शुभ्राशु चौधरी की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में कठपुतली कला को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जोड़ने की अनोखी पहल की घोषणा की गई। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक लोककला को डिजिटल तकनीक के साथ जोड़कर शिक्षा, जनजागरूकता और रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता और मुख्य वक्तव्य

28 अगस्त शुक्रवार को गाजियाबाद के वसुंधरा स्थित पत्रकार परिसर में सीजी नेट स्वर एवं सरला श्रीवास सोशल कल्चरल रिसर्च फाउंडेशन द्वारा कठपुतली कलाकार, शांति दूत सरला श्रीवास की जयंती पखवाड़ा मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता शुभ्राशु चौधरी ने की।

शुभ्राशु चौधरी ने कहा कि सरला श्रीवास ने कठपुतली कला को केवल मंचीय प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे समाज में प्रेम, शांति, भाईचारे और मानवीय मूल्यों के प्रसार का सशक्त माध्यम बनाया। उनके लिए कला केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का प्रभावी साधन थी।

AI और कठपुतली कला का समन्वय

AI और कठपुतली कला का समन्वय

इस आयोजन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को कठपुतली कला से जोड़ने की नई पहल की घोषणा की गई। फाउंडेशन के सचिव एवं लोक कलाकार सुनील कुमार ने बताया कि AI तकनीक, डिजिटल कंटेंट, कहानी लेखन, आवाज, संगीत, दृश्य प्रभाव और कठपुतली प्रदर्शन को एक साथ जोड़ा जा रहा है।

इस पहल के तहत पारंपरिक कठपुतलियों और मंचीय प्रस्तुति को AI-आधारित रचनात्मक तकनीकों के साथ जोड़कर:

• शैक्षणिक वीडियो

• लोककथाएं

• जनजागरूकता संदेश

• सामाजिक विषयों पर लघु नाटक

• डिजिटल कठपुतली शो

• बच्चों के लिए मनोरंजक शिक्षण सामग्री

तैयार की जाएगी।

सामाजिक संदेश और कला का महत्व

सुनील कुमार ने बताया, सरला श्रीवास ने लोककला के माध्यम से शिक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकार, स्वास्थ्य और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जन-जागरण का संदेश दिया। उनकी प्रस्तुतियाँ दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ-साथ उन्हें सामाजिक जिम्मेदारियों का एहसास कराती थीं।

सरला श्रीवास युवा मंडल की अध्यक्ष सुमन कुमारी ने कहा कि सरला श्रीवास का जीवन हमें यह संदेश देता है कि कला तभी सार्थक होती है, जब वह समाज के जीवन को बेहतर बनाने का माध्यम बने। उन्होंने कठपुतली कला के माध्यम से देश-समाज को जोड़ने, जागृत करने, हिंसा को समाप्त करने और शांति का संदेश देने का काम किया।

भविष्य की योजनाएं

फाउंडेशन ने इस पहल के अंतर्गत भविष्य में निम्नलिखित कार्यक्रमों की योजना बनाई है:

• AI एवं कठपुतली कला पर प्रशिक्षण कार्यशालाएं

• बच्चों एवं युवाओं के लिए रचनात्मक कार्यक्रम

• डिजिटल कठपुतली निर्माण

• AI आधारित कहानी एवं संवाद लेखन

• लोककला आधारित डिजिटल प्रोडक्शन

इस पहल का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कठपुतली कलाकारों को तकनीक से जोड़ना, युवाओं को लोककला की ओर आकर्षित करना तथा कठपुतली कला के लिए डिजिटल मंच और रोजगार के नए अवसर विकसित करना है।

संकल्प

सरला श्रीवास की जयंती पखवाड़े पर कठपुतली कला, लोककला, लोक संस्कृति और मानवता की इस अमूल्य विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का संकल्प लिया गया। आयोजकों ने कहा कि बदलते समय और डिजिटल तकनीक के दौर में इस कला को नई पीढ़ी तक पहुँचाने तथा आधुनिक माध्यमों से जोड़ने की आवश्यकता है, और यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Author

  • मैं अनामिका गुप्ता, एक पत्रकार हूँ। पिछले 5 वर्षों में मैंने ब्रेकिंग, राजनीति, अपराध, सामाजिक, मनोरंजन, टेक्नोलोजी, खेल, विज्ञान, वित्त एवं निवेश और प्रौद्योगिकी मुद्दों और फीचर स्टोरीज़, हर विधा में काम किया है। जटिल मामलों को सरल भाषा में समझाना मेरी कला है और निष्पक्ष रिपोर्टिंग मेरी पहचान। इस वेबसाइट पर मैं पाठकों तक सच्चाई पहुँचाने का काम करती हूँ।

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