भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते में भारत ‘फॉरवर्ड मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ यानी Forward MFN क्लॉज को शामिल कराने की कोशिश कर रहा है। इसका मकसद भविष्य में अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था में बदलाव होने पर भारतीय निर्यातकों के हितों की रक्षा करना है।
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच अटकी पड़ी ट्रेड डील फिर चर्चा में है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल अमेरिका जा रहे हैं। वह द्विपक्षीय वार्ता के साथ G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। इस दौरान वह अमेरिकी वार्ताकार जेमिशन ग्रीर से मुलाकात भी करेंगे। भारत साफ कर चुका है कि समझौता तभी होगा जब वह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो।
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के तहत भारत अब ‘फॉरवर्ड मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (Forward MFN)’ क्लॉज को शामिल कराने पर जोर दे रहा है। यह एक कानूनी सुरक्षा प्रावधान है। अगर यह लागू होता है तो अमेरिका भविष्य में अपनी टैरिफ व्यवस्था में कोई बदलाव करता है या किसी तीसरे देश को भारत से बेहतर टैक्स छूट या शर्तें देता है, तो वे सभी रियायतें और दरें भारत को भी अपने आप मिल जाएंगी।
बातचीत जारी
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार दोनों देशों के बीच Forward MFN क्लॉज को लेकर बातचीत चल रही है। इसका उद्देश्य अमेरिकी नीतियों में आने वाले बदलावों से भारतीय निर्यातकों को मिलने वाली रियायतों को प्रभावित होने से बचाना है, भारत सरकार का स्पष्ट रुख है कि वह द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने और फरवरी में तैयार की गई रूपरेखा के आधार पर एक मजबूत अंतरिम समझौता करने को तैयार है। प्रस्तावित Forward MFN व्यवस्था असल में 6 फरवरी 2026 के भारत और अमेरिका के संयुक्त बयान में शामिल सुरक्षा प्रावधान का अपग्रेडेड रूप है।
पुराने प्रावधान में कहा गया था कि यदि कोई देश टैरिफ बदलता है तो दूसरा देश भी ऐसा कर सकता है। लेकिन इसमें व्यापक गारंटी नहीं थी कि भविष्य में अमेरिका द्वारा की जाने वाली टैरिफ बढ़ोतरी के खिलाफ सुरक्षा मिलेगी, और न ही इससे भारत को किसी अन्य देश को दी गई नई अमेरिकी रियायतें अपने आप मिल सकती थीं। भारत इसी कमी को Forward MFN से पूरा करना चाहता है, अमेरिका की टैरिफ व्यवस्था अब अधिक जटिल हो गई है। अलग-अलग कानूनी प्रावधानों के तहत अतिरिक्त टैरिफ लगाए जा रहे हैं। इसी को देखते हुए भारत चाहता है कि समझौते का लाभ लगातार मिलता रहे।







