बुधवार, 4 मार्च 2026

होलिका दहन के बाद भोपाल की हवा खराब: AQI 291 पर, फेफड़ों के लिए खतरा

भोपाल में होलिका दहन के बाद वायु प्रदूषण ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, 1 मार्च को शहर का एक्यूआई (AQI) सिर्फ 85 था, लेकिन होलिका दहन के अगले दिन 3 मार्च को यह तेजी से बढ़कर 291 तक पहुंच गया। खासकर पर्यावरण परिसर जैसे हरे-भरे और शांत इलाके में भी 24 घंटे का औसत AQI 291 दर्ज हुआ, जो 'खराब' श्रेणी में आता है। पिछले 72 घंटों में यह तीन गुना से ज्यादा उछाल है, जो शहरवासियों के लिए चेतावनी का संकेत है।

होलिका दहन के बाद भोपाल की हवा खराब: AQI 291 पर, फेफड़ों के लिए खतरा

प्रदूषण बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण होलिका दहन से निकला भारी धुआं और राख है। सोमवार रात हुई होली जलाने से हवा में कार्बन, राख और अन्य कण फैल गए। इसके अलावा शहर की खराब सड़कों से वाहनों के चलने पर उड़ती धूल, मेट्रो और अन्य निर्माण कार्यों से फैलने वाली धूल, तथा बढ़ता वाहन ट्रैफिक ने स्थिति और बिगाड़ दी। PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण सबसे ज्यादा खतरनाक हैं—ये सीधे फेफड़ों में घुसकर सांस की गंभीर बीमारियां, अस्थमा के दौरे और लंबे समय में फेफड़ों की क्षति पैदा कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक बाहर रहने से सांस लेने में तकलीफ, खांसी और आंखों में जलन हो सकती है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस के रोगियों को।

सरकार और पर्यावरण विभाग ने पहले से ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पारंपरिक लकड़ी जलाने के बजाय गो-काष्ठ (गाय के गोबर से बनी पर्यावरण-अनुकूल लकड़ी) के उपयोग की अपील की थी। गो-काष्ठ से धुआं और प्रदूषक काफी कम निकलते हैं, साथ ही पेड़ों की कटाई भी रुकती है और गोशालाओं को आर्थिक लाभ मिलता है। लेकिन इस बार भी कई जगहों पर पारंपरिक तरीके से होली जली, जिससे धुआं और प्रदूषण का असर साफ दिख रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, बारिश होने तक हवा में सुधार की उम्मीद कम है—बारिश की बूंदें धूल और प्रदूषकों को जमीन पर बैठा देती हैं, जिससे हवा साफ होती है। तब तक लोगों को सलाह है कि बाहर निकलते समय मास्क जरूर पहनें, अनावश्यक बाहर न जाएं, घर में हवा साफ रखने के लिए पौधे लगाएं और पानी का छिड़काव करें। यह घटना हमें याद दिलाती है कि त्योहारों की खुशियां मनाते हुए पर्यावरण का ध्यान रखना कितना जरूरी है—छोटे बदलाव जैसे गो-काष्ठ का इस्तेमाल बड़े असर डाल सकते हैं। अगर हम सब मिलकर प्रयास करें, तो भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सकता है।

नोट: यह खबर उपलब्ध जानकारी और विभिन्न मीडिया स्रोतों पर आधारित है। समाचार लिखे जाने के समय तक प्राप्त तथ्यों के अनुसार प्रस्तुत किया गया है। स्थिति में बदलाव संभव है और आधिकारिक पुष्टि के बाद अपडेट किया जा सकता है।

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