रविवार, 15 मार्च 2026

भोपाल नगर निगम वर्कशॉप में लोकायुक्त का छापा: फर्जी बिलिंग से करोड़ों की गड़बड़ी का आरोप

भोपाल नगर निगम में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच के तहत रविवार सुबह लोकायुक्त की टीम ने सेंट्रल वर्कशॉप में छापेमारी की। यह कार्रवाई बिना काम कराए फर्जी बिलिंग के जरिए करोड़ों रुपए निकालने के मामले में की गई है। टीम ने माता मंदिर के पास स्थित निगम के इस कार्यालय के दस्तावेजों को खंगाला और मौजूद कर्मचारियों से पूछताछ की। फिलहाल यह कार्रवाई जारी है।


भोपाल नगर निगम वर्कशॉप में लोकायुक्त का छापा

दो दिन पहले डेटा सेंटर में हुई थी कार्रवाई

यह छापेमारी शुक्रवार को की गई एक बड़ी कार्रवाई के बाद हुई है। दरअसल, 11 मार्च को लोकायुक्त ने नगर निगम के अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर समेत अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी की धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी। इसके बाद शुक्रवार को टीम ने निगम के फतेहगढ़ स्थित डेटा सेंटर में दबिश देकर करीब 10 साल के दस्तावेज और सर्वर डेटा जब्त किया था। उसी जांच के दौरान सेंट्रल वर्कशॉप में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियों के सबूत मिले थे, जिसके आधार पर रविवार को यह कार्रवाई की जा रही है।

कैसे हो रही थी कथित गड़बड़ी?

लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी बिल तैयार किए गए। आरोप है कि नगर निगम के जलकार्य, सामान्य प्रशासन और केंद्रीय वर्कशॉप जैसे विभागों में वाहनों की मरम्मत, पेंटिंग और अन्य काम दिखाकर बिल बनाए गए, जबकि वास्तव में ये काम हुए ही नहीं। कई मामलों में तो जिन विभागों के नाम से बिल तैयार किए गए, उन्हें भी इसकी जानकारी नहीं थी। इस फर्जी बिलिंग के जरिए परिचितों और रिश्तेदारों की फर्मों को भुगतान करने का आरोप है।

जांच में SAP सॉफ्टवेयर डेटा पर फोकस

लोकायुक्त टीम ने भुगतान प्रक्रिया से जुड़े SAP सॉफ्टवेयर का डिजिटल डेटा भी अपने कब्जे में लिया है। अब इस डेटा का विश्लेषण कर यह पता लगाया जाएगा कि किन-किन कार्यों के नाम पर कितना भुगतान किया गया और इनमें से कितने काम वास्तव में पूरे हुए थे। सूत्रों के मुताबिक, मोटर वर्क शाखा, जल कार्य विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़े कुछ कार्यों में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। जांच के दायरे में कई और कर्मचारियों और ठेकेदार फर्मों के शामिल होने की संभावना है।

इस बीच, इस मामले में नामजद अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर ने कहा है कि बिल सीधे लेखा शाखा में नहीं बनते। वह संबंधित विभागों से सत्यापन के बाद आते हैं और फंड की उपलब्धता के अनुसार आयुक्त से चर्चा कर भुगतान किया जाता है। फिलहाल लोकायुक्त की जांच जारी है और जब्त दस्तावेजों व डिजिटल डेटा की जांच के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी।

नोट: यह खबर उपलब्ध जानकारी और विभिन्न मीडिया स्रोतों पर आधारित है। समाचार लिखे जाने के समय तक प्राप्त तथ्यों के अनुसार प्रस्तुत किया गया है। स्थिति में बदलाव संभव है और आधिकारिक पुष्टि के बाद अपडेट किया जा सकता है। 



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