सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के तीन प्रमुख टोल रोडों पर लागत से कई गुना अधिक टोल वसूली के मामले में अहम आदेश दिया है। न्यायालय ने इंदौर हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के फैसले को रद्द करते हुए तीन महीने के भीतर मामले की पुन: सुनवाई करने का निर्देश दिया। यह आदेश देवास-भोपाल, लेबड़-जावरा और जावरा-नयागांव टोल रोड पर कथित रूप से लागत से चार से छह गुना अधिक वसूली के आरोपों के संदर्भ में आया है।
याचिका में क्या तथ्य रखे गए?
पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने याचिका दायर कर आरोप लगाया कि इन टोल रोड का संचालन कर रही कंपनियों ने निर्माण लागत से कई गुना अधिक राशि वसूल कर ली है। याचिका में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 तक की स्थिति इस प्रकार है: देवास-भोपाल रोड: 345 करोड़ रुपये की लागत के मुकाबले 2,056 करोड़ रुपये टोल वसूला गया। लेबड़-जावरा रोड: 589 करोड़ रुपये की लागत के मुकाबले 2,376 करोड़ रुपये वसूले गए। जावरा-नयागांव रोड: 426 करोड़ रुपये की लागत के विपरीत 2,635 करोड़ रुपये का टोल संग्रह हुआ। याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि कंपनियों के स्वतंत्र लेखा परीक्षकों ने रखरखाव और ब्याज के खर्च को वास्तविकता से कई गुना अधिक दिखाकर टोल वसूली को सही ठहराने का प्रयास किया। साथ ही, इन मार्गों पर जनवरी 2026 तक 10,691 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 3,821 लोगों की जान गई और 8,314 लोग घायल हुए।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और आगे की प्रक्रिया
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को 15 दिन के भीतर हाईकोर्ट में एक नया आवेदन दाखिल करने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया है कि मामले से प्रभावित होने वाले सभी पक्षों, जिनमें टोल रोड के निवेशक भी शामिल हैं, को सुनवाई में शामिल किया जाए। सभी संबंधित पक्षों को 18 मार्च 2026 को इंदौर हाईकोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता ने नोएडा ब्रिज (20 दिसंबर 2024) और मंदसौर ब्रिज पर टोल वसूली रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों का हवाला देते हुए इन टोल रोड पर भी इसी सिद्धांत को लागू करने की मांग की थी। उनका तर्क है कि 2016-17 तक ही इन कंपनियों को लागत, रखरखाव और ब्याज निकालने के बाद 140 करोड़ से 320 करोड़ रुपये तक का शुद्ध लाभ हो चुका था, इसके बावजूद देवास-भोपाल और जावरा-नयागांव रोड पर 2033 तथा लेबड़-जावरा रोड पर 2038 तक टोल वसूली जारी रखने की अनुमति दी गई है। अब हाईकोर्ट को तीन महीने में इस मामले पर नया निर्णय देना है।
नोट: यह खबर उपलब्ध जानकारी और विभिन्न मीडिया स्रोतों पर आधारित है। समाचार लिखे जाने के समय तक प्राप्त तथ्यों के अनुसार प्रस्तुत किया गया है। स्थिति में बदलाव संभव है और आधिकारिक पुष्टि के बाद अपडेट किया जा सकता है।
भोपाल गैंगवार: हिस्ट्रीशीटर के घर और अस्पताल में फायरिंग, बेटा घायल

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें