Bihar Hospital Controversy: टूटी टांग पर गत्ते का सहारा देने का वीडियो वायरल, स्वास्थ्य विभाग ने मामले का संज्ञान लिया

बिहार के मंझौल सब-डिविज़नल अस्पताल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें एक सड़क हादसे में घायल मरीज़ की टूटी हुई टांग को दूसरे अस्पताल भेजने से पहले गत्ते (कार्डबोर्ड) लगाकर अस्थायी सहारा दिया गया। इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल प्रशासन ने इसे फर्स्ट एड का हिस्सा बताते हुए बचाव किया, जबकि सिविल सर्जन ने मामले की जांच कराने की बात कही है।

सड़क हादसे के बाद मरीज़ को अस्पताल ले जाया गया

यह घटना 3 अगस्त की शाम की है, जब हरसैन पुल के पास एक सड़क हादसे में मरीज़ कृष्ण कुमार के पैर में गंभीर चोट लग गई। कृष्ण ने बताया कि वह अपने भाई के साथ गढ़पुरा से घर लौट रहे थे, तभी एक ऑटो-रिक्शा ने उनकी गाड़ी को टक्कर मार दी, जिससे वह गिर गए और उनके पैर में चोट लग गई। उन्होंने बताया कि उन्हें बहुत दर्द हो रहा था, तभी ‘डायल 112’ की पुलिस गाड़ी उन्हें इलाज के लिए मंझौल सब-डिविजनल अस्पताल ले गई।

वायरल वीडियो में क्या दिखा

अस्पताल का एक वीडियो अब वायरल हो रहा है, जिसमें मेडिकल स्टाफ़ कृष्ण के घायल पैर के दोनों तरफ़ कार्डबोर्ड के टुकड़े लगाकर उन्हें पट्टी से बांधते हुए दिख रहा है। यह बेगूसराय के सदर अस्पताल में रेफर करने से पहले एक अस्थायी सहारे के तौर पर किया गया था। वीडियो वायरल होने के बाद कई यूज़र्स ने इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश के बावजूद सरकारी हेल्थकेयर सुविधाओं की हालत पर सवाल उठाए।

सदर अस्पताल में इलाज और प्राइवेट अस्पताल का फैसला

कृष्ण ने बताया कि सदर अस्पताल पहुंचने पर उन्हें शुरुआती इलाज दिया गया और IV ड्रिप लगाई गई। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया था कि लगभग एक हफ्ते बाद प्लास्टर लगाया जाएगा, जिसके बाद उन्होंने किसी प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने का फैसला किया।

अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा

मंझौल सब-डिविज़नल हॉस्पिटल के इंचार्ज अभिनव प्रियदर्शी ने इस प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि फ्रैक्चर के बाद अस्थायी सहारे के तौर पर रुई और पट्टी का इस्तेमाल करना मेडिकल नज़रिए से गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि मरीज़ को रेफर करने से पहले उसकी हालत स्थिर करने के लिए फर्स्ट एड के तौर पर ऐसे उपाय किए जाते हैं।

प्रियदर्शी ने आगे कहा कि घटना के समय अस्पताल में कोई ऑर्थोपेडिक डॉक्टर या ड्रेसर मौजूद नहीं था, इसलिए मरीज़ को शुरुआती सहारा देकर बड़े सेंटर रेफर कर दिया गया।

सिविल सर्जन ने मामले का संज्ञान लिया

बेगूसराय के सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि उन्होंने वायरल वीडियो का संज्ञान लिया है और मामले की जांच करेंगे। उन्होंने कहा कि हालांकि कुछ स्थितियों में रुई और पट्टी से अस्थायी सहारा देना फर्स्ट एड का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इस मामले की खास परिस्थितियों की जांच की जाएगी और अगर कोई लापरवाही पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।

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  • इसरत फातिमा 7 वर्षों के अनुभव वाली एक पेशेवर पत्रकार और कंटेंट राइटर हैं। वह राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समाचार, राजनीति, व्यवसाय, शेयर बाजार, क्रिप्टोकरेंसी, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन और सरकारी योजनाओं सहित विभिन्न विषयों पर शोध-आधारित लेख लिखती हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय जानकारी सरल भाषा में पहुँचाना है।

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