बिहार में ट्रैफिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने बड़ा फैसला लिया है। अब ट्रैफिक सिपाही वाहनों को नहीं रोक सकेंगे और न ही जब्त कर सकेंगे। यह अधिकार सिर्फ सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) और उससे ऊपर के अधिकारियों को होगा। बिहार के एडीजी (यातायात) सुधांशु कुमार ने यह जानकारी दी है।
सिपाही सिर्फ ट्रैफिक रेगुलेट करेंगे
एडीजी सुधांशु कुमार ने स्पष्ट किया कि ट्रैफिक सिपाहियों की जिम्मेदारी अब केवल यातायात को नियंत्रित करने की होगी। वाहन रोकने, जब्त करने या चालान काटने जैसी कार्रवाई सिर्फ सब-इंस्पेक्टर और उससे ऊपर रैंक के अधिकारी ही करेंगे। यह बदलाव लगातार मिल रही शिकायतों के बाद किया गया है, 29 जुलाई को पटना ट्रैफिक एसपी, ट्रैफिक डीएसपी समेत अन्य अधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया था, जिसमें डीजीपी भी मौजूद रहे। प्रशिक्षण में ट्रैफिक प्रबंधन के नए मॉडल और फील्ड मॉनिटरिंग पर विशेष जोर दिया गया।
बॉडी वॉर्न कैमरा अनिवार्य, पटना में लागू होगा स्ट्रेच मॉडल
ड्यूटी के दौरान सभी ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को बॉडी वॉर्न कैमरा ऑन रखना अनिवार्य होगा। यदि कैमरा बंद पाया गया और बाद में पुलिसकर्मी पर कोई शिकायत आती है तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा। इसका उद्देश्य कार्रवाई में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, एडीजी ने बताया कि फिलहाल पटना में कोलकाता की ट्रैफिक व्यवस्था से प्रेरित ‘स्ट्रेच मॉडल’ लागू किया जाएगा। सकारात्मक परिणाम मिलने पर इसे पूरे बिहार में लागू किया जाएगा। इसके तहत प्वाइंट-टू-प्वाइंट पोस्टिंग, लगातार निगरानी और पर्यवेक्षकों की सक्रिय तैनाती होगी।
अधिकारी फील्ड में रहेंगे, जाम पर तुरंत मिलेगी QRT
ट्रैफिक के व्यस्त समय में पर्यवेक्षक अधिकारी फील्ड में मौजूद रहेंगे और किसी भी अधिकारी को कार्यालय में बैठने की बजाय सड़क पर निगरानी करनी होगी। जहां भी जाम की सूचना मिलेगी, वहां क्विक रिस्पांस टीम (QRT) को तत्काल भेजा जाएगा, पटना में मेट्रो परियोजना को देखते हुए कई जगह वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू की जा रही है और प्रमुख सड़कों से अतिक्रमण हटाने का अभियान भी चलाया जाएगा। ‘रोको-टोको अभियान’ के तहत नियमित जांच जारी रहेगी। वाहन जांच के दौरान डिजिलॉकर में उपलब्ध दस्तावेज भी मान्य होंगे।
सड़क हादसे में 1.5 लाख तक कैशलेस इलाज, 24 घंटे में वाहन छोड़ने का निर्देश
एडीजी सुधांशु कुमार ने बताया कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों को प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत निर्धारित अस्पतालों में 1.5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। बिहार में अब तक केवल 82 लोगों ने इस योजना का लाभ लिया है, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज की गई है और छह महीने के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने की कोशिश है। यदि किसी वाहन को जब्त किया जाता है तो प्रक्रिया पूरी होने के 24 घंटे के भीतर उसे छोड़ने का निर्देश दिया गया है।







