होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का दावा, बिना अनुमति वाले रूट का इस्तेमाल करने वाले जहाजों को चेतावनी

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना पूरा नियंत्रण होने का ऐलान किया है। IRGC नेवी ने चेतावनी दी है कि जहाज केवल ईरान द्वारा निर्धारित रूट का ही इस्तेमाल करें, अन्य मार्गों को खतरनाक माना जाएगा। यह बयान ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध के बाद और समझौते की बातचीत के दौरान आया है।

ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना पूरा कब्जा होने का ऐलान कर दिया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नेवी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि स्ट्रेट से गुजरने वाले सभी जहाजों को सिर्फ ईरान की ओर से ही दिए गए अधिकृत रूट का ही इस्तेमाल करना होगा। IRGC नेवी ने साफ किया है कि ईरान द्वारा निर्धारित मार्गों के अलावा किसी अन्य रास्ते से जहाजों का आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित होगा और इसे खतरनाक माना जाएगा, जिसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अंतरराष्ट्रीय रूट प्रस्ताव पर ईरान की असहमति

यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध समाप्त हो चुका है और समझौते पर बातचीत जारी है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए दो अलग-अलग रूटों की घोषणा की थी – उत्तरी रूट (ईरानी जलक्षेत्र) और दक्षिणी रूट (ओमान और अमेरिका का समन्वित रूट)। ईरान ने इन दोनों में से केवल अपने अधिकृत रूट को ही वैध माना है और बाकी को अस्वीकार्य बताया है।

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर कालिबाफ ने कहा है कि होर्मुज का प्रशासन पहले जैसा कभी नहीं रहेगा और युद्ध के बाद इसका पूरा नियंत्रण ईरान के पास होगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन की बात भी कही, लेकिन स्पष्ट किया कि मार्ग का प्रबंधन ईरान ही करेगा। ईरान ने पहले ही घोषणा कर दी है कि दो महीने के अंदर वह इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शिपिंग फीस वसूलना शुरू कर देगा।

अमेरिका की सख्त चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान शिपिंग गतिविधियों पर कोई फीस लगाता है तो यह अमेरिका के लिए स्वीकार्य नहीं होगा। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर अंतिम समझौते में ऐसा कोई प्रावधान हुआ तो वे डील को रद्द कर सकते हैं।

गौरतलब है कि होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल निर्यात होता है। युद्ध के दौरान ईरान ने इस स्ट्रेट को बंद कर दिया था, जिससे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिसमें प्रतिबंध हटाने, संपत्ति अनफ्रीज करने और 60 दिनों में अंतिम समझौता करने का प्रावधान है, लेकिन होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव बना हुआ है।

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