मध्य प्रदेश के भोपाल में एक नवविवाहिता की मौत ने न्यायिक प्रक्रियाओं और डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता को बहस के केंद्र में रख दिया है। मॉडल व अभिनेत्री रहीं त्विषा शर्मा (33) का पार्थिव शरीर 12 मई को उनके ससुराल कटारा हिल्स में मिला था। इस घटना के बाद परिवार ने पति समर्थ सिंह और सास, पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगाए हैं।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता के तहत दहेज मृत्यु से संबंधित धाराओं और दहेज निषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। वहीं, आरोपी पति समर्थ सिंह फिलहाल फरार है, जिसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए 30,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
शादी का वीडियो क्यों बना मामले का अहम हिस्सा?
सोशल मीडिया पर सामने आई शादी के वीडियो में त्विषा काफी खुश और मजाकिया अंदाज में नजर आ रही हैं। पांच मिनट के इस वीडियो में वह पंडित से लेकर अपने भाई के साथ हंसी-ठिठोली कर रही हैं। एक दृश्य में परिवार का सदस्य कैमरे पर कहता है, “जीजू कोर्ट में वकील होंगे, घर पर जज त्विषा दी ही होंगी।” दूसरे क्लिप में त्विषा शादी के बाद पति को उसके कमरे से बाहर निकालने का मजाक उड़ाती नजर आती हैं। इस वीडियो में हंसता-खेलता माहौल, घटना के बाद पूरी तरह से एक दर्दनाक तस्वीर पेश कर रहा है। पीड़िता के रिश्तेदारों ने उन्हें “बाहर से सख्त, अंदर से बहुत नरम, नारियल की तरह” बताया है। उनके भाई ने यह भी बताया कि जब त्विषा ने पहली बार समर्थ की प्रोफाइल देखी तो उन्होंने कहा था, “ये बंदा कितना सही है।”
फर्जी चैट का आरोप और डिजिटल फॉरेंसिक की मांग
मामले की सबसे अहम बारीकी यह है कि त्विषा के परिवार ने दावा किया है कि उन्होंने मौत से पहले कई लोगों को संदेश भेजे, जिसमें उन्होंने “I am trapped” (मैं फंस गई हूं) तक लिखा था। परिवार ने सीडीआर रिकॉर्ड्स, लोकेशन डेटा और सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग की है। लेकिन इसी बीच आरोपी पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में याचिका दाखिल कर यह दावा किया है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे व्हाट्सएप चैट और ऑडियो क्लिप पूरी तरह से फर्जी हैं। उन्होंने त्विषा के रिश्तेदारों और परिचितों के मोबाइल फोन जब्त करके डिजिटल फॉरेंसिक जांच की मांग की है।
गिरिबाला सिंह ने अपने आवेदन में कहा है कि उनके घर की सीसीटीवी डीवीआर की सीलिंग सही तरीके से नहीं की गई और उसमें दो दिन से अधिक का टाइमस्टैंप का अंतर है। उनका तर्क है कि घर में लगे आठ कैमरों का रखरखाव एक निजी एजेंसी ने किया था, जिसमें नियमितता की कमी थी।
कानूनी विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
कानूनी जानकारों के अनुसार, यह मामला अब लगभग पूरी तरह डिजिटल फॉरेंसिक साक्ष्यों पर निर्भर है। कोर्ट को यह तय करना है कि जो चैट और ऑडियो क्लिप त्विषा की ओर से भेजे जाने का दावा किया जा रहा है, वह प्रामाणिक हैं या नहीं। साथ ही सीसीटीवी टाइमलाइन की सत्यता भी बड़ा मुद्दा होगा।
फिलहाल, समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका न्यायाधीश अविनेंद्र कुमार सिंह की अवकाशकालीन पीठ में सूचीबद्ध है। एक सत्र न्यायालय पहले ही उन्हें राहत देने से इनकार कर चुका है। वहीं, त्विषा के परिवार ने गिरिबाला सिंह की जमानत को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। पुलिस ने पुष्टि की है कि दोनों पक्षों के दावों की जांच की जा रही है और फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।