रायपुर: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए राज्य सरकार ने कई अहम फैसले किए हैं। नई व्यवस्था के तहत कक्षा पहली से पांचवीं तक हिंदी और कक्षा छठवीं से आठवीं तक अंग्रेजी बोलने-लिखने पर विशेष फोकस होगा। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इस संबंध में जानकारी दी है।
क्यों लागू हो रही नई व्यवस्था?
शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के अनुसार, पहली से आठवीं कक्षा तक बच्चों को आसानी से पास करने की व्यवस्था का सीधा असर उनकी पढ़ने-लिखने की क्षमता पर पड़ा है। इसी कमी को दूर करने के लिए अब बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने पर खास ध्यान दिया जाएगा।
शिक्षकों को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग
योजना को सफल बनाने के लिए पहले प्रदेशभर के शिक्षकों को अंग्रेजी भाषा की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग के बाद ही शिक्षक बच्चों को अंग्रेजी सिखाएंगे। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित स्तर तक बच्चों की स्किल्स नहीं पहुंचती है, तो संबंधित स्कूल के शिक्षकों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और कार्रवाई भी हो सकती है।
10,000 से अधिक शिक्षकों की भर्ती
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर भर्ती की जा रही है:
• मंत्री के अनुसार, आत्मानंद स्कूलों के लिए 5000 संविदा शिक्षकों की भर्ती ऑनलाइन परीक्षा के माध्यम से की जाएगी।
• इसके अलावा, 5000 नियमित शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया जा चुका है।
• ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू होने के बाद विभिन्न कार्यालयों में तैनात 10,600 शिक्षक वापस स्कूलों में लौट आए हैं। वर्तमान में लगभग 85 प्रतिशत शिक्षक ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
इग्नाइट स्कूल होंगे पुनः शुरू
बंद होने की स्थिति में पहुंचे इग्नाइट स्कूलों को विवेकानंद योजना के तहत दोबारा शुरू करने की तैयारी है। इन स्कूलों का संचालन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल से होगा और यहाँ अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई होगी। दिसंबर तक स्कूलों में स्मार्ट क्लास की सुविधा देने का लक्ष्य रखा गया है। जिन स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, वहाँ ऑनलाइन कक्षाओं के ज़रिए पढ़ाई कराई जाएगी।
मूल्यांकन में लाई जाएगी पारदर्शिता
शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बोर्ड कक्षाओं को छोड़कर अन्य कक्षाओं की उत्तर-पुस्तिकाएँ अब दूसरे स्कूलों के शिक्षकों द्वारा जाँची जाएंगी। मंत्री के अनुसार, स्कूलों में किए जा रहे नए प्रयोगों का सकारात्मक असर धीरे-धीरे ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है।







