माँ: वह पहली स्कूल, जहाँ दुनिया की सबसे कठिन डिग्री मिलती है

कल्पना कीजिए। एक महिला जिसने कभी किताब नहीं उठाई। जिसे अंग्रेजी का ‘ए’ भी नहीं आता। वही महिला आपको स्कूल भेजती है, होमवर्क करने को कहती है, रात-रात भर आपकी परीक्षा की चिंता करती है। विरोधाभास नहीं है यह। यह है माँ।

मदर्स डे पर हम फूल, केक, गिफ्ट देते हैं। इनकार नहीं, यह सब अच्छा लगता है। लेकिन क्या हमने कभी रुककर सोचा – वह किताबी पढ़ी-लिखी नहीं, फिर भी उसने जीवन की सबसे बड़ी डिग्री कैसे हासिल कर ली? वह डिग्री जिसका सर्टिफिकेट किसी दीवार पर नहीं लगता, लेकिन जिसकी पहचान दुनिया की हर अच्छी संतान करती है।

माँ: वह पहली स्कूल, जहाँ दुनिया की सबसे कठिन डिग्री मिलती है

माँ की दोहरी भूमिका: शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों

हम सबने अपनी माँ को दो रूपों में देखा है।

एक रूप – जब वह हमें सिखाती हैं। “पढ़ ले बेटा”, “समय पर सो”, “बड़ों का आदर कर”, “झूठ मत बोल” – ये उनके अनमोल मंत्र हैं। उनके पास कोई डिग्री नहीं, फिर भी उनके ये वाक्य हमें जीवन भर सही दिशा दिखाते हैं।

दूसरा रूप – जब वह खुद सीखती हैं। नया मोबाइल चलाना, ऑनलाइन पेमेंट करना, सोशल मीडिया पर हमारी पोस्ट देखना। क्या आपको याद है जब आपने अपनी माँ को पहली बार फोन पर वीडियो कॉल करना सिखाया था? उनका बच्चों जैसा उत्साह और बार-बार भूलने का वो मासूम सा डर। वह सीखती हैं… हमसे। और हमें सिखाती हैं… अपने जीवन से।

एक कहानी: रास्ते रोशनी करती वो महिला

मुझे अपनी माँ की एक बात बार-बार याद आती है। कक्षा 8 में मैं अंग्रेजी का पेपर देकर घर आया। बहुत खराब गया था। माँ ने पूछा – “कैसा हुआ?” मैं चिढ़कर बोला – “तुम्हें क्या पता कैसा होता है?”

उस दिन माँ कुछ नहीं बोली।

रात में जब मैं सो गया, वह बैठी रहीं। सुबह उठा तो देखा – पूजा की थाली में एक कलम रखी थी। मेरी वही कलम जिससे मैंने पेपर लिखा था। साथ में एक कागज पर लिखा था – “तेरी मेहनत पर भरोसा है, नंबरों पर नहीं।”

माँ ने कोई डिग्री नहीं ली। उस दिन उन्होंने सिर्फ एक बात सिखाई – विश्वास। उस विश्वास ने मुझे आज यहाँ तक पहुँचाया है।

क्यों माँ को नहीं मिलती कोई सर्टिफिकेट?

सोचिए। एक डॉक्टर को MBBS में 5.5 साल लगते हैं। इंजीनियर को 4 साल। सीए को भी 4-5 साल। पर एक माँ बनने की पढ़ाई कितने साल की होती है?

जवाब: उम्र भर की।

वह पहले 9 महीने अपने शरीर में उस बच्चे को ढोती है। फिर जन्म के बाद कभी न निकलने वाली रातों की नींद। फिर बीमारी में डॉक्टर के चक्कर। फिर स्कूल एडमिशन के लिए लाइनें। फिर ट्यूशन फीस के लिए अपनी जरूरतें कम करना। फिर कॉलेज के लिए कर्ज लेना। फिर नौकरी और शादी की चिंता।

और जब आप बड़े हो जाते हैं… तब भी उसकी चिंता खत्म नहीं होती। बस रूप बदल लेती है। अब वह पूछती है – “खाना खाया?”, “समय पर सो रहे हो?”, “घर में सब ठीक है?”

इस सबके लिए किसी यूनिवर्सिटी ने उसे डिग्री नहीं दी। पर दुनिया की हर बड़ी डिग्री से यह कहीं ज्यादा मूल्यवान है।

माँ की दोहरी भूमिका: शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों

माँ और कॅरियर: वह बलिदान जो कोई नहीं देखता

आज के दौर में बात अलग है। हर माँ पढ़ी-लिखी और करियर-ओरिएंटेड है। वह ऑफिस भी जाती है, घर भी संभालती है, बच्चों की पढ़ाई भी देखती है। यह और भी मुश्किल है।

जब एक महिला माँ बनती है, तो वह सिर्फ एक बच्चे को जन्म नहीं देती। वह अपने कई सपनों को दफन करना शुरू कर देती है। प्रमोशन छोड़ना, बड़ा प्रोजेक्ट ठुकराना, कभी नौकरी ही छोड़ देना।

हर सफल व्यक्ति के पीछे एक माँ होती है। डॉक्टर हो, इंजीनियर हो, वकील हो, पायलट हो, या फिर यहाँ ये लेख लिखने वाला लेखक। हम सबने अपनी माँ की उंगली पकड़कर चलना सीखा। और आज भी… जब थक जाते हैं, तो सबसे पहले उन्हीं का सहारा ढूंढते हैं।

मदर्स डे का असली अर्थ: केवल उपहार नहीं

मैं आपसे कुछ नहीं कहूंगा कि महंगे गिफ्ट दें या केक कटवाएं। यह सब ठीक है। पर इसके साथ-साथ:

1. एक बार उनसे पूछें – “माँ, आप कैसी हैं?” सिर्फ पूछने भर के लिए नहीं, सच में सुनने के लिए।

2. एक दिन उनके काम खुद करें – बर्तन धोना, कपड़े फोल्ड करना, उन्हें पूरा दिन आराम करने दें।

3. बताएं कि वह आपके लिए क्या हैं – शब्दों में। क्योंकि बहुत से लोग ऐसे हैं जिनकी माँ अब इस दुनिया में नहीं है। वह क्या कुछ नहीं देंगे एक बार और “माँ” कहने के लिए।

अंत में: वह पहली स्कूल

एक कवि ने खूब कहा है –

“माँ तो बस एक शब्द नहीं है, यह तो रिश्तों की पहली सीख है।
जो डिग्री दुनिया नहीं दे सकती, वह तो बस माँ ही देती है।”

आपने अपने जीवन में कई स्कूल बदले होंगे। कई टीचर मिले होंगे। पर वह पहली टीचर – जिसने आपको पहली बार हाथ पकड़ना सिखाया, पहला शब्द बोलना सिखाया, पहली प्रार्थना सिखाई।

वह है – माँ।

उसके कहे बिना आप अक्षर जान गए, पर उसके सिखाए बिना आप इंसान कभी नहीं बन सकते थे।

इस मदर्स डे पर, जरूरी नहीं कि आप कोई कीमती तोहफा दें। एक गले लगना, एक सच्चा धन्यवाद – यही सबसे बड़ा उपहार है।

क्योंकि माँ वो इंसान है जो आपकी पहली मुस्कान से लेकर आखिरी सांस तक… बस आपकी ही होती है।

माँ को सलाम।

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