शनिवार, 14 मार्च 2026

भोपाल गैस त्रासदी: यूनियन कार्बाइड स्थल पर सफाई योजना सौंपने का हाईकोर्ट का निर्देश

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को भोपाल गैस त्रासदी स्थल पर दूषित मिट्टी और भूजल के आकलन और निवारण के लिए पांच सप्ताह के भीतर एक विस्तृत योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने यह आदेश शुक्रवार को उन याचिकाओं के समूह पर सुनवाई करते हुए दिया, जिनमें जहरीले अपशिष्ट के निपटान और दूषित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई थी।


भोपाल गैस त्रासदी: यूनियन कार्बाइड स्थल पर सफाई योजना

सरकार ने अदालत को सौंपी कार्रवाई रिपोर्ट

न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह और न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की खंडपीठ के समक्ष भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग ने एक कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें बताया गया कि अपर मुख्य सचिव अशोक बरनवाल की अध्यक्षता में 3 मार्च को एक बैठक हुई थी, जिसमें यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) कारखाना स्थल एवं आसपास के क्षेत्रों में दूषित मिट्टी और भूजल के समयबद्ध निवारण पर चर्चा की गई। रिपोर्ट के अनुसार, स्थल पर मौजूद यूसीआईएल संयंत्र संरचना के विषैलेपन को दूर करने और उसे डीकंटैमिनेट करने पर भी विचार किया गया। सरकार ने अदालत को सूचित किया कि इस कार्य के लिए एक अल्पकालिक निविदा (शॉर्ट टेंडर) जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया है। यह निविदा केवल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा पैनलबद्ध उन्हीं कंपनियों को जारी की जाएगी, जो इस प्रकार के खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अधिकृत हैं।

अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 13 अप्रैल की तारीख तय की

भोपाल गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाले समूह 'भोपाल ग्रुप ऑफ इंफॉर्मेशन एंड एक्शन' की हस्तक्षेप याचिकाकर्ता रचना ढींगरा ने बताया कि याचिकाकर्ताओं ने अदालत से इस मुद्दे के समयबद्ध समाधान के लिए निर्देश देने का आग्रह किया था। हालांकि, वर्तमान आदेश में न्यायालय ने फिलहाल केवल आकलन और योजना प्रस्तुत करने को कहा है। खंडपीठ ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 13 अप्रैल, 2026 की तारीख निर्धारित की है।

पृष्ठभूमि में क्या है?

गौरतलब है कि वर्ष 2025 में यूनियन कार्बाइड कारखाना स्थल से लगभग 358 टन जहरीला रासायनिक कचरा धार जिले के पिथमपुर स्थित एक निजी अपशिष्ट उपचार सुविधा में भस्मीकरण के लिए भेजा गया था, जिसका स्थानीय निवासियों ने विरोध किया था। 2-3 दिसंबर, 1984 की रात को यूनियन कार्बाइड के संयंत्र से जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के रिसाव से हुई इस त्रासदी में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 5,479 लोगों की जान गई थी, जबकि पांच लाख से अधिक लोग इससे प्रभावित हुए थे।

नोट: यह खबर उपलब्ध जानकारी और विभिन्न मीडिया स्रोतों पर आधारित है। समाचार लिखे जाने के समय तक प्राप्त तथ्यों के अनुसार प्रस्तुत किया गया है। स्थिति में बदलाव संभव है और आधिकारिक पुष्टि के बाद अपडेट किया जा सकता है। 

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