रविवार, 15 मार्च 2026

भोपाल मेडिकल मिस्ट्री: महिला के शरीर में मिले पुरुषों वाले XY क्रोमोसोम, पति ने कहा- उम्रभर निभाऊंगा साथ

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक दुर्लभ मेडिकल मामला सामने आया है, जिसने चिकित्सा जगत का ध्यान खींचा है। एक विवाहित महिला, जो बाहरी रूप से पूरी तरह सामान्य थी, की जांच में पता चला कि उसके शरीर में महिलाओं के विपरीत पुरुषों वाले XY क्रोमोसोम हैं। शादी के दो साल बाद संतान न होने पर शुरू हुई जांच में यह चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। महिला के अंदर ओवरी न होकर अविकसित अंडकोष (टेस्टीज) पाए गए। रक्षा मंत्रालय में अधिकारी पति ने इस कठिन समय में पत्नी का साथ निभाते हुए एम्स भोपाल में उसका सफल इलाज कराया और जीवनभर साथ रहने का फैसला किया।


भोपाल मेडिकल मिस्ट्री


शादी के दो साल बाद जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

साल 2023 में हुई इस अरेंज मैरिज के बाद दंपती का जीवन सामान्य रूप से चल रहा था। शादी के वक्त पत्नी की उम्र करीब 20 साल थी। दो साल बाद भी जब परिवार में कोई नन्हा मेहमान नहीं आया, तो दंपती ने परिवार को बताए बिना निजी तौर पर इलाज शुरू कराया। भोपाल के एक निजी अस्पताल में कराई गई जांच में डॉक्टरों ने पाया कि महिला के शरीर में सामान्य महिलाओं (XX) की तरह नहीं, बल्कि पुरुषों (XY) वाले क्रोमोसोम हैं। इस जानकारी से दंपती सदमे में आ गया और करीब डेढ़ महीने तक इसे स्वीकार नहीं कर पाए।

एम्स भोपाल में हुआ जटिल इलाज

हिम्मत दिखाते हुए पति ने पत्नी को बेहतर इलाज के लिए एम्स भोपाल जाने के लिए प्रेरित किया। यहां एम्स के ट्रांसजेंडर क्लीनिक में विशेषज्ञों की टीम ने दंपती की काउंसलिंग की और विस्तृत जांच शुरू की।

MRI में पता चली शारीरिक असामान्यता

एम्स में हुई एमआरआई जांच में पता चला कि महिला के पेट के निचले हिस्से में, जहां गर्भाशय और अंडाशय होने चाहिए थे, वहां अविकसित अंडकोष (टेस्टीज) मौजूद हैं। ये अंडकोष लगभग निष्क्रिय अवस्था में थे, जिसकी वजह से शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर बहुत कम था और रक्त जांच सामान्य दिख रही थी। डॉक्टरों को यह भी मिला कि महिला को कभी मासिक धर्म नहीं आया था, जिसे जागरूकता के अभाव में नजरअंदाज कर दिया गया था। एम्स के यूरोलॉजी, बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग की संयुक्त टीम ने मरीज की स्थिति का आकलन किया। दो चरणों में सर्जरी का निर्णय लिया गया। पहले चरण में माइक्रो प्लास्टिक सर्जरी से निजी अंगों से जुड़े अविकसित पुरुष अंग के हिस्से को हटाया गया, जबकि संवेदनशीलता बनाए रखने के लिए नसों को सुरक्षित रखा गया। दूसरे चरण में पेट के अंदर मौजूद अविकसित अंडकोष को निकाला गया।

पति का साथ और भविष्य की योजना

इस पूरी प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका पति की रही। रक्षा अधिकारी ने न सिर्फ पत्नी को हर कदम पर मानसिक समर्थन दिया, बल्कि उसे अवसाद में जाने से भी बचाया। दंपती ने एक-दूसरे के साथ जीवनभर पति-पत्नी के रूप में रहने का फैसला किया है। डॉक्टरों के अनुसार, इस स्थिति में प्राकृतिक रूप से संतान प्राप्ति संभव नहीं है, इसलिए दंपती ने भविष्य में बच्चा गोद लेने की योजना बनाई है। एम्स भोपाल के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिनव सिंह ने बताया कि ऐसे मामलों के लिए संचालित ट्रांसजेंडर क्लीनिक में हर महीने बड़ी संख्या में परामर्श के लिए लोग आते हैं, जिनमें से करीब 10-12 मरीजों की ही सर्जरी हो पाती है। उन्होंने कहा, "यह मामला सिर्फ चिकित्सकीय नहीं है, बल्कि रिश्तों की मजबूती, समझदारी और संवेदनशीलता का प्रेरणादायक उदाहरण है। एम्स में कम खर्च पर ये सर्जरी उपलब्ध हैं, लेकिन इसके साथ मरीज और परिवार की गहन काउंसलिंग भी जरूरी है, ताकि वे अपनी स्थिति को स्वीकार कर सम्मानजनक जीवन जी सकें।"

नोट: यह खबर उपलब्ध जानकारी और विभिन्न मीडिया स्रोतों पर आधारित है। समाचार लिखे जाने के समय तक प्राप्त तथ्यों के अनुसार प्रस्तुत किया गया है। स्थिति में बदलाव संभव है और आधिकारिक पुष्टि के बाद अपडेट किया जा सकता है। 

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