ATM का इस्तेमाल तो आप रोज करते होंगे। कभी सैलरी निकालने के लिए, तो कभी जरूरी खर्च के लिए। लेकिन जरा सोचिए कि आप ATM पर खड़े हैं, पिन डालते हैं, रकम डालते हैं, स्क्रीन पर “ट्रांजैक्शन सक्सेसफुल” भी दिख जाता है, फोन पर बैंक का मैसेज भी आ जाता है कि पैसे कट गए हैं। लेकिन मशीन से एक भी नोट नहीं निकलता। यह स्थिति किसी के भी लिए बेहद परेशान करने वाली होती है। ऐसे में सबसे पहला सवाल मन में आता है कि पैसा वापस आएगा या नहीं? अगर आएगा तो कब? और अगर बैंक मानने से इनकार कर दे तो क्या करें?
सच्चाई यह है कि यह समस्या जितनी डरावनी लगती है, उससे कहीं ज्यादा आम है। हजारों लोगों के साथ हर महीने ऐसा होता है। और अच्छी बात यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने इस स्थिति के लिए बहुत साफ नियम बनाए हुए हैं। बैंक को कानूनी रूप से तय समय के भीतर आपका पैसा वापस करना ही होता है। अगर बैंक ऐसा नहीं करता, तो उसे हर दिन के हिसाब से मुआवजा भी देना पड़ता है। और अगर फिर भी बात न बने तो RBI का बैंकिंग लोकपाल सुनवाई करता है। इस लेख में हम आपको बिल्कुल शुरू से आखिर तक की पूरी प्रक्रिया बता रहे हैं कि ATM से पैसा कट जाने के बाद क्या-क्या करना चाहिए।
ATM ट्रांजैक्शन फेल होने के मुख्य कारण
ATM से पैसा न निकलने के पीछे कई तरह की तकनीकी वजहें हो सकती हैं। इन्हें समझना इसलिए जरूरी है, क्योंकि जब आप बैंक में शिकायत दर्ज कराते हैं, तो बैंक की जांच में यही बातें सामने आती हैं। सबसे आम वजह होती है ATM के भीतर नकदी का खत्म हो जाना। जब मशीन में नोट्स की सप्लाई कम हो जाती है, तो सिस्टम स्क्रीन पर ट्रांजैक्शन को सक्सेसफुल तो दिखा सकता है, लेकिन असल में कैश डिस्पेंसर से नोट नहीं निकल पाते।
दूसरी बड़ी वजह नेटवर्क की गड़बड़ी होती है। जब ATM मशीन बैंक के सर्वर से कनेक्ट नहीं हो पाती, तो ट्रांजैक्शन पूरा होने से पहले ही रुक जाता है। लेकिन आपके अकाउंट से पैसे तुरंत कट जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बैंक का सिस्टम ट्रांजैक्शन को “इन प्रोसेस” मान लेता है और पैसे डेबिट कर देता है। नेटवर्क वापस आने पर अगर सिस्टम को पता चलता है कि कैश नहीं निकला, तो पैसे वापस क्रेडिट कर दिए जाते हैं। लेकिन अगर सिस्टम अपडेट न हो पाए, तो पैसा फंस जाता है।
तीसरी वजह ATM कार्ड की चुंबकीय पट्टी या चिप में खराबी हो सकती है। कई बार कार्ड को मशीन कई बार पढ़ती है, लेकिन डेटा सही तरीके से ट्रांसमिट नहीं हो पाता। इससे ट्रांजैक्शन तो कट जाता है, पर पैसे डेबिट हो जाते हैं। इसके अलावा ATM का सॉफ्टवेयर क्रैश होना, बिजली की अचानक गुल हो जाना, या डिस्पेंसर में मैकेनिकल फॉल्ट होना भी इस समस्या के आम कारणों में शामिल हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि ग्राहक ट्रांजैक्शन के दौरान जल्दबाजी में रहता है और समय से पहले ही ATM से चला जाता है। कुछ मशीनों में देरी से नोट निकलते हैं, लेकिन तब तक कार्ड बाहर आ चुका होता है और ट्रांजैक्शन कैंसल मान लिया जाता है। हालांकि ऐसी स्थिति में भी पैसा अकाउंट से कट जाता है, इसलिए सावधानी जरूरी है।
एक और कारण ट्रांजैक्शन के दौरान गलत पिन डालना या मल्टीपल अटेम्प्ट करना भी हो सकता है। कई बार सिस्टम एक ही ट्रांजैक्शन को कई बार प्रोसेस कर लेता है और पैसे दो बार कट जाते हैं। इसे डुप्लीकेट डेबिट कहा जाता है। ऐसे मामलों में बैंक की जांच में यह साफ हो जाता है कि एक ही टाइम स्टैम्प पर दो बार पैसे कटे हैं, और दोनों में से एक रकम वापस कर दी जाती है।
ध्यान रखने वाली बात यह है कि चाहे कारण कोई भी हो, अगर आपके अकाउंट से पैसे कट गए हैं और कैश नहीं मिला, तो यह RBI की नजर में एक “फेल्ड ट्रांजैक्शन” माना जाता है। और फेल्ड ट्रांजैक्शन के लिए बैंक जिम्मेदार होता है, ग्राहक नहीं।

RBI के नियम क्या कहते हैं – रिफंड की टाइमलाइन और मुआवजा
भारतीय रिजर्व बैंक ने फेल्ड ATM ट्रांजैक्शन को लेकर बहुत स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हुए हैं। RBI के नियमों के अनुसार, अगर ATM से कैश नहीं निकला और ग्राहक के अकाउंट से पैसे कट गए, तो बैंक को यह रकम पांच कार्यदिवसों के भीतर अपने आप वापस करनी होती है। इसे T+5 वर्किंग डेज का नियम कहा जाता है। “T” का मतलब है ट्रांजैक्शन की तारीख। यानी ट्रांजैक्शन के दिन से पांचवें कार्यदिवस तक बैंक को यह प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए ग्राहक को अलग से कोई आवेदन नहीं देना पड़ता। बैंक को खुद ही अपने सिस्टम से पता लगाना होता है कि कौन-कौन से ट्रांजैक्शन फेल हुए हैं और उन्हें रिवर्स करना होता है। इसे “प्रोएक्टिव रिवर्सल” कहते हैं।
लेकिन अगर बैंक पांच कार्यदिवसों के भीतर पैसे वापस नहीं करता, तो RBI का नियम कहता है कि बैंक को हर दिन के लिए 100 रुपये का मुआवजा देना होगा। यह मुआवजा पांचवें दिन के बाद से लेकर जिस दिन पैसा वापस आता है, उस दिन तक गिना जाता है। यह मुआवजा बैंक को अपने आप ग्राहक के अकाउंट में क्रेडिट करना होता है, लेकिन अक्सर ऐसा नहीं होता। इसलिए ग्राहक को लिखित शिकायत दर्ज करके इसका दावा करना पड़ता है।
RBI के 2011 के सर्कुलर के अनुसार, ग्राहक को मुआवजे का दावा ट्रांजैक्शन की तारीख से 30 दिनों के भीतर बैंक में दर्ज करना होता है। अगर आप 30 दिन बाद शिकायत करते हैं, तो मुआवजा मिलने में दिक्कत हो सकती है। हालांकि, मूल रकम वापस पाने का अधिकार समय सीमा से बंधा नहीं है। लेकिन जितनी जल्दी शिकायत करेंगे, उतनी जल्दी समाधान मिलेगा।
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर आपने किसी दूसरे बैंक के ATM से पैसे निकालने की कोशिश की थी, तो भी नियम वही रहते हैं। आपको अपने बैंक में ही शिकायत दर्ज करनी होती है, न कि उस बैंक में जिसका ATM था। आपका बैंक उस दूसरे बैंक से समन्वय करके मामला सुलझाता है। RBI के निर्देशों के अनुसार, सभी एटीएम विवादों का निपटारा बैंकों को आपस में मिलकर करना होता है, और ग्राहक को बीच में नहीं फंसाया जा सकता।
कई बार बैंक ग्राहक से कहता है कि “आपने पैसे निकाल लिए थे” या “हमारे रिकॉर्ड में ट्रांजैक्शन सक्सेसफुल दिख रहा है”। लेकिन कंज्यूमर कोर्ट के फैसलों में यह साफ हो चुका है कि एक बार ग्राहक ने शिकायत दर्ज कर दी, तो सबूत देने की जिम्मेदारी बैंक की होती है। बैंक को CCTV फुटेज या इलेक्ट्रॉनिक जर्नल रिकॉर्ड के जरिए साबित करना होता है कि ग्राहक ने वाकई पैसे लिए थे। अगर बैंक ऐसा नहीं कर पाता, तो उसे रिफंड और मुआवजा दोनों देना पड़ता है। हाल ही में कोझीकोड की कंज्यूमर कमीशन ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया पर 10,000 रुपये का रिफंड और 5,000 रुपये का मुआवजा लगाया था, क्योंकि बैंक यह साबित नहीं कर पाया कि ग्राहक को कैश मिला था।
ATM पर खड़े-खड़े तुरंत क्या करें
अगर आप ATM पर हैं और पैसे नहीं निकले, लेकिन मैसेज आ गया है कि अकाउंट से पैसे कट गए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले तो उसी जगह पर 60 से 90 सेकंड तक रुकें। कुछ ATM मशीनों में देरी से नोट बाहर आते हैं। अगर इतनी देर में भी पैसे नहीं निकलते, तो ATM स्क्रीन पर दिख रही सारी जानकारी की फोटो ले लें। ट्रांजैक्शन नंबर, ATM आईडी, तारीख और समय ये सब बहुत जरूरी हैं।
अगर आपके हाथ में ATM की रसीद नहीं आई है, तो कोई बात नहीं। फोन पर आया बैंक का मैसेज भी सबूत का काम करता है। उस मैसेज को डिलीट न करें। अगर मौके पर कोई गार्ड या ATM कस्टमर केयर का नंबर लिखा हो, तो उस पर कॉल करके तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। अगर कस्टमर केयर का नंबर नहीं मिल रहा, तो अपने बैंक के टोल-फ्री नंबर पर कॉल करें।
एक बहुत जरूरी बात यह है कि उसी ATM से दोबारा पैसे निकालने की कोशिश बिल्कुल न करें। कई लोग घबराहट में दूसरी बार ट्रांजैक्शन कर देते हैं, जिससे स्थिति और उलझ सकती है। अगर पहला ट्रांजैक्शन अभी प्रोसेस में है, तो दूसरा ट्रांजैक्शन उसे और गड़बड़ कर सकता है।
अगर ATM में कैमरा लगा है और आपको लगता है कि आपकी पहचान या ट्रांजैक्शन को लेकर कोई विवाद हो सकता है, तो आसपास के लोगों से भी गवाही के लिए कह सकते हैं। हालांकि ऐसा बहुत कम मामलों में जरूरी पड़ता है, क्योंकि ATM का अपना CCTV फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक लॉग बैंक के पास होता है।
अगर रात का समय है और बैंक का हेल्पलाइन नंबर नहीं मिल रहा, तो अगली सुबह सबसे पहले बैंक को सूचित करें। लेकिन कोशिश करें कि शिकायत जल्द से जल्द दर्ज हो जाए, क्योंकि 30 दिन की समय सीमा मुआवजे के दावे के लिए होती है। जितनी जल्दी शिकायत, उतना बेहतर।

बैंक में शिकायत कैसे दर्ज करें – ऑनलाइन और ऑफलाइन तरीका
बैंक में शिकायत दर्ज करने के कई तरीके हैं और आपको अपनी सुविधा के हिसाब से कोई भी तरीका चुन सकते हैं। सबसे आसान तरीका है अपने बैंक की मोबाइल बैंकिंग ऐप या नेट बैंकिंग का। लगभग सभी बैंकों की ऐप में “डिस्प्यूट” या “कंप्लेंट” का सेक्शन होता है। वहां जाकर आप “ATM कैश नॉट डिस्पेंस्ड” का ऑप्शन चुन सकते हैं। आपको ट्रांजैक्शन आईडी, रकम, तारीख और समय भरना होता है। शिकायत दर्ज करने के बाद आपको एक कंप्लेंट नंबर या टिकट नंबर मिलेगा। इसे संभाल कर रखें, क्योंकि आगे फॉलो-अप में यही काम आएगा।
अगर आप ऐप या नेट बैंकिंग का इस्तेमाल नहीं करते, तो बैंक के कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करके भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। फोन पर बात करते समय अपने पास ATM की रसीद, बैंक का मैसेज या ट्रांजैक्शन की डिटेल्स रखें। कस्टमर केयर वाला आपसे ट्रांजैक्शन आईडी, ATM की लोकेशन और अकाउंट नंबर पूछेगा। सारी जानकारी सही-सही दें। कॉल के अंत में जरूर पूछें कि कंप्लेंट नंबर क्या है और अनुमानित समाधान में कितना समय लगेगा।
तीसरा तरीका है अपनी बैंक शाखा में जाकर लिखित शिकायत देना। अगर ऑनलाइन या फोन पर शिकायत करने के बाद भी कुछ दिनों तक कोई समाधान नहीं मिलता, तो शाखा में जाकर लिखित शिकायत दें। शिकायत की एक कॉपी अपने पास भी रखें और उस पर बैंक की मोहर और रिसीविंग क्लर्क के हस्ताक्षर जरूर लें। यह कागज आगे काम आ सकता है। अगर शाखा में शिकायत पुस्तिका है, तो उसमें भी एंट्री कराएं। अगर शिकायत पुस्तिका नहीं मिलती, तो बैंक से मांगें या अपनी शिकायत की कॉपी जमा करके रसीद लें।
कई बैंकों ने अब व्हाट्सएप पर भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा शुरू कर दी है। अपने बैंक की वेबसाइट पर देखें कि क्या व्हाट्सएप नंबर उपलब्ध है। अगर है, तो उस पर मैसेज भेजकर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा, अगर आपने किसी दूसरे बैंक के ATM का इस्तेमाल किया था और वह बैंक आपकी शिकायत नहीं सुन रहा, तो अपने बैंक में ही शिकायत करें। आपका बैंक उस दूसरे बैंक से बात करेगा, क्योंकि RBI के नियमों के तहत बैंकों को आपस में समन्वय करना होता है।
शिकायत दर्ज कराते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखें। शिकायत में साफ-साफ लिखें कि किस तारीख और समय पर ट्रांजैक्शन किया था, कितनी रकम निकालनी थी, ATM कहां लगा था, और कैश नहीं मिला। अगर आपके पास ATM की रसीद है तो उसकी कॉपी लगाएं। अगर नहीं है तो बैंक के मैसेज का स्क्रीनशॉट लगाएं। शिकायत में अपना मोबाइल नंबर और अकाउंट नंबर भी जरूर लिखें। शिकायत की भाषा सरल और सीधी रखें। भावनात्मक या आरोपात्मक भाषा की जरूरत नहीं है। तथ्यों के साथ शिकायत करें, जल्दी समाधान मिलेगा।
अगर बैंक समाधान न करे तो RBI बैंकिंग लोकपाल से कैसे शिकायत करें
अगर आपने बैंक में शिकायत दर्ज करा दी है और 30 दिन बीत जाने के बाद भी कोई समाधान नहीं मिला, या बैंक ने आपकी शिकायत को खारिज कर दिया, तो अब आपको RBI के बैंकिंग लोकपाल के पास जाने का अधिकार है। यह प्रक्रिया बिल्कुल मुफ्त है और ऑनलाइन ही हो जाती है। इसके लिए RBI की आधिकारिक वेबसाइट cms.rbi.org.in पर जाएं। यह RBI का सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवेंस रेड्रेसल सिस्टम है।
वेबसाइट पर जाने के बाद “फाइल ए कंप्लेंट” का ऑप्शन चुनें। पहले आपको अपना मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी देनी होगी। उसके बाद OTP वेरिफिकेशन होगा। वेरिफिकेशन के बाद आपको बताना होगा कि शिकायत किस बैंक के खिलाफ है और किस श्रेणी की है। यहां “ATM/डेबिट कार्ड” या “फेल्ड ट्रांजैक्शन” का ऑप्शन चुनें। फिर अपनी शिकायत की पूरी डिटेल भरें। अपने बैंक में दर्ज शिकायत का नंबर भी जरूर डालें। यह बहुत जरूरी है, क्योंकि लोकपाल यह देखता है कि आपने पहले बैंक में शिकायत की थी या नहीं।
शिकायत में सारे जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। ATM की रसीद, बैंक के मैसेज का स्क्रीनशॉट, और बैंक में की गई शिकायत की कॉपी। अगर आपने शाखा में लिखित शिकायत दी थी, तो उसकी रसीद या कॉपी भी लगाएं। जितने मजबूत सबूत होंगे, उतनी जल्दी और मजबूत कार्रवाई होगी। शिकायत दर्ज करने के बाद आपको एक रेफरेंस नंबर मिलेगा। इस नंबर से आप अपनी शिकायत की स्थिति ऑनलाइन देख सकते हैं।
RBI लोकपाल शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित बैंक से जवाब मांगता है। बैंक को तय समय के भीतर जवाब देना होता है। अगर बैंक का जवाब संतोषजनक नहीं होता, तो लोकपाल खुद मामले की जांच करता है। जांच में अगर पाया जाता है कि बैंक की गलती है, तो लोकपाल बैंक को आदेश दे सकता है कि वह ग्राहक को रिफंड करे और मुआवजा भी दे। लोकपाल के पास ग्राहक को मानसिक परेशानी और समय की बर्बादी के लिए मुआवजा देने का अधिकार भी होता है।
लोकपाल तक पहुंचने की समय सीमा की बात करें तो, बैंक से अंतिम जवाब मिलने के 90 दिनों के भीतर शिकायत दर्ज करनी होती है। अगर बैंक ने 30 दिन में कोई जवाब नहीं दिया, तो 30 दिन पूरे होने के बाद 90 दिनों के भीतर लोकपाल में शिकायत की जा सकती है। यानी कुल मिलाकर ट्रांजैक्शन के लगभग 120 दिनों तक आप लोकपाल में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। हालांकि, जितनी जल्दी करेंगे, उतना अच्छा रहेगा।
कई लोगों को लगता है कि लोकपाल में शिकायत करने के लिए वकील की जरूरत होती है या भारी फीस देनी पड़ती है। लेकिन ऐसा नहीं है। यह पूरी प्रक्रिया मुफ्त है और आप खुद ही ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। अगर आपको ऑनलाइन शिकायत करने में दिक्कत आ रही है, तो आप RBI के किसी भी क्षेत्रीय कार्यालय में जाकर भी शिकायत दे सकते हैं। हालांकि ऑनलाइन तरीका सबसे आसान और तेज है।

पुलिस में FIR और कंज्यूमर कोर्ट का रास्ता कब अपनाएं
आम तौर पर ATM से कैश न निकलने के मामले में पुलिस में शिकायत करने की जरूरत नहीं पड़ती। यह एक बैंकिंग विवाद है, जिसे बैंकिंग लोकपाल के जरिए सुलझाया जा सकता है। लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में पुलिस में FIR दर्ज कराना जरूरी हो सकता है। अगर ATM से कैश तो निकला ही नहीं, लेकिन किसी और ने आपके अकाउंट से पैसे निकाल लिए, यानी यह मामला धोखाधड़ी या चोरी का है, तो यह आपराधिक मामला बनता है। ऐसे में पुलिस में शिकायत दर्ज कराना चाहिए।
अगर आपको लगता है कि ATM मशीन से छेड़छाड़ की गई थी, या कोई स्किमिंग डिवाइस लगाई गई थी, या आपका कार्ड क्लोन करके पैसे निकाले गए हैं, तो यह साइबर अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में आपको नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल यानी cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। यहां आप “फाइनेंशियल फ्रॉड” और “ATM कार्ड फ्रॉड” का ऑप्शन चुन सकते हैं। ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के बाद आप नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर भी लिखित शिकायत दे सकते हैं।
अगर बैंक और लोकपाल दोनों से भी समाधान नहीं मिलता, तो आप कंज्यूमर कोर्ट यानी उपभोक्ता अदालत का रास्ता अपना सकते हैं। कंज्यूमर कोर्ट में बैंक के खिलाफ “सेवा में कमी” का मामला दर्ज किया जाता है। कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत दर्ज करने के लिए आपको सारे दस्तावेज जमा करने होते हैं। इनमें ATM की रसीद, बैंक के मैसेज, बैंक में की गई शिकायत की कॉपी, और अगर लोकपाल में शिकायत की थी तो उसका जवाब शामिल होता है। अगर आप कंज्यूमर कोर्ट में खुद अपना केस लड़ना चाहें तो लड़ सकते हैं, या वकील की मदद भी ले सकते हैं।
कंज्यूमर कोर्ट के फैसलों में यह साफ हो चुका है कि अगर बैंक ग्राहक को रिफंड नहीं देता और मामला अदालत तक पहुंचता है, तो बैंक को सिर्फ मूल रकम ही नहीं, बल्कि मानसिक परेशानी के लिए मुआवजा और केस का खर्च भी देना पड़ सकता है। हाल ही में गुजरात के सूरत में एक व्यक्ति को 9 साल बाद 3.28 लाख रुपये का मुआवजा मिला था, क्योंकि बैंक ने 10,000 रुपये का फेल्ड ट्रांजैक्शन रिवर्स नहीं किया था। ऐसे उदाहरण दिखाते हैं कि अगर आप हार नहीं मानते और सही तरीके से शिकायत करते रहते हैं, तो कानून आपके साथ है।
हालांकि, यह भी समझना जरूरी है कि कंज्यूमर कोर्ट जाना आखिरी रास्ता होना चाहिए। पहले बैंक में शिकायत करें, फिर लोकपाल में जाएं, और अगर वहां भी बात न बने तो ही कोर्ट का रास्ता अपनाएं। इससे आपका समय और पैसा दोनों बचेंगे।

फेल्ड ATM ट्रांजैक्शन में कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए
फेल्ड ATM ट्रांजैक्शन की शिकायत करने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज चाहिए होते हैं। अगर आपके पास ये दस्तावेज पहले से तैयार हों, तो शिकायत करने में काफी आसानी होती है। सबसे पहला और सबसे जरूरी दस्तावेज है ATM की रसीद। अगर रसीद मिल गई है, तो उसे संभाल कर रखें। रसीद पर ट्रांजैक्शन आईडी, ATM आईडी, तारीख, समय और रकम लिखी होती है। यही जानकारी बैंक को जांच में सबसे ज्यादा काम आती है।
अगर रसीद नहीं मिली है, तो बैंक के मोबाइल मैसेज का स्क्रीनशॉट लें। इसमें भी ट्रांजैक्शन की तारीख, समय और रकम दिख जाती है। अगर मैसेज भी नहीं आया है, तो बैंक की ऐप या नेट बैंकिंग में ट्रांजैक्शन हिस्ट्री चेक करें। वहां से भी स्क्रीनशॉट ले सकते हैं। अगर कुछ भी नहीं है, तो बैंक को बताएं कि आपने कितनी रकम निकालने की कोशिश की थी और कब। बैंक अपने रिकॉर्ड से ट्रांजैक्शन ढूंढ सकता है।
अपने बैंक अकाउंट की पासबुक या स्टेटमेंट की कॉपी भी रखें। इसमें डेबिट हुई रकम का एंट्री दिख जाती है। अगर आपने बैंक में लिखित शिकायत दी है, तो उसकी रसीद या कॉपी जरूर रखें। अगर लोकपाल में शिकायत करनी है, तो बैंक से मिले जवाब की कॉपी भी लगानी होती है। अगर आपने कंज्यूमर कोर्ट में जाना है, तो सारे दस्तावेजों की सेट बनाकर रखें।
एक और जरूरी दस्तावेज है आपका पहचान पत्र। कई बार बैंक या लोकपाल शिकायत के साथ आधार कार्ड, पैन कार्ड या वोटर आईडी की कॉपी मांगते हैं। अपने पास एक सेट हमेशा रखें। अगर आप किसी और के अकाउंट से ट्रांजैक्शन कर रहे थे, तो उस व्यक्ति का ऑथराइजेशन लेटर भी चाहिए हो सकता है।
शिकायत की एक डायरी बनाएं। इसमें लिखें कि कब-कब किससे बात की, क्या जवाब मिला, कितने दिन में जवाब आया। अगर फोन पर बात की है, तो कॉल की तारीख और समय नोट करें। अगर ईमेल किया है, तो ईमेल का प्रिंटआउट लें। अगर ऑनलाइन शिकायत की है, तो उसका स्क्रीनशॉट लें। यह डायरी आगे कानूनी कार्रवाई में बहुत काम आती है।

आम गलतियां जो लोग करते हैं और कैसे बचें
• ATM से पैसा कट जाने के बाद लोग कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनसे उनका काम और बिगड़ जाता है। पहली और सबसे आम गलती है शिकायत करने में देरी। कई लोग सोचते हैं कि पैसा अपने आप वापस आ जाएगा। अगर बैंक ने खुद रिवर्स नहीं किया, तो जितनी देर करेंगे, उतना मुश्किल होगा। मुआवजे का दावा 30 दिनों के भीतर करना होता है। इसलिए जैसे ही पता चले कि पैसा नहीं आया, तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
• दूसरी गलती है बिना कंप्लेंट नंबर लिए शिकायत करना। कई लोग कस्टमर केयर पर कॉल करके बात कर लेते हैं और मान लेते हैं कि शिकायत दर्ज हो गई। लेकिन अगर आपके पास कंप्लेंट नंबर नहीं है, तो आगे फॉलो-अप करना मुश्किल हो जाता है। हमेशा कंप्लेंट नंबर या टिकट नंबर जरूर लें।
• तीसरी गलती है सबूत न रखना। कई लोग ATM की रसीद फेंक देते हैं या बैंक के मैसेज डिलीट कर देते हैं। बाद में जब शिकायत करनी होती है, तो कोई सबूत नहीं होता। इसलिए रसीद और मैसेज को संभाल कर रखें। अगर कागज की रसीद नहीं मिली है, तो स्क्रीन का फोटो ले लें।
• चौथी गलती है गुस्से में बैंक कर्मचारियों से बहस करना। इससे काम नहीं बनता, बल्कि और देरी होती है। शांति से, तथ्यों के साथ शिकायत करें। अगर एक कर्मचारी सुन नहीं रहा, तो उसके सीनियर से मिलें। अगर शाखा में बात न बने, तो हेड ऑफिस या ग्राहक सेवा प्रकोष्ठ से संपर्क करें।
• पांचवीं गलती है दूसरे बैंक के ATM में शिकायत करने पहुंच जाना। अगर आपने किसी और बैंक के ATM का इस्तेमाल किया था, तो भी शिकायत अपने बैंक में ही करनी होती है। जिस बैंक का ATM था, उसमें शिकायत करने पर वह आपको यह कहकर टाल सकता है कि “अपने बैंक से बात करें”। इसलिए सीधे अपने बैंक में शिकायत करें।
• छठी गलती है लोकपाल में शिकायत करने से पहले बैंक में लिखित शिकायत न करना। लोकपाल तब ही सुनवाई करता है जब आपके पास यह सबूत हो कि आपने बैंक में शिकायत की थी और 30 दिन में समाधान नहीं मिला। अगर आप सीधे लोकपाल गए, तो वह आपको बैंक में शिकायत करने के लिए कह सकता है। इसलिए पहले बैंक, फिर लोकपाल का क्रम जरूर अपनाएं।
• सातवीं गलती है छोटी रकम को नजरअंदाज करना। कई लोग सोचते हैं कि 500 या 1000 रुपये के लिए इतना झंझट क्यों करें। लेकिन याद रखें, यह आपका पैसा है और इसे वापस पाने का आपको पूरा हक है। अगर आप छोटी रकम के लिए शिकायत नहीं करेंगे, तो बैंक को लगेगा कि वह किसी भी रकम को रिवर्स करने में लापरवाही कर सकता है। इसलिए रकम छोटी हो या बड़ी, शिकायत जरूर करें।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी भी प्रकार की वित्तीय या कानूनी सलाह नहीं है। बैंकिंग से जुड़े किसी भी मामले में अपने बैंक की आधिकारिक वेबसाइट, ग्राहक सेवा या योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें। RBI के नियम और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं, इसलिए नवीनतम जानकारी के लिए RBI की आधिकारिक वेबसाइट देखें।







