मालीघाट में शांति सेना द्वारा प्रख्यात गांधीवादी भाईजी डॉ. एस.एन. सुब्बाराव की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। संवाद संस्थान के संयोजक प्रोफेसर सोनू सरकार की अध्यक्षता में माधुरी यादव और कठपुतली कलाकार सुनील कुमार को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में भाईजी के योगदान को याद किया गया।
मालीघाट में मंगलवार को शांति सेना के तत्वावधान में प्रख्यात गांधीवादी भाईजी डॉ. एस.एन. सुब्बाराव की पुण्यतिथि पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। संवाद संस्थान के संयोजक प्रोफेसर सोनू सरकार की अध्यक्षता में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर माधुरी यादव और कठपुतली कलाकार सुनील कुमार को अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह तथा मधुबनी पेंटिंग भेंट कर सम्मानित किया गया।
प्रोफेसर सोनू सरकार ने बताया कि पद्मश्री डॉ. एस.एन. सुब्बाराव गांधीवादी विचारों को स्थापित करने में विशिष्ट पहचान रखते थे। वर्ष 1929 में बेंगलुरु में जन्मे डॉ. सुब्बाराव 13 वर्ष की आयु में ही भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़ गए थे। उन्होंने चंबल घाटी में कुख्यात डकैतों को आत्मसमर्पण करवाया। गांधी सेवा संघ की स्थापना कर हजारों लोगों को रोजगार से जोड़ा। वे राष्ट्रीय सेवा योजना के संस्थापक सदस्य रहे तथा नेशनल यूथ प्रोजेक्ट की भी स्थापना की
भाईजी के योगदान पर प्रकाश
सरला श्रीवास सोशल कल्चरल रिसर्च फाउंडेशन के सचिव एवं कठपुतली कलाकार सुनील कुमार ने कहा कि भाईजी केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि प्रेम, करुणा, भाईचारे और इंसानियत की जीवंत मिसाल थे। उन्होंने अपना जीवन देश, समाज और युवाओं के लिए समर्पित कर दिया। युवा शिविरों के माध्यम से नई पीढ़ी को जोड़ने, उनमें राष्ट्रीय एकता की भावना जगाने और समाज में सद्भावना फैलाने का उनका प्रयास सदैव याद रखा जाएगा।
माधुरी यादव ने बताया कि चंबल घाटी के सैकड़ों बागियों का हृदय परिवर्तन कर उन्हें हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करना भाईजी के विश्वास, धैर्य और मानवीय संवेदना का उदाहरण है। वे अपने आचरण से सिखाते थे कि प्रेम से दिल जीते जा सकते हैं और इंसानियत की ताकत किसी भी हिंसा से बड़ी होती है, कार्यक्रम में वरिष्ठ कठपुतली कलाकार कांता देवी, आदित्य राज ठाकुर, गायत्री देवी और शिवम कुमार उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन सरला श्रीवास युवा मंडल की अध्यक्ष सुमन कुमारी ने किया।







