ऑनलाइन ठगी यानी साइबर फ्रॉड आज के डिजिटल युग में एक बहुत बड़ी समस्या बन चुका है। UPI पेमेंट, ऑनलाइन शॉपिंग, सोशल मीडिया और डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ठगों के तरीके भी हर दिन नए-नए होते जा रहे हैं। कभी फर्जी कस्टमर केयर कॉल के जरिए, तो कभी लॉटरी का झांसा देकर, और कभी डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर लोगों के खातों से पैसे उड़ाए जा रहे हैं।
गृह मंत्रालय के अनुसार, 30 जून 2026 तक CFCFRMS (Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System) के जरिए 32.80 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुई हैं और 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बचाई जा चुकी है। इसके अलावा, 15.75 लाख से ज्यादा सिम कार्ड और 5.77 लाख IMEI को ब्लॉक किया गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी के साथ ऑनलाइन ठगी हो जाए, तो उसे सबसे पहले क्या करना चाहिए? बहुत से लोग घबराहट में कुछ ऐसा कर बैठते हैं जिससे उनके पैसे वापस पाने की संभावना और कम हो जाती है। इस लेख में हम आपको चरण-दर-चरण बताएंगे कि ठगी होने के बाद क्या-क्या करना चाहिए, कहां शिकायत दर्ज करनी चाहिए, और अपने पैसे वापस पाने के लिए कौन-कौन से कानूनी रास्ते उपलब्ध हैं।
पहला कदम: तुरंत 1930 पर कॉल करें – गोल्डन आवर का फायदा उठाएं
ऑनलाइन ठगी होने के बाद सबसे पहला और सबसे जरूरी कदम है, बिना एक मिनट की देरी किए साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी साफ कहा है कि साइबर ठगी के तुरंत बाद का समय, जिसे “गोल्डन आवर” कहा जाता है, पैसे वापस पाने के लिए बेहद अहम होता है। उन्होंने बताया कि अगर ठगी की शिकायत 3 से 15 दिन की देरी से दर्ज होती है, तो पैसे कई खातों में ट्रांसफर हो चुके होते हैं और रिकवरी काफी मुश्किल हो जाती है।
1930 हेल्पलाइन 24 घंटे, सातों दिन उपलब्ध है और इसे इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) द्वारा संचालित किया जाता है। ठगी की शिकायत जितनी जल्दी दर्ज होगी, ठग के खाते को फ्रीज करने और पैसे बचाने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी। मुंबई पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 1930 हेल्पलाइन ने 202 करोड़ रुपये की ठगी गई रकम को बचाया या ब्लॉक किया।
1930 हेल्पलाइन पर कॉल की संख्या लगातार बढ़ रही है। आंकड़ों के अनुसार, 2023 में 96.4 लाख कॉल आईं, जो 2024 में बढ़कर 2.21 करोड़ और 2025 में 3.24 करोड़ हो गईं, यानी लगभग हर सेकंड में एक कॉल।

1930 पर कॉल करते समय क्या-क्या जानकारी तैयार रखें:
• ठगी की तारीख और समय
• आपके बैंक खाते की जानकारी
• ठगी गई रकम कितनी है
• जिस खाते में पैसे गए, उसकी जानकारी (अगर उपलब्ध हो)
• UPI ट्रांजैक्शन आईडी या बैंक रेफरेंस विवरण
• ठग का फोन नंबर, WhatsApp नंबर या कोई अन्य संपर्क विवरण
याद रखें: ठगी की शिकायत में देरी मत करें। जितनी जल्दी रिपोर्ट करेंगे, उतनी ज्यादा संभावना है कि आपके पैसे बच सकें। पहले 60 मिनट सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं।
दूसरा कदम: राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें
1930 पर कॉल करने के बाद दूसरा महत्वपूर्ण कदम है, cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करना, भारत सरकार ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) की शुरुआत की है, जहां कोई भी नागरिक ऑनलाइन ठगी, हैकिंग, पहचान की चोरी, साइबर बुलिंग जैसे अपराधों की शिकायत दर्ज कर सकता है। यह पोर्टल गृह मंत्रालय द्वारा संचालित किया जाता है और विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले साइबर अपराधों पर ध्यान देता है।
पोर्टल पर शिकायत कैसे दर्ज करें:
• सबसे पहले cybercrime.gov.in वेबसाइट पर जाएं।
• होम पेज पर “Report a Cyber Crime” या “शिकायत दर्ज करें” विकल्प पर क्लिक करें।
• वित्तीय ठगी से जुड़ी शिकायत के लिए “Financial Fraud” श्रेणी चुनें।
• अपने मोबाइल नंबर और OTP से रजिस्टर करें।
• ठगी से जुड़ी सभी जानकारी विस्तार से दें — क्या हुआ, कब हुआ, कैसे हुआ।
• स्क्रीनशॉट, चैट, ट्रांजैक्शन आईडी, बैंक मैसेज जैसे सभी सबूत अपलोड करें।
• शिकायत सबमिट करने के बाद आपको एक पुष्टि मिलेगी, जिसे संभाल कर रखें।
महत्वपूर्ण अपडेट: असम सरकार ने जून 2026 में देश में पहले राज्यों में से एक के रूप में e-Zero FIR प्रणाली शुरू की है। इसके तहत, 10 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय साइबर ठगी की शिकायतें 1930 हेल्पलाइन या NCRP पर दर्ज होने पर अपने आप Zero FIR में बदल जाती हैं, जिससे बिना क्षेत्राधिकार की परवाह किए तुरंत कार्रवाई शुरू हो सकती है। ओडिशा पुलिस ने भी जुलाई 2026 में यह प्रणाली शुरू की है।

तीसरा कदम: अपने बैंक को तुरंत सूचित करें – RBI के नियम आपके पक्ष में हैं
साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करने के साथ-साथ अपने बैंक को भी तुरंत सूचित करना बेहद जरूरी है। बैंक को जल्दी सूचित करने से न केवल ठगी गई रकम को रोका जा सकता है, बल्कि RBI के नियमों के तहत आपकी जिम्मेदारी भी सीमित हो सकती है।
RBI के नियम क्या कहते हैं:
RBI ने 6 जुलाई 2017 को “Consumer Protection – Limiting Liability of Consumers in Unauthorised Electronic Banking Transactions” नाम से एक सर्कुलर जारी किया था। इसके अनुसार, अगर अनधिकृत ट्रांजैक्शन बैंक की लापरवाही या उसके सिस्टम में सेंध की वजह से हुआ है, तो ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य होती है। इसके लिए ग्राहक को ट्रांजैक्शन की जानकारी मिलने के तीन कार्यदिवस के भीतर बैंक को सूचित करना जरूरी है।
अगर ग्राहक तीन से सात कार्यदिवस के बीच सूचित करता है, तो उसकी जिम्मेदारी सीमित होती है। लेकिन अगर ग्राहक खुद अपनी लापरवाही से OTP, पासवर्ड या बैंकिंग क्रेडेंशियल साझा करता है, तो नुकसान की जिम्मेदारी ग्राहक पर हो सकती है, बॉम्बे हाई कोर्ट ने अप्रैल 2026 में साफ किया था कि RBI के नियम आपराधिक जांच से स्वतंत्र रूप से लागू होते हैं और बैंक को अनधिकृत ट्रांजैक्शन को वापस करना होता है।
छोटी राशि की ठगी के लिए नई व्यवस्था:
RBI ने जून 2026 में एक नई व्यवस्था की घोषणा की है। 1 जनवरी 2027 से, 50,000 रुपये तक की डिजिटल ठगी के शिकार लोगों को बैंक से 85% या अधिकतम 25,000 रुपये (जो भी कम हो) का मुआवजा मिल सकेगा। इसके लिए पीड़ित को घटना के पांच कैलेंडर दिनों के भीतर 1930 या cybercrime.gov.in और अपने बैंक दोनों को सूचित करना होगा। यह सुविधा एक व्यक्ति को जीवन में केवल एक बार मिलेगी।
बैंक से क्या मांगें:
• ट्रांजैक्शन को विवादित (Dispute) के रूप में दर्ज करना
• UPI या संबंधित पेमेंट को ब्लॉक करना
• लाभार्थी खाते को फ्रीज करने का अनुरोध
• लिखित शिकायत की कॉपी और पुष्टि
जरूरी बात: बैंक को सूचित करने के लिए लिखित शिकायत या ईमेल का इस्तेमाल करें, ताकि आपके पास सबूत रहे।
चौथा कदम: सभी सबूत संभाल कर रखें – कोई भी स्क्रीनशॉट डिलीट न करें
कई लोग ठगी के बाद घबराहट या शर्मिंदगी में चैट, मैसेज और स्क्रीनशॉट डिलीट कर देते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए। जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए ये सबूत बेहद जरूरी होते हैं।
कौन-कौन से सबूत जरूरी हैं:
• ठग के साथ हुई WhatsApp, Telegram या अन्य चैट
• ठग का फोन नंबर, ईमेल आईडी, सोशल मीडिया प्रोफाइल
• बैंक से आए SMS अलर्ट और ईमेल
• UPI ट्रांजैक्शन की स्क्रीनशॉट
• फर्जी वेबसाइट या ऐप के स्क्रीनशॉट
• कॉल रिकॉर्डिंग (अगर उपलब्ध हो)
• ठग द्वारा भेजे गए लिंक या दस्तावेज
टिप: अगर आपको लगता है कि आपके फोन में वायरस या मैलवेयर आ गया है, तो तुरंत अपना फोन एंटीवायरस से स्कैन करें। लेकिन रीसेट करने से पहले सभी सबूत दूसरी जगह सेव कर लें।

पांचवां कदम: दोबारा पैसे न दें – दूसरी ठगी से बचें
ठगी होने के बाद ठग अक्सर दूसरी बार भी वार करते हैं। वे “रिफंड स्कैम”, “वेरिफिकेशन स्कैम” या अकाउंट रिकवरी स्कैम जैसे तरीकों से दोबारा पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं।
ऐसे स्कैम से कैसे बचें:
• रिफंड स्कैम: कोई कॉल करके कहे कि आपके पैसे वापस करने हैं, इसलिए पहले प्रोसेसिंग फीस जमा करें, यह पूरी तरह फर्जी है। कोई भी सरकारी एजेंसी या बैंक पैसे वापस करने के लिए पहले पैसे नहीं मांगती।
• वेरिफिकेशन स्कैम: आपका अकाउंट वेरिफाई करना है कहकर OTP या बैंकिंग जानकारी मांगना, कभी भी किसी को OTP, PIN या पासवर्ड न बताएं।
• अकाउंट रिकवरी स्कैम: हम आपके पैसे वापस दिला देंगे कहकर पहले फीस मांगना, यह भी ठगी का एक तरीका है।
• डिजिटल अरेस्ट स्कैम: ठग खुद को पुलिस, CBI, ED या कस्टम्स अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर धमकाते हैं और सेक्योरिटी डिपॉजिट या वेरिफिकेशन फीस मांगते हैं। गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे या OTP नहीं मांगती।
जरूरी नियम: किसी भी अनजान व्यक्ति को OTP, PIN, पासवर्ड या UPI रिक्वेस्ट कभी न भेजें। बैंक या सरकारी एजेंसी कभी भी फोन पर OTP या पासवर्ड नहीं मांगती।
छठा कदम: पुलिस में औपचारिक शिकायत (FIR) दर्ज कराएं
ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के बाद अगला कदम है, अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराना।
FIR दर्ज कराने के लिए क्या लेकर जाएं:
• 1930 पर दर्ज शिकायत की कॉपी
• cybercrime.gov.in पर दर्ज शिकायत का विवरण
• बैंक स्टेटमेंट और ट्रांजैक्शन डिटेल
• सभी सबूतों की कॉपी (स्क्रीनशॉट, चैट, SMS)
• पहचान पत्र (आधार, PAN, वोटर आईडी)
• बैंक को भेजी गई लिखित शिकायत की कॉपी
ई-जीरो FIR की सुविधा: 10 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय साइबर ठगी की शिकायतें 1930 या NCRP पर दर्ज होने पर अपने आप e-Zero FIR में बदल जाती हैं। असम इस प्रणाली को लागू करने वाले पहले राज्यों में से एक है। ओडिशा पुलिस ने भी जुलाई 2026 में यह प्रणाली शुरू की है।
अगर पुलिस FIR दर्ज न करे तो क्या करें:
• संबंधित पुलिस अधिकारी से लिखित में शिकायत की कॉपी मांगें
• एसपी (पुलिस अधीक्षक) या डीआईजी को शिकायत भेजें
• राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को शिकायत भेजें
• अगर फिर भी समाधान न मिले तो अदालत में याचिका दायर कर सकते हैं।

सातवां कदम: पैसे वापस न मिलें तो RBI Ombudsman से शिकायत करें
अगर बैंक आपकी शिकायत का समाधान नहीं करता या अनधिकृत ट्रांजैक्शन की रकम वापस नहीं करता, तो आप RBI के Ombudsman के पास शिकायत कर सकते हैं।
RBI Ombudsman से शिकायत कब करें:
RBI की एकीकृत लोकपाल योजना (Integrated Ombudsman Scheme) 1 जुलाई 2026 से लागू हो चुकी है। इसके तहत, अगर बैंक 30 दिनों के भीतर आपकी शिकायत का जवाब नहीं देता या संतोषजनक समाधान नहीं देता, तो आप RBI Ombudsman से संपर्क कर सकते हैं।
Ombudsman से कितना मुआवजा मिल सकता है:
• वित्तीय नुकसान के लिए अधिकतम 30 लाख रुपये
• मानसिक पीड़ा, समय की हानि और खर्चों के लिए अधिकतम 3 लाख रुपये
• कुल मुआवजा 33 लाख रुपये तक हो सकता है।
शिकायत कैसे दर्ज करें:
• सबसे पहले बैंक को लिखित शिकायत भेजें और 30 दिन का इंतजार करें।
• बैंक के जवाब से संतुष्ट न होने पर cms.rbi.org.in पर जाएं।
• “File a Complaint” पर क्लिक करें और श्रेणी चुनें (बैंक, NBFC, पेमेंट सिस्टम)।
• अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालें और OTP से वेरिफाई करें।
• ट्रांजैक्शन की जानकारी, बैंक को भेजी शिकायत की कॉपी और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें।
• शिकायत दर्ज होने पर आपको एक पुष्टि मिलेगी, जिसे संभाल कर रखें।
शिकायत की समय सीमा:
बैंक के अंतिम जवाब मिलने या निर्धारित अवधि समाप्त होने के 90 दिनों के भीतर RBI Ombudsman के पास शिकायत दर्ज करनी होती है, अगर Ombudsman का फैसला भी संतोषजनक न हो तो आप 30 दिनों के भीतर Appellate Authority के पास अपील कर सकते हैं। इसके अलावा, उपभोक्ता अदालत (Consumer Court) में भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।
आठवां कदम: मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) से पैसे वापस पाएं
गृह मंत्रालय ने मई 2026 में मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) लॉन्च किया था, जिसका मकसद ठगी गई रकम को पीड़ितों को जल्द से जल्द वापस लौटाना है। इस मॉड्यूल के जरिए पीड़ित घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और बैंक या सरकारी दफ्तर जाने की जरूरत नहीं होती।
MRM का इस्तेमाल कैसे करें:
• ठगी की रिपोर्ट करें: 1930 पर कॉल करें या NCRP पर शिकायत दर्ज करें। जल्दी रिपोर्ट करने से पैसे फ्रीज होने की संभावना बढ़ जाती है।
• चेक करें कि पैसे फ्रीज हुए या नहीं: रिपोर्ट करने के बाद, देखें कि आपके पैसे ट्रेस और फ्रीज हुए हैं या नहीं। MRM पर आवेदन केवल तभी कर सकते हैं जब आपकी शिकायत के परिणामस्वरूप ठग के खाते में पैसे ट्रेस और होल्ड हुए हों।
• रिफंड रिक्वेस्ट करें: MRM पर जाएं और “Raise Refund Request” पर क्लिक करें। अपना विवरण डालें और OTP से वेरिफाई करें।
• बैंक डिटेल दें: अपना बैंक अकाउंट नंबर डालें जहां रिफंड चाहिए। सही जानकारी दें ताकि देरी न हो।
• दस्तावेज अपलोड करें: PAN कार्ड की कॉपी अपलोड करें। अगर कोई कोर्ट ऑर्डर है तो वह भी अपलोड कर सकते हैं।
• रिक्वेस्ट सबमिट करें: सबमिट करने के बाद आपको एक पुष्टि मिलेगी, जिसे संभाल कर रखें।
• कानूनी प्रक्रिया पूरी करें: कुछ मामलों में कोर्ट ऑर्डर की जरूरत हो सकती है।
ध्यान दें: MRM पोर्टल गारंटी नहीं देता कि आपको पैसे वापस मिलेंगे। पहले पैसे ट्रेस और फ्रीज होने चाहिए, तभी रिफंड संभव है, तेलंगाना पुलिस के अनुसार, MRM के जरिए 12 सितंबर 2026 तक 9,355 पीड़ितों को 27.23 करोड़ रुपये वापस किए जा चुके हैं।
सरकारी व्यवस्था: CFCFRMS, सस्पेक्ट रजिस्ट्री और अन्य कदम
भारत सरकार ने साइबर ठगी से निपटने के लिए कई मजबूत सिस्टम बनाए हैं। इनके बारे में जानना भी जरूरी है ताकि आपको पता हो कि आपकी शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है।
CFCFRMS (Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System)
गृह मंत्रालय के तहत I4C द्वारा संचालित यह सिस्टम 2021 में शुरू किया गया था। 30 जून 2026 तक इसके जरिए 32.80 लाख से ज्यादा शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बचाई जा चुकी है। यह सिस्टम वित्तीय ठगी की तुरंत रिपोर्टिंग और ठगों द्वारा पैसे भेजने को रोकने में मदद करता है।
सस्पेक्ट रजिस्ट्री (Suspect Registry)
I4C ने 10 सितंबर 2024 को बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से सस्पेक्ट रजिस्ट्री शुरू की। 30 जून 2026 तक बैंकों से 30.48 लाख से ज्यादा संदिग्ध पहचानकर्ताओं का डेटा मिला और 32.08 लाख लेयर-1 म्यूल अकाउंट्स को साझा किया गया। इसके जरिए 25,698 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन को रोका गया।
म्यूल अकाउंट क्या होता है: म्यूल अकाउंट एक ऐसा खाता होता है जिसका इस्तेमाल ठगी के पैसे को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए किया जाता है। ठग पीड़ित से सीधे अपने खाते में पैसे नहीं मंगाते, बल्कि किसी और के खाते (म्यूल अकाउंट) में पैसे मंगाते हैं और फिर उसे कई खातों में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे जांच मुश्किल हो जाती है।
मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM)
अप्रैल 2026 से मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल और ग्रीवांस रिड्रेसल मॉड्यूल काम कर रहे हैं, जिनका मकसद ठगी गई रकम को पीड़ितों को जल्द से जल्द वापस लौटाना और बैंक अकाउंट फ्रीज होने से जुड़ी शिकायतों का समाधान करना है।
अन्य कदम
गृह मंत्रालय के अनुसार, 30 जून 2026 तक:
• 3,718 मोबाइल ऐप्स (जिनमें फर्जी लोन ऐप्स शामिल हैं) को ब्लॉक किया गया
• 15.75 लाख सिम कार्ड और 5.77 लाख IMEI को ब्लॉक किया गया
• 33 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में साइबर फॉरेंसिक-कम-ट्रेनिंग लैबोरेटरीज स्थापित की गई हैं
• 24,600 से ज्यादा कानून प्रवर्तन अधिकारियों, न्यायिक अधिकारियों और अभियोजकों को साइबर अपराध जांच और फॉरेंसिक का प्रशिक्षण दिया गया है।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम: सरकार की सख्त कार्रवाई
डिजिटल अरेस्ट एक ऐसा ठगी का तरीका है जिसमें ठग खुद को पुलिस, CBI, ED या कस्टम्स अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर धमकाते हैं और पैसे ऐंठते हैं। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है।
फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने गृह मंत्रालय को निर्देश दिया था कि RBI की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को पूरे देश में लागू किया जाए, जिसके तहत बैंक साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए एहतियातन खातों पर अस्थायी डेबिट फ्रीज लगा सकते हैं।
अप्रैल 2026 में गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि WhatsApp ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम से जुड़े 9,400 अकाउंट्स को बैन किया है। जनवरी 2026 में WhatsApp ने भारतीय उपयोगकर्ताओं को निशाना बनाने वाले डिजिटल अरेस्ट स्कैम की जांच शुरू की थी।
गृह मंत्रालय ने यह भी बताया कि इन स्कैमर्स के ज्यादातर ऑपरेशन साउथईस्ट एशिया, खासकर कंबोडिया से चलाए जा रहे हैं।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी साफ कहा है कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई चीज नहीं होती और ठगी होने पर तुरंत 1930 पर संपर्क करना चाहिए।

ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए जरूरी सावधानियां
ठगी होने के बाद कार्रवाई जरूरी है, लेकिन इससे बेहतर है कि ठगी ही न हो। यहां कुछ जरूरी सावधानियां दी गई हैं जो हर इंटरनेट यूजर को ध्यान रखनी चाहिए।
1. कभी भी OTP, PIN या पासवर्ड साझा न करें
बैंक, सरकारी एजेंसी या कोई भी संस्था कभी भी फोन पर OTP, PIN, CVV या पासवर्ड नहीं मांगती। अगर कोई मांगे, तो समझ जाएं कि वह ठग है।
2. अनजान लिंक पर क्लिक न करें
SMS, WhatsApp या ईमेल पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। ये लिंक फिशिंग वेबसाइट या मैलवेयर की ओर ले जा सकते हैं।
3. UPI रिक्वेस्ट को लेकर सतर्क रहें
UPI पर पैसे लेने के लिए PIN डालने की जरूरत नहीं होती। अगर कोई “पैसे भेजने” के लिए PIN डालने को कहे, तो वह ठगी है।
4. फर्जी कस्टमर केयर नंबर से बचें
Google पर सर्च करके कस्टमर केयर नंबर न लें। हमेशा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट से ही संपर्क करें।
5. सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा न करें
अपनी बैंक डिटेल, आधार नंबर, पता या अन्य निजी जानकारी सोशल मीडिया पर सार्वजनिक न करें।
6. मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें
हर अकाउंट के लिए अलग-अलग मजबूत पासवर्ड रखें और जहां भी संभव हो, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू करें।
7. “डिजिटल अरेस्ट” के झांसे में न आएं
पुलिस, CBI, ED या कस्टम्स कभी भी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी नहीं देती। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी साफ कहा है कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई चीज नहीं होती।
8. अनजान ऐप डाउनलोड न करें
किसी भी अनजान लिंक से APK फाइल या ऐप डाउनलोड न करें। सिर्फ Google Play Store या Apple App Store से ही ऐप डाउनलोड करें। स्कैमर्स रिमोट-एक्सेस और स्क्रीन-शेयरिंग ऐप्स इंस्टॉल करवाकर बैंकिंग जानकारी चुरा सकते हैं।
9. बैंक SMS अलर्ट चालू रखें
RBI के नए नियमों के तहत, 500 रुपये से ऊपर के सभी इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन के लिए बैंक को तुरंत SMS अलर्ट भेजना अनिवार्य है। इन अलर्ट्स को तुरंत चेक करें ताकि किसी भी अनधिकृत ट्रांजैक्शन का पता समय पर चल सके।
ऑनलाइन ठगी होने पर घबराना स्वाभाविक है, लेकिन घबराहट में गलत कदम उठाने से नुकसान और बढ़ सकता है। सबसे जरूरी है, तुरंत 1930 पर कॉल करना, cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करना, बैंक को सूचित करना और सभी सबूत संभाल कर रखना, याद रखें, ठगी की शिकायत में देरी सबसे बड़ी दुश्मन है। गोल्डन आवर (पहले 60 मिनट) में रिपोर्ट करने से आपके पैसे बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। साथ ही, ठगी के बाद दूसरी ठगी से बचने के लिए सतर्क रहें और किसी भी अनजान व्यक्ति को OTP, PIN या पासवर्ड न बताएं।
अगर बैंक सहयोग न करे, तो RBI Ombudsman के पास शिकायत करने का अधिकार आपके पास है, जहां 33 लाख रुपये तक का मुआवजा मिल सकता है। सरकार ने CFCFRMS, सस्पेक्ट रजिस्ट्री, मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल और e-Zero FIR जैसे कई मजबूत सिस्टम बनाए हैं, जो पीड़ितों की मदद के लिए काम कर रहे हैं, साइबर सुरक्षा केवल सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। जागरूक रहें, सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करें।
यह लेख सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी भी प्रकार की कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है। ठगी से जुड़े मामलों में अपने बैंक, साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या योग्य कानूनी सलाहकार से परामर्श अवश्य लें। विभिन्न मामलों में लागू नियम और प्रक्रियाएं अलग-अलग हो सकती हैं। मुआवजे और रिफंड से जुड़े नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं।







