रविवार, 15 मार्च 2026

सीएम नीतीश कुमार से मिले सांसद सुनील कुमार, बगहा के लिए उठाई ये बड़ी मांग

बगहा (बेतिया)। वाल्मीकिनगर संसदीय क्षेत्र के सांसद सुनील कुमार ने रविवार को पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बगहा को राजस्व जिला बनाने की मांग का ज्ञापन सौंपा। साथ ही, बगहा के शास्त्रीनगर को बेलवनिया से जोड़ने वाली गंडक नदी पर पुल निर्माण की भी मांग रखी।


सीएम नीतीश कुमार से मिले सांसद सुनील कुमार, बगहा के लिए उठाई ये बड़ी मांग

पुल न होने से विकास पर रोक का खतरा

सांसद सुनील कुमार ने मुख्यमंत्री को बताया कि गंडक नदी पर प्रस्तावित शास्त्रीनगर-बेलवनिया पुल बगहा क्षेत्र के भविष्य के लिए बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि इस पुल के अभाव में बगहा क्षेत्र मुख्य धारा से कट सकता है, जिससे यहां के विकास की गति बाधित होगी। उन्होंने इसे क्षेत्र की जनता की एक बड़ी आवश्यकता बताया।

क्षेत्रीय विकास के लिए उठाई मांग

मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में बगहा को राजस्व जिले का दर्जा दिए जाने को लेकर विस्तार से अवगत कराया गया। सांसद का कहना था कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था सुदृढ़ होगी और विकास योजनाओं को गति मिलेगी। फिलहाल बगहा, पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया अनुमंडल का हिस्सा है। मुख्यमंत्री को दिए ज्ञापन में इन दोनों मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया गया है।

परिचय - बगहा, बिहार राज्य के पश्चिम चंपारण जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध नगर है। नेपाल की सीमा से सटा यह क्षेत्र अपनी भौगोलिक विशेषताओं, प्राचीन इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यह शहर वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व के निकट होने के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी है

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

बगहा का प्राचीन नाम 'सदानीरा' था, जो यहाँ से बहने वाली नारायणी नदी (गंडक) के कारण पड़ा था। इस नदी में सालों भर पानी का प्रवाह बना रहता था, इसलिए इसे सदानीरा कहा गया . प्रसिद्ध साहित्यकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' और जगदीशचंद्र माथुर ने अपनी रचनाओं में इस क्षेत्र को सदानीरा नाम से संबोधित किया है। माथुर की प्रसिद्ध रचना 'ओ सदानीरा' आज भी बारहवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल है

नामकरण की कथा

क्षेत्र का वर्तमान नाम 'बगहा' वन्यजीवों से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि कालांतर में इस इलाके में बाघों की अधिक संख्या होने के कारण इसका नाम बगहा पड़ा। यह क्षेत्र वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व के घने जंगलों से जुड़ा है, जहाँ आज भी बाघ, तेंदुआ, हिरण, साँभर, जंगली भैंसा और एकसिंगी गैंडा जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं

धार्मिक एवं पौराणिक महत्व

बगहा का क्षेत्र पौराणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ से कुछ दूरी पर स्थित वाल्मीकिनगर वह स्थान है जहाँ महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना की थी। यहीं पर देवी सीता ने महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में लव और कुश को जन्म दिया था, इसके अतिरिक्त, त्रिवेणी संगम (गंडक, पंचनद और सोनहा नदियों का संगम) बगहा के पास ही स्थित है। पौराणिक कथा के अनुसार, विष्णु भक्त 'गज' और 'ग्राह' की प्रसिद्ध लड़ाई इसी स्थान से शुरू हुई थी

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