भोपाल की 65 वर्षीय उपासना जौहरी को 35 साल के इंतजार के बाद न्याय मिला है। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के निर्देश पर निशातपुरा इलाके में उनकी करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन से अतिक्रमण हटाया गया। अवैध रूप से बने 23 मकान और 25 दुकानें तोड़ी गईं। 1992 में सिविल कोर्ट ने उनके पक्ष में डिक्री जारी की थी, लेकिन लंबे समय तक जमीन पर कब्जा बना रहा।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बुजुर्ग महिला को लंबे संघर्ष के बाद राहत मिली है। 65 वर्षीय उपासना जौहरी पिछले 35 साल से अपनी जमीन पर अतिक्रमण हटवाने के लिए प्रयास कर रही थीं। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा की पहल के बाद मंगलवार को निशातपुरा इलाके में उनकी निजी जमीन से अवैध निर्माण हटा दिए गए।
निशातपुरा में हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, 1992 में सिविल कोर्ट ने उपासना जौहरी के पक्ष में 78 डेसिमल जमीन की डिक्री जारी की थी। इसके बावजूद कई लोगों ने उस जमीन पर बड़े-बड़े मकान और दुकानें बना ली थीं। कलेक्टर ने उपखंड अधिकारी (राजस्व) और तहसीलदार बैरागढ़ को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
प्रशासनिक टीम ने ग्राम निशातपुरा पहुंचकर सिविल कोर्ट और कलेक्टर के आदेशों का पालन करते हुए कार्रवाई की। इस दौरान लगभग 20 करोड़ रुपये मूल्य की 37 डेसिमल जमीन को अतिक्रमण से पूरी तरह मुक्त कराया गया। मौके पर अवैध रूप से बने 23 मकानों और 25 दुकानों को हटाकर जमीन को कब्जा मुक्त किया गया।







