मध्य प्रदेश में वायु गुणवत्ता को लेकर पर्यावरण विभाग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य के 19 छोटे जिलों में हवा की गुणवत्ता बिगड़ी है, जबकि 35 जिलों में सुधार दर्ज किया गया है। यह आंकड़े 2020-21 से जनवरी 2026 तक के औसत AQI पर आधारित हैं।
बिगड़े हालात वाले 19 जिलों में बैतूल सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां AQI में 42.1% की बढ़ोतरी हुई (82.9 से 125 तक)। नरसिंहपुर में 41.45% वृद्धि (66.55 से 108 तक)। अन्य जिलों में अशोकनगर, बालाघाट, देवास, गुना, हरदा, जबलपुर, मंदला, मंदसौर, सतना आदि शामिल हैं। छोटे जिलों में मुख्य रूप से PM10 (धूल कण) से प्रदूषण बढ़ा है। सुधार वाले 35 जिलों में बड़े शहर आगे हैं। भोपाल में 18.99% कमी (123.29 से 104.3 तक), उज्जैन में 45.5% कमी (108.1 से 63.05 तक), ग्वालियर में 52.24% कमी (179.24 से 127 तक)। रायसेन में सबसे ज्यादा 69.69% सुधार। पर्यावरण विशेषज्ञों ने आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि मॉनिटरिंग स्टेशन कम हैं (जैसे भोपाल में सिर्फ 4, जबकि 20 की जरूरत)। प्रदेश में कोई भी जिला पूरी तरह स्वस्थ (AQI 50 से नीचे) नहीं है। छोटे जिलों में धूल, बड़े शहरों में वाहन और जलने से PM2.5 बढ़ रहा है। (वर्तमान रीयल-टाइम AQI अलग-अलग स्रोतों से भिन्न दिख रहा है, जैसे IQAir पर भोपाल 165, ग्वालियर 156, उज्जैन 257 जैसा, लेकिन रिपोर्ट लंबी अवधि की है।) अगर खरगोन का AQI जानना हो या और डिटेल चाहिए तो बताओ!
📌 मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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