अमेरिका का 2700 करोड़ का नुकसान: एक पायलट को बचाने में उड़ा खजाना
अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान एक अमेरिकी पायलट को दुश्मन की सीमा के अंदर से बचाने के लिए किए गए ऑपरेशन में अमेरिकी सेना को करीब 2700 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। इस ऑपरेशन के दौरान कई महंगे विमान क्षतिग्रस्त हो गए या क्रैश हो गए।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध में अमेरिकी सेना को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा, जब उसका एक F-15E स्ट्राइक ईगल जेट ईरान की जमीन पर क्रैश हो गया। इस जेट के वेपन्स सिस्टम ऑफिसर (पायलट) ने खुद को पहाड़ की दरार में छिपा लिया और एक दिन से अधिक समय तक वहां अकेले रहते हुए ईरानी बलों से बचता रहा।
सीआईए और स्पेशल फोर्सेस ने मिलकर किया ऑपरेशन
अमेरिकी सेना ने अपने इस सैनिक को बचाने के लिए तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। इस ऑपरेशन में आर्मी डेल्टा फोर्स और नेवी SEAL टीम सिक्स जैसी स्पेशल फोर्सेस के साथ-साथ सीआईए (CIA) और खुफिया एजेंसियां भी शामिल थीं। सीआईए ने पहले ही ईरान में यह अफवाह फैला दी थी कि दोनों क्रू मेंबर सुरक्षित बच चुके हैं, जिससे ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) भ्रमित रहा। इस ऑपरेशन में इज़राइल ने भी अमेरिका की मदद की। इज़राइल ने अमेरिका के साथ खुफिया जानकारी साझा की और अपने सैन्य अभियानों को टाल दिया, ताकि पायलट के बचाव अभियान में कोई बाधा न आए।
2700 करोड़ से अधिक का हुआ नुकसान
इस रेस्क्यू ऑपरेशन में अमेरिका को अपने पायलट की जान बचाने के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ी। ऑपरेशन के दौरान हुए नुकसान का विवरण इस प्रकार है, दो MC-130J विमान खराब हुए: ये स्पेशल ऑपरेशंस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट ईरान में खराब हो गए। अमेरिका ने उन्हें ईरानी हाथों में जाने से बचाने के लिए वहीं नष्ट कर दिया। एक MC-130J की कीमत लगभग 960 करोड़ रुपये है, दोनों की कीमत करीब 1920 करोड़ रुपये है।
A-10 वॉर्थोग क्रैश: इसी ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी सेना का A-10 वॉर्थोग विमान भी क्रैश हो गया। इस विमान की कीमत लगभग 150 करोड़ रुपये है।
C-130 हरक्यूलस को गिराने का दावा: ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि उसने C-130 हरक्यूलस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को भी गिरा दिया। इसकी कीमत लगभग 700 करोड़ रुपये है।
इन सभी नुकसानों को जोड़ने पर अमेरिका को इस एक ऑपरेशन में लगभग 2700 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
युद्ध में बढ़ता खर्च
अमेरिकी सेना के लिए यह ऑपरेशन रणनीतिक और नैतिक दृष्टि से जरूरी था, क्योंकि यदि यह पायलट ईरानी सेना के हाथ लग जाता तो अमेरिका को कूटनीतिक रूप से बड़ी हार का सामना करना पड़ता। हालांकि, इस भारी भरकम ऑपरेशन का खर्च पहले से ही युद्ध की वजह से दबाव में चल रही अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डालेगा। युद्ध शुरू होने के पांचवें हफ्ते में अमेरिकी सेना को ईरानी मिसाइलों और एयर डिफेंस सिस्टम से अप्रत्याशित चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
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