राजधानी भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में मनोरंजन के नाम पर बढ़ रहे वॉटर पार्क और पूल पार्टी कल्चर ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार को शहर के एक प्रमुख वॉटर पार्क में महिलाओं के साथ कथित छेड़छाड़ का मामला सामने आया, जो बाद में खूनी संघर्ष में बदल गया। इस घटना के बाद से पार्क प्रबंधन और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
“प्रतिनिधिक तस्वीर”
हिंसा तक कैसे पहुंचा मामला
जानकारी के अनुसार, भोपाल से कई संभ्रांत परिवार वीकेंड पर वॉटर पार्क में मनोरंजन के लिए पहुंचे थे। आरोप है कि वहां मौजूद युवकों के एक समूह ने परिवारों के साथ आई महिलाओं और युवतियों के साथ अभद्र व्यवहार और छेड़छाड़ शुरू कर दी। जब पीड़ित परिवारों ने इसका विरोध किया तो दोनों पक्षों के बीच झगड़ा हो गया। बताया जा रहा है कि विवाद इतना बढ़ गया कि यह खूनी संघर्ष में बदल गया। स्थिति बिगड़ती देख पार्क प्रबंधन ने बीच-बचाव करने की बजाय ग्रामीण क्षेत्रों से बुलाए गए सुरक्षा कर्मियों से मारपीट करवाई।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दोनों पक्षों के बीच जमकर हाथापाई होती दिख रही है। हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह वीडियो किसने बनाया और इसे कब ऑनलाइन पोस्ट किया गया।
प्रशासन की चुप्पी कायम
सोशल मीडिया पर मामले के वायरल होने और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैलने के बावजूद पुलिस प्रशासन ने अब तक इस मामले में कोई औपचारिक संज्ञान नहीं लिया है। न तो कोई एफआईआर दर्ज होने की सूचना है और न ही किसी संदिग्ध को हिरासत में लिए जाने की पुष्टि हुई है। प्रशासन की इस निष्क्रियता ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिरकार ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं हो पाती, खासकर जब घटना का वीडियो सबूत मौजूद हो।
यह भी पहली घटना नहीं
बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब इसी वॉटर पार्क में कोई दर्दनाक घटना हुई हो। लगभग दो साल पहले रविवार के दिन ही यहां एक 9 वर्षीय बच्चे की डूबने से मौत हो गई थी। भोपाल के साकेत नगर निवासी गौरव राजपूत का परिवार आज भी उस दुखद घटना को नहीं भूला है। उस समय भी सुरक्षा इंतजामों की कमियां सामने आई थीं।
हाईवे पर अवैध रिसोर्ट भी चिंता का विषय
इस मामले ने एक बड़े मुद्दे को भी उजागर किया है। इंदौर-नर्मदापुरम हाईवे के किनारे कृषि भूमियों पर बिना उचित व्यावसायिक अनुमति के कई पूल पार्टी कैंपस चल रहे हैं। कम बजट में प्राइवेट पार्टी का ऑफर लोगों को आकर्षित करता है, लेकिन इन जगहों पर न तो आने वालों का कोई रिकॉर्ड रखा जाता है और न ही पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होती है। स्थानीय ग्रामीणों को सुरक्षा गार्ड की वर्दी देकर तैनात कर दिया जाता है, जो विवाद की स्थिति में पुलिस की मदद करने के बजाय स्थानीय दबाव में काम करते हैं। इससे आम पर्यटकों और परिवारों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो जाता है।
फिलहाल, इस मामले में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही प्रशासन इस मामले की गंभीरता को समझते हुए आवश्यक कार्रवाई करेगा।
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