नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी शुभम खैरनर ने वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित श्री सत्य साईं विश्वविद्यालय में बीएएमएस (आयुर्वेदिक चिकित्सा) में दाखिला लिया था। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, दाखिले के बाद वह न तो कक्षाओं में गए और न ही परीक्षाओं में शामिल हुए। यह जानकारी जांच एजेंसियों को मिली है, जो आरोपी के संभावित नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।
विश्वविद्यालय ने कहा- दाखिले के बाद कोई सक्रिय संबंध नहीं
विश्वविद्यालय के कुलपति मुकेश तिवारी ने स्पष्ट किया है कि संस्थान का आरोपी से कोई सक्रिय संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि खैरनर ने 2021 में बीएएमएस में दाखिला तो लिया, लेकिन उसके बाद वह कभी परिसर नहीं लौटा। “उसने न तो कक्षाओं में भाग लिया, न ही परीक्षाओं में उपस्थित हुआ और न ही किसी विश्वविद्यालयी गतिविधि में हिस्सा लिया।” तिवारी ने बताया कि दाखिले के बाद संस्थान का उससे कोई और लेन-देन नहीं रहा।
सीबीआई कर रही मामले की जांच
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले की बड़ी जांच अपने हाथ में ले ली है। एजेंसी ने 30 वर्षीय आरोपी शुभम खैरनर को नासिक से अपनी हिरासत में लिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोप, खैरनर ने कथित तौर पर नीट स्कैंडल से जुड़ा “गेस पेपर” पुणे के एक संदिग्ध से 10 लाख रुपये में खरीदा था और बाद में उसे हरियाणा के एक खरीदार को 15 लाख रुपये में बेच दिया। जांचकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि नीट का प्रश्न पत्र नासिक में नहीं छपा था, जिससे पिछले संदेह कमजोर हुए हैं कि लीक की शुरुआत वहां के प्रिंटिंग प्रेस से हुई थी।
क्या है पूरा मामला?
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा 3 मई को आयोजित नीट-यूजी 2026 परीक्षा में लगभग 22 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बीच 12 मई को यह परीक्षा रद्द कर दी गई थी। राजस्थान स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) के अनुसार, जांच के दौरान बरामद एक हाथ से लिखा “गेस पेपर” वास्तविक नीट प्रश्न पत्र से आंशिक रूप से मेल खाता है। जांचकर्ताओं ने दावा किया है कि 281 प्रश्नों वाले इस दस्तावेज़ में परीक्षा में पूछे गए सभी 90 जीवविज्ञान और सभी 45 रसायन विज्ञान के प्रश्न मौजूद थे। फिलहाल देशभर में कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच जारी है।
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