मुजफ्फरपुर नगर निगम के खजाने में 50 करोड़, फिर भी विकास ठप; बोर्ड बैठक में पार्षदों ने किया हंगामा, जमीन पर बैठकर लगाया धरना

मुजफ्फरपुर नगर निगम के बोर्ड की बैठक में पार्षदों ने जमकर हंगामा किया। निगम के खजाने में 50 करोड़ रुपये से अधिक होने के बावजूद विकास कार्य ठप होने का आरोप लगाते हुए पार्षदों ने नगर आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बैठक कक्ष में ही जमीन पर बैठकर धरना शुरू कर दिया।

मुजफ्फरपुर: शहर की बदहाल व्यवस्था को लेकर शनिवार को नगर निगम की बोर्ड बैठक में पार्षदों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। निगम के पास 50 करोड़ रुपये से अधिक की राशि होने के बावजूद विकास कार्यों की रफ्तार सुस्त रहने से नाराज पार्षदों ने नगर आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, नगर भवन में सुबह करीब 11:30 बजे बोर्ड की बैठक शुरू हुई। बैठक शुरू होते ही पार्षद अपनी सीटों से उठकर बीच में आ गए और शहर की जर्जर सड़कों, टूटे स्लैब, खराब स्ट्रीट लाइट और सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने लगे।

पार्षदों ने नगर आयुक्त के खिलाफ लगाए नारे

हंगामे के दौरान पार्षदों ने नगर आयुक्त के बहिष्कार का नारा लगाया। इस पर नगर आयुक्त ने नाराजगी जताते हुए कहा कि व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। इसके बावजूद पार्षद अपनी मांगों पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि काम कराने के लिए बार-बार कहने के बावजूद योजनाएं फाइलों में अटकी हैं।

समस्याओं का समाधान नहीं होने से नाराज पार्षद बैठक कक्ष में ही जमीन पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। इस दौरान इंकलाब के नारे भी लगाए गए। पार्षदों ने एक स्वर में कहा कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक किसी तरह की वार्ता नहीं होगी।

8 महीने से कई इलाकों में अंधेरा, खबड़ा में 100 फीट स्लैब टूटा

पार्षदों ने सबसे ज्यादा नाराजगी स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को लेकर जताई। उनका कहना है कि शहर के कई हिस्से पिछले करीब आठ महीने से अंधेरे में हैं। खराब स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत और मेंटेनेंस का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है।

वहीं, खबड़ा इलाके में करीब 100 फीट लंबा स्लैब टूटने का मामला भी बैठक में उठा। इसके कारण रास्ता संकरा हो गया है। स्थानीय लोगों के बीच आए दिन विवाद और हादसे की स्थिति बन रही है। कई मामले थाने तक पहुंच चुके हैं। कई इलाकों में सफाई व्यवस्था पहले से ही ठीक नहीं है और वार्ड जमादारों के स्थानांतरण ने परेशानी बढ़ा दी है।

जून में मंजूरी, दो महीने बाद भी टेंडर नहीं

पार्षदों ने विकास योजनाओं को लेकर भी निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि जून में स्टैंडिंग कमेटी ने प्रत्येक वार्ड में 50-50 लाख रुपये की लागत से सड़क और नाला निर्माण की योजनाओं को मंजूरी दी थी। मंजूरी के करीब दो महीने बीत जाने के बाद भी अब तक एक भी योजना का टेंडर नहीं हुआ है, उनका कहना था, जब निगम के पास 50 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध है तो विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में देरी क्यों हो रही है।

72 घंटे में समाधान का भरोसा

हंगामे के बीच मेयर और नगर आयुक्त ने पार्षदों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए 72 घंटे के भीतर पहल की जाएगी। समस्याओं का समाधान नहीं होने पर संबंधित स्तर पर कार्रवाई का भी भरोसा दिया गया। पार्षदों ने चेतावनी दी कि यदि तय समय में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे फिर से आंदोलन करेंगे।

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  • इसरत फातिमा 7 वर्षों के अनुभव वाली एक पेशेवर पत्रकार और कंटेंट राइटर हैं। वह राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समाचार, राजनीति, व्यवसाय, शेयर बाजार, क्रिप्टोकरेंसी, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन और सरकारी योजनाओं सहित विभिन्न विषयों पर शोध-आधारित लेख लिखती हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय जानकारी सरल भाषा में पहुँचाना है।

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