हमीदिया अस्पताल: बर्न यूनिट के एसी 6 माह से बंद, कूलर से हो रही सर्जरी

मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित हमीदिया अस्पताल के बर्न वार्ड में पिछले छह महीने से एयर कंडीशनर (एसी) काम नहीं कर रहे हैं। ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू में कूलर लगाकर मरीजों का इलाज और सर्जरी की जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे गंभीर रूप से जले मरीजों में संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है।

हमीदिया अस्पताल: बर्न यूनिट के एसी 6 माह से बंद, कूलर से हो रही सर्जरी
“प्रतिनिधिक तस्वीर”

बर्न यूनिट के ओटी और आईसीयू में कूलर से हो रहा इलाज

हमीदिया अस्पताल परिसर की कमला नेहरू बिल्डिंग में स्थित बर्न यूनिट के हालात चिंताजनक बने हुए हैं। यहां ऑपरेशन थिएटर (ओटी), आईसीयू और पूरे वार्ड के एसी पिछले छह माह से बंद पड़े हैं। अस्पताल प्रशासन ने मौजूदा व्यवस्था के तहत ओटी में कूलर लगाकर जरूरी सर्जरी की जा रही है। वहीं 70 से 90 प्रतिशत तक जल चुके मरीजों को आईसीयू में भी कूलर की हवा के सहारे रखा गया है।

बर्न यूनिट के प्रभारी और विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद गौतम ने बताया कि एसी और कूलिंग सिस्टम को ठीक करने के लिए करीब छह माह पहले ही अनुमान तैयार कर लिया गया था और इसकी जानकारी प्रशासन को दे दी गई थी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मेंटेनेंस विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायत पत्र भी दिए जा चुके हैं, लेकिन बजट और टेंडर प्रक्रिया के कारण काम अटका हुआ है।

45 डिग्री गर्मी में बढ़ी मरीजों की परेशानी

भोपाल में इन दिनों पारा 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है। ऐसे में बर्न वार्ड में भर्ती मरीजों को अत्यधिक गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में यहां नॉर्मल वार्ड में छह और आईसीयू में चार मरीज भर्ती हैं। आईसीयू में भर्ती एक मरीज के तीमारदार ने बताया कि उनका भाई 90 प्रतिशत तक जल चुका है और गर्मी के कारण उसे बहुत परेशानी हो रही है। डॉक्टरों ने शरीर को ठंडा रखने के लिए हवा की आवश्यकता बताई, जिसके बाद कूलर लगाया गया।

जले मरीजों के लिए क्यों जरूरी है ठंडी और स्वच्छ हवा

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, जले हुए मरीजों के लिए ठंडी और बैक्टीरिया रहित हवा उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। जलने पर त्वचा जो शरीर की सबसे बड़ी सुरक्षा परत होती है, नष्ट हो जाती है। इससे बैक्टीरिया, वायरस और फंगस सीधे शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे सेप्सिस (रक्त संक्रमण) का खतरा बना रहता है। बर्न ओटी और आईसीयू को हाई सेंसिटिव जोन माना जाता है। कूलर से आने वाली हवा में बैक्टीरिया हो सकते हैं जो खुले जख्मों तक पहुंचकर संक्रमण फैला सकते हैं। गंभीर स्थिति में इससे शरीर के कई अंग काम करना बंद कर सकते हैं और मरीज की मौत भी हो सकती है। यही कारण है कि बर्न वार्ड में एसी मरीजों के लिए जीवनदायिनी के समान होते हैं। डॉ. आनंद गौतम ने उम्मीद जताई है कि टेंडर और मेंटेनेंस की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही सभी एसी को दुरुस्त कर लिया जाएगा। फिलहाल मरीज और उनके परिजन कूलर के सहारे गर्मी से राहत पाने को मजबूर हैं।

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