भोपाल: ईरान युद्ध के असर से सामूहिक विवाह में लकड़ी की भट्टियों पर बना भोजन, 250 युवाओं ने लिया परिचय

भोपाल में राठौर संघ द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह एवं परिचय सम्मेलन में वैश्विक ईंधन संकट के कारण लकड़ी की पारंपरिक भट्टियों का उपयोग किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों युवक-युवतियों ने भाग लिया और कई जोड़े वैदिक रीति से विवाह बंधन में बंधे।

भोपाल: ईरान युद्ध के असर से सामूहिक विवाह में लकड़ी की भट्टियों पर बना भोजन, 250 युवाओं ने लिया परिचय

राठौर संघ भोपाल ने 20 अप्रैल को पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेदिक चिकित्सा संस्थान परिसर, दशहरा मैदान, कलियासोत डेम, नेहरू नगर में एक सामूहिक विवाह एवं परिचय सम्मेलन का आयोजन किया। यह कार्यक्रम सुबह 8 बजे दीप प्रज्जवलन और गणेश वंदना के साथ शुरू हुआ। मुख्य आकर्षण परिचय सम्मेलन रहा, जो सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक चला, जिसमें लगभग 250 युवक-युवतियों ने एक-दूसरे से परिचय प्राप्त किया। इसके पश्चात सामूहिक विवाह संस्कार संपन्न हुए, जहां कई जोड़ों ने वैदिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह किया। नवदंपतियों को आशीर्वाद देने के साथ ही विदाई समारोह का भी आयोजन किया गया।

ईरान युद्ध और ईंधन संकट ने बदली योजनाएं

आयोजन समिति ने वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए एक अहम फैसला लिया। ईरान युद्ध के बाद घरेलू गैस, पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पर पड़ रहे प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, आयोजकों ने पारंपरिक लकड़ी की भट्टियों पर भोजन बनाने का निर्णय लिया। सम्मेलन में परोसे गए अधिकांश व्यंजन लकड़ी की आग पर तैयार किए गए, जिससे किसी भी प्रकार की ईंधन बाधा के बिना आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो सका। इस निर्णय से एक ओर जहां गैस पर निर्भरता कम हुई, वहीं आयोजन में पारंपरिक भोजन पद्धति की झलक भी देखने को मिली।

पर्यावरण अनुकूल और दहेज विरोधी पहल

सम्मेलन को पर्यावरण के अनुकूल (ईको-फ्रेंडली) बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके तहत:

प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया।

कागज से बने डिस्पोजल का उपयोग किया गया।

पानी पीने के लिए स्टील और तांबे के बर्तनों की व्यवस्था की गई।

डिजिटल निमंत्रण भेजकर कागज की बचत की गई।

कार्यक्रम के दौरान दहेज प्रथा जैसी कुप्रथा के खिलाफ समाज को जागरूक किया गया। आयोजकों ने सादगीपूर्ण विवाह और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया। राठौर समाज के लोगों ने बताया कि यह सम्मेलन पूरी तरह से समाज के सहयोग और दान से संपन्न हुआ। इस अवसर पर समाज की एक पत्रिका का भी प्रकाशन किया गया।

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