मुजफ्फरपुर के मालीघाट में आयोजित ‘कला संवाद’ कार्यक्रम में वरिष्ठ रंगकर्मी एवं शिक्षक सुधीर कुमार को सम्मानित किया गया। कठपुतली कलाकार कांता देवी की अध्यक्षता में हुए इस आयोजन में कला, संस्कृति और रंगमंच पर चर्चा हुई। सुधीर कुमार रंगमंच के क्षेत्र में लगभग चार दशकों से सक्रिय हैं और ‘शिक्षा में नाटक कला’ के मास्टर ट्रेनर रह चुके हैं।
मुजफ्फरपुर के मालीघाट में सरला श्रीवास सोशल कल्चरल रिसर्च फाउंडेशन द्वारा ‘कला संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन सोमवार 07 सितंबर 2026 को हुआ, जिसकी अध्यक्षता कठपुतली कलाकार कांता देवी ने की। कार्यक्रम में कला, संस्कृति, रंगमंच एवं सामाजिक सरोकारों पर विस्तार से चर्चा हुई।
कला समाज परिवर्तन का साधन : कांता देवी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अध्यक्ष कांता देवी ने कहा कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का एक प्रभावी साधन है। उन्होंने कहा कि कठपुतली कला लंबे समय से सामाजिक संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम रही है। इस परंपरा को आगे बढ़ाने की प्रेरणा सरला श्रीवास एवं शांति गुप्ता के कार्यों से मिलती है।
उन्होंने कहा कि कठपुतली कला भारत की समृद्ध लोक एवं पारंपरिक कला का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बदलते समय और डिजिटल तकनीक के दौर में इस कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा आधुनिक माध्यमों से जोड़ने की आवश्यकता है।
युवा मंडल की अध्यक्ष ने रखी बात
सरला श्रीवास युवा मंडल की अध्यक्ष सुमन कुमारी ने कहा कि कला तभी सार्थक होती है, जब वह समाज के जीवन को बेहतर बनाने का माध्यम बने। उन्होंने कहा कि सरला श्रीवास ने कठपुतली कला के माध्यम से समाज को जोड़ने, जागरूक करने, हिंसा को समाप्त करने और शांति का संदेश देने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
सम्मानित हुए सुधीर कुमार और मुकेश कुमार
इस अवसर पर मध्य विद्यालय चकिया के प्रधानाध्यापक एवं वरिष्ठ रंगकर्मी सुधीर कुमार तथा मध्य विद्यालय टरमा के फिजिकल टीचर मुकेश कुमार मालाकार को सम्मानित किया गया। कठपुतली कलाकार एवं फाउंडेशन के सचिव सुनील कुमार ने दोनों को ‘लीचिया लाले लाल’ पुस्तक एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

चार दशकों का रंगमंचीय सफर
कठपुतली कलाकार सुनील कुमार ने बताया कि सुधीर कुमार सरकारी शिक्षक होने के साथ-साथ रंगमंच के क्षेत्र में लगभग चार दशकों से सक्रिय वरिष्ठ रंगकर्मी हैं। वह मुजफ्फरपुर के गोला रोड, दुर्गा स्थान निवासी हैं और विभिन्न मॉड्यूल में ‘शिक्षा में नाटक कला (Drama Art in Education)’ के मास्टर ट्रेनर के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
बीपीएससी 1999 बैच के तहत सहायक प्रशिक्षित शिक्षक रहे सुधीर कुमार वर्तमान में सरकारी मध्य विद्यालय चकिया, कुढ़नी, मुजफ्फरपुर के प्रधानाध्यापक हैं। कला, संस्कृति और थिएटर में उनकी विशेष रुचि रही है। वे नाटक, कहानी एवं पटकथा लेखन के साथ-साथ लघु फिल्म, टेली-फिल्म, नाटक एवं डॉक्यूमेंट्री फिल्म के निर्माता-निर्देशक के रूप में भी अपनी पहचान बना चुके हैं।
संरचना आर्ट थिएटर के संस्थापक
सुधीर कुमार संरचना आर्ट थिएटर (SAT) के संस्थापक सचिव हैं, जिसकी स्थापना 27 मार्च 1987 को हुई थी। वह मंच संचालन एवं इवेंट मैनेजमेंट से भी जुड़े रहे हैं। इसके अलावा वह रोटरी इंटरनेशनल के सदस्य तथा रोटरी क्लब ऑफ लिच्छवी, मुजफ्फरपुर के बोर्ड सदस्य भी रहे हैं।
गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए नि:शुल्क कंप्यूटर शिक्षा केंद्र चलाने तथा पुस्तक प्रकाशन के क्षेत्र में भी उनका योगदान रहा है। वर्ष 2010 में उनकी ‘रामलीला’ नामक हिंदी नाटक/प्ले संग्रह प्रकाशित हुआ। इसके अतिरिक्त ‘आदमियत महंगी है’ नामक नाटक संग्रह भी उनके साहित्यिक एवं रंगमंचीय योगदान को दर्शाता है।
300 से अधिक सम्मान
रंगमंच एवं सामाजिक क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें जिला स्तर पर 300 से अधिक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। नाटक एवं थिएटर के क्षेत्र में उन्हें राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला है। बिहार सरकार, जिला प्रशासन मुजफ्फरपुर तथा शिक्षा विभाग मुजफ्फरपुर द्वारा भी उन्हें विभिन्न अवसरों पर सम्मानित किया जा चुका है।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ रंगकर्मी सुधीर कुमार एवं शिक्षक मुकेश कुमार मालाकार के दीर्घ एवं समर्पित योगदान की सराहना करते हुए सुनील कुमार ने उनके स्वस्थ, सक्रिय एवं रचनात्मक जीवन की कामना की। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन अमन चिल्ड्रेन स्कूल की प्राचार्य बबिता ठाकुर ने दिया।







