भोपाल मेट्रो परियोजना के अंडरग्राउंड कॉरिडोर निर्माण को लेकर बड़ा बाग कब्रिस्तान क्षेत्र में विवाद उत्पन्न हो गया है। मुस्लिम पक्ष ने कब्रों को संभावित नुकसान की आशंका जताते हुए आपत्ति दर्ज कराई है। इस मामले में प्रशासन ने जियोलॉजिकल सर्वे शुरू कर दिया है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन के नीचे कब्रें मौजूद हैं या नहीं।
“प्रतिनिधिक तस्वीर”
मेट्रो टनल का मार्ग और विवाद का कारण
भोपाल मेट्रो के तहत रेलवे स्टेशन से नादरा स्टेशन तक सुरंग (टनल) खोदी जानी प्रस्तावित है। इसके लिए टनल बोरिंग मशीन (TBM) जुलाई माह से काम शुरू करेगी। योजना के अनुसार, बड़ा बाग क्षेत्र के पास मेट्रो को जमीन के ऊपर लाने के लिए एक एग्जिट पॉइंट बनाया जाना है। हालांकि, यह निर्माण जिस जमीन पर होना है, वह अभी तक मेट्रो परियोजना को आवंटित नहीं हुई है। स्थानीय मुस्लिम पक्ष का कहना है कि बड़ा बाग एक शाही कब्रिस्तान है, जहां कई पुरानी कब्रें मौजूद हैं। उन्हें आशंका है कि जमीन के 24 से 30 मीटर नीचे होने वाली खुदाई से इन कब्रों को नुकसान पहुंच सकता है। इसी विवाद के चलते प्रशासन ने क्षेत्र में जियोलॉजिकल सर्वे कराना शुरू किया है ताकि जमीन के नीचे की स्थिति का सटीक आकलन किया जा सके।
प्रोजेक्ट की लागत और निर्णय का महत्व
मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, अंडरग्राउंड कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) वर्ष 2018 में ही तैयार कर ली गई थी। यदि अब मेट्रो के मार्ग (अलाइनमेंट) में कोई बदलाव किया जाता है, तो केंद्र सरकार से नई मंजूरी लेनी होगी। इस प्रक्रिया से परियोजना की लागत और समय, दोनों में वृद्धि हो सकती है। अधिकारियों के अनुसार, भोपाल मेट्रो परियोजना पर प्रतिदिन लगभग 22 लाख रुपये का खर्च आ रहा है। ऐसे में किसी भी प्रकार की देरी से आर्थिक नुकसान बढ़ सकता है, जिसे देखते हुए प्रशासन जल्द से जल्द समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने जानकारी दी है कि बड़ा बाग क्षेत्र में राजस्व विभाग की टीम निरीक्षण कर रही है। जमीन से जुड़े सभी प्रकरणों की जांच की जा रही है और शीघ्र ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि मेट्रो निर्माण से कब्रिस्तान को खतरा होने की बात सही नहीं है। वहीं, कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद का कहना है कि मस्जिद और कब्रिस्तान अलग विषय हैं तथा इस मामले का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जाना चाहिए।
कानूनी पेंच और आगे का रास्ता
इस विवाद को लेकर इंतेजामिया कमेटी औकाफ ए अम्मा ने वक्फ ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की है। ट्रिब्यूनल में इस मामले पर 14 मई को सुनवाई निर्धारित है। इन कानूनी प्रक्रियाओं के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर जारी सर्वे के नतीजे ही यह तय करेंगे कि आगे का रास्ता क्या होगा। फिलहाल, प्रशासन, मेट्रो प्रबंधन और स्थानीय पक्षों के बीच मामला संवाद के दायरे में है।
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