कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को OBC विभाग के कार्यक्रम में जातीय जनगणना के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने हालिया Gen Z आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर OBC समाज भी उसी तरह सड़कों पर उतर आए तो सरकार के पास कोई रास्ता नहीं बचेगा। राहुल ने दावा किया कि सरकार पहले इस गणना के खिलाफ थी, लेकिन दबाव में इसे जनगणना 2027 में शामिल किया गया। सरकार का कहना है कि गणना दूसरे चरण में होगी।
नई दिल्ली में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को OBC विभाग के एक कार्यक्रम में जातीय जनगणना पर अपना रुख रखा। उन्होंने हाल में हुए Gen Z के विरोध प्रदर्शनों का जिक्र किया और सवाल किया कि अगर OBC समाज भी उसी तरह सड़कों पर उतर आए तो क्या होगा। उनका कहना था कि OBC की आबादी बहुत बड़ी है। अगर यह वर्ग अपने अधिकारों को लेकर बड़े पैमाने पर लामबंद होता है तो सरकार के पास उसकी मांगों को नजरअंदाज करने का रास्ता नहीं बचेगा।
राहुल गांधी का आरोप
राहुल गांधी ने दावा किया कि केंद्र सरकार पहले जातीय जनगणना कराने के पक्ष में नहीं थी। जब कांग्रेस और अन्य दल इसकी मांग कर रहे थे, तब मांग करने वालों को अर्बन नक्सल तक कहा गया। उनके मुताबिक, बाद में दबाव के चलते सरकार ने इसे जनगणना में शामिल करने का फैसला किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यह गणना OBC की संख्या और हिस्सेदारी को कितनी सही तरह सामने लाएगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए अलग प्रावधान हैं, लेकिन OBC के लिए वैसा कॉलम नहीं रखा गया।
सरकार का रुख
केंद्र सरकार का कहना है कि जनगणना 2027 में सभी समुदायों की जातीय गणना शामिल की जाएगी। अप्रैल 2025 में इसकी घोषणा हुई थी और अगस्त में इसे शामिल भी किया गया। गृह मंत्रालय ने फरवरी 2026 में स्पष्ट किया कि जाति से जुड़ी जानकारी जनसंख्या गणना के दूसरे चरण में दर्ज की जाएगी। इस चरण के सवालों को पहले अंतिम रूप देकर अधिसूचित किया जाएगा।
बीजेपी और केंद्र सरकार का दावा है कि जनगणना 2027 में जातीय गणना कराने का फैसला मोदी सरकार ने खुद लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अप्रैल 2025 में इसे सामाजिक समानता और सभी वर्गों के अधिकारों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता बताया था।







