ईरान: बम डिफ्यूज करते समय IRGC के 14 साइंटिस्टों की मौत, जमीन में दबे थे अमेरिका-इजरायल के बम
ईरान के जंजन प्रांत में जमीन के अंदर दबे विस्फोटकों को नष्ट करने के अभियान के दौरान एक बड़ा धमाका हुआ, जिसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के 14 साइंटिस्ट मारे गए। यह घटना तब हुई जब बम निरोधक दस्ते के विशेषज्ञ खेती की जमीन और अन्य संवेदनशील इलाकों से पुराने बम हटाने का काम कर रहे थे।
क्लस्टर बमों से दूषित थी 1200 हेक्टेयर जमीन
IRGC की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, टीमें मुख्य रूप से क्लस्टर बमों और इसी तरह के अन्य विनाशकारी हथियारों को निष्क्रिय करने का काम कर रही थीं। क्लस्टर बम बेहद खतरनाक होते हैं क्योंकि इनमें कई छोटे विस्फोटक होते हैं, जो अक्सर समय पर नहीं फटते और सालों तक जमीन में दबे रहकर खतरा बने रहते हैं। इन हथियारों ने जंजन प्रांत की करीब 1,200 हेक्टेयर से अधिक जमीन को दूषित कर दिया था, जिसमें कृषि योग्य भूमि भी शामिल थी। स्थानीय किसानों को इन जमीनों का उपयोग करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, जिसके बाद यह सफाई अभियान शुरू किया गया था।
तीन मीटर नीचे दबे थे विस्फोटक
बयान के अनुसार, कई विस्फोटक उपकरण जमीन से तीन मीटर नीचे तक दफनाए गए थे। इतनी गहराई में दबे होने के कारण इनका पता लगाना और इन्हें बाहर निकालना एक चुनौतीपूर्ण और खतरनाक प्रक्रिया बन गई थी। तीन मीटर की गहराई ने मेटल डिटेक्टर और अन्य खोजी उपकरणों के काम को भी मुश्किल बना दिया था। खुफिया सूत्रों के अनुसार, जंजन प्रांत में जमीन के अंदर सैकड़ों बम दबे थे, जिनमें अमेरिका और इजरायल द्वारा दागे गए लेकिन नहीं फटने वाले बम भी शामिल थे। इसके अलावा ईरान की ओर से रखे गए कई बम भी थे।
दशकों पुराने बम बेहद संवेदनशील हो चुके थे
जांच में यह बात सामने आई है कि ये विस्फोटक उपकरण दशकों पुराने होने के बावजूद बेहद संवेदनशील हो चुके थे। लंबे समय तक जमीन के नीचे दबे रहने और मौसम के बदलावों के कारण इनमें रासायनिक अस्थिरता आ गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि सफाई के दौरान जरा सी हलचल या दबाव ने इन उपकरणों को विस्फोट के लिए ट्रिगर कर दिया। सफाई अभियान का उद्देश्य इन इलाकों को सुरक्षित बनाना था ताकि स्थानीय किसान अपनी जमीन का दोबारा इस्तेमाल कर सकें। हालांकि, पुराने युद्धों के ये अवशेष 14 जवानों की जान ले गए। IRGC के अनुसार, मामले की जांच जारी है और सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की जा रही है।
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