MP Board Result छात्रा 11 अंकों से फेल, री-चेकिंग में 75 के साथ First Division | Ujjain News

मध्य प्रदेश बोर्ड द्वारा जारी कक्षा 10वीं के परिणाम में उज्जैन के नागदा में एक छात्रा को सामाजिक विज्ञान विषय में मात्र 11 अंक देकर फेल कर दिया गया। बाद में उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन (rechecking) में उसे इसी विषय में 75 अंक प्राप्त हुए, जिससे वह प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हो गई।

MP Board Result छात्रा 11 अंकों से फेल, री-चेकिंग में 75 के साथ First Division | Ujjain News

“प्रतिनिधिक तस्वीर”

जिले के नागदा स्थित भारत कॉमर्स स्कूल की कक्षा 10 की छात्रा एकता यादव का मामला मध्य प्रदेश बोर्ड द्वारा परीक्षा परिणाम तैयार करने में हुई बड़ी लापरवाही को उजागर करता है। प्रारंभिक परिणाम में फेल घोषित किए जाने के बाद छात्रा व उसके परिवार को गहरा मानसिक आघात झेलना पड़ा। हालांकि स्कूल प्रशासन के सहयोग से कराए गए पुनर्मूल्यांकन ने छात्रा का भविष्य संभाल लिया।

प्रारंभिक परिणाम में सामाजिक विज्ञान में महज 11 अंक, छात्रा और परिवार सदमे में

मध्य प्रदेश बोर्ड द्वारा इस वर्ष जारी किए गए 10वीं के परिणाम में एकता यादव को सामाजिक विज्ञान विषय में केवल 11 अंक प्राप्त हुए थे। इसके आधार पर उसे असफल घोषित कर दिया गया। छात्रा की मानसिक स्थिति खराब हो गई और पूरे परिवार में तनाव का माहौल बन गया। परिवार के सदस्यों ने बताया कि एकता की शैक्षणिक योग्यता को देखते हुए यह परिणाम पूरी तरह अप्रत्याशित था। माता-पिता ने हिम्मत न हारते हुए स्कूल के प्रिंसिपल के.बी. गुप्ता से मुलाकात की और छात्रा की उत्तर-पुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू करवाई।

री-चेकिंग के बाद प्राप्त किए 75 अंक, हो गई प्रथम श्रेणी से पास

स्कूल प्रशासन ने छात्रा की ओर से पुनर्मूल्यांकन हेतु आवेदन करने की व्यवस्था की। जब दोबारा जांच के परिणाम जारी हुए तो चौंकाने वाला अंतर सामने आया। सामाजिक विज्ञान विषय में ही छात्रा को 11 अंकों के स्थान पर 75 अंक प्रदान किए गए। इसके बाद एकता यादव प्रथम श्रेणी (First Division) से परीक्षा में उत्तीर्ण हो गई। छात्रा के पिता, जो निजी सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्य कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, ने राहत व्यक्त करते हुए कहा कि यदि री-चेकिंग का विकल्प नहीं चुना जाता तो उनकी बेटी का भविष्य अंधकारमय हो सकता था। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि कई गरीब परिवार पुनर्मूल्यांकन का खर्च वहन नहीं कर पाते, जिससे उनके बच्चों को अनावश्यक मानसिक यातना झेलनी पड़ती है।

बोर्ड की लापरवाही पर उठे सवाल, परिवार का कानूनी नोटिस भेजने का ऐलान

इस पूरे प्रकरण के बाद मध्य प्रदेश बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रा के परिवार ने बोर्ड के खिलाफ मानहानि का कानूनी नोटिस भेजने की घोषणा की है। उनका तर्क है कि बोर्ड की इस चूक के कारण उनकी बेटी को जो मानसिक आघात झेलना पड़ा, उसकी भरपाई नहीं हो सकती। परिवार ने यह भी सवाल उठाया कि यदि छात्रा इस तनाव में कोई गलत कदम उठा लेती तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता। स्कूल के प्रिंसिपल के.बी. गुप्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और कहा है कि छात्रा बौद्धिक रूप से सक्षम है, इसलिए उसके फेल होने का सवाल ही नहीं बनता। उन्होंने बोर्ड द्वारा हुई इस चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। फिलहाल, मध्य प्रदेश बोर्ड की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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