छपरा: बंदर बने 'स्टेशन मास्टर', रेड सिग्नल कर रोक रहे ट्रेन

बिहार के सारण जिले में दो रेलवे स्टेशनों के बीच बंदरों के झुंड ने रेल यातायात के लिए नई समस्या खड़ी कर दी है। ये बंदर इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल गेट पर कूद-फाँद कर सिग्नल को लाल (रेड) कर देते हैं, जिससे ट्रेनों को रोकना पड़ता है। स्थानीय गेटमैन को इन्हें डंडा लेकर खदेड़ने की नौबत आ रही है।

छपरा: बंदर बने 'स्टेशन मास्टर', रेड सिग्नल कर रोक रहे ट्रेन

इलेक्ट्रिक गेट पर कूदकर खोल देते हैं लॉक

गेटमैन धर्मेन्द्र ने बताया कि पिछले तीन-चार दिनों से बंदरों के झुंड ने गेट के पास बने बड़े पेड़ पर डेरा जमा लिया है। जैसे ही गाड़ियों के लिए हरा (ग्रीन) सिग्नल दिया जाता है और इलेक्ट्रिक गेट बंद किया जाता है, बंदर उसी गेट पर कूद पड़ते हैं। इससे झटका लगने पर गेट का लॉक अपने आप खुल जाता है और सिग्नल लाल हो जाता है। इसके बाद गेटमैन को डंडा लेकर बंदरों को भगाना पड़ता है, फिर से गेट को लॉक करना पड़ता है और सिग्नल ग्रीन करना पड़ता है। तब जाकर ट्रेनें वहाँ से गुजर पाती हैं। गेटमैन के अनुसार, गर्मी के कारण बंदरों का झुंड यहीं आकर ठहरता है, जिससे यह समस्या हो रही है।

आम लोग भी बंदरों के डर से परेशान

बंदरों से केवल रेल कर्मचारी ही नहीं, बल्कि आम लोग भी काफी परेशान हैं। जब गेट बंद होता है, तो दोनों तरफ वाहनों की कतारें लग जाती हैं। ऐसे में बाइक और कार सवार लोग बंदरों के हमले के डर से सहमे रहते हैं। तकनीकी गड़बड़ी होने से ऑटोमैटिक सिग्नल तकनीक पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। रेल विभाग ने इस मामले की जानकारी वन विभाग को दे दी है और बंदरों को पकड़ने का अनुरोध किया है। फिलहाल रेल अधिकारी इस समस्या के समाधान के प्रयासों में जुटे हैं।

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