इलेक्ट्रिक हाईवे का ट्रायल शुरू, सरकार की तेल निर्भरता कम करने की योजना
भारत सरकार ने देश में इलेक्ट्रिक हाईवे (Electric Highway) मॉडल का परीक्षण शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य लंबी दूरी के यातायात को विद्युत वाहनों (ईवी) की ओर स्थानांतरित कर तेल आयात पर निर्भरता को कम करना है। यह पहल वैश्विक तेल आपूर्ति में होने वाले व्यवधानों, विशेषकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील मार्गों में तनाव के मद्देनजर की गई है।
"प्रतिनिधिक तस्वीर"चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर
इस परियोजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों पर नियमित अंतराल पर तीव्र चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। विशेषज्ञ अभिजीत सिंहा के अनुसार, नई प्रणाली में सौर, पवन और हाइड्रोजन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। हाईवे पर चार्जिंग के दौरान ड्राइवरों के लिए बेहतर सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि लंबी दूरी की यात्रा सुगम हो सके।
ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर अपेक्षित प्रभाव
वर्तमान में भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ट्रक और बसों में सबसे अधिक तेल की खपत होती है, और इनसे काफी प्रदूषण भी फैलता है। नीति आयोग का अनुमान है कि यदि वर्ष 2030 तक 20 प्रतिशत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का लक्ष्य प्राप्त हो जाता है, तो लगभग 6 करोड़ वाहन पेट्रोल-डीजल के स्थान पर बिजली से चल सकेंगे। सरकार का मानना है कि यह बदलाव न केवल तेल आयात पर निर्भरता घटाएगा, बल्कि आपात स्थिति में तेल आपूर्ति बाधित होने पर भी देश की बुनियादी परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होगा। यह पहल भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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