अब्बास अराघची कौन हैं? जानिए पत्नी, जीवनी, करियर, क्या अभी जीवित हैं और ईरान के विदेश मंत्री बनने तक का पूरा सफर

हाल के वर्षों में जब भी ईरान की विदेश नीति, परमाणु कार्यक्रम या पश्चिम एशिया की राजनीति की चर्चा होती है, तो जिन नेताओं का नाम सबसे अधिक लिया जाता है उनमें सैयद अब्बास अराघची (Seyyed Abbas Araghchi) प्रमुख हैं। वे लंबे समय से ईरान की कूटनीति का महत्वपूर्ण चेहरा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। वर्षों तक परमाणु वार्ताओं में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद उन्हें वर्ष 2024 में ईरान का विदेश मंत्री नियुक्त किया गया।

अब्बास अराघची का प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

सैयद अब्बास अराघची का जन्म 5 दिसंबर 1962 को ईरान की राजधानी तेहरान में हुआ। उनका परिवार पारंपरिक कालीन (Carpet) व्यापार से जुड़ा हुआ था। कई पीढ़ियों से उनका परिवार इसी व्यवसाय में सक्रिय रहा था। बचपन से ही उन्होंने ऐसे माहौल में परवरिश पाई जहां व्यापार के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक घटनाओं पर भी चर्चा होती थी, उनका बचपन ऐसे दौर में बीता जब ईरान में बड़े राजनीतिक बदलाव हो रहे थे। 1979 की इस्लामी क्रांति ने पूरे देश की राजनीतिक व्यवस्था बदल दी। इसके कुछ समय बाद ईरान-इराक युद्ध शुरू हुआ, जिसने देश के लाखों युवाओं की तरह उनके जीवन को भी प्रभावित किया।

युवावस्था में उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में सेवा दी। यह अनुभव बाद में उनके सार्वजनिक जीवन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े दृष्टिकोण को प्रभावित करने वाला माना जाता है। हालांकि उनका मुख्य करियर सैन्य क्षेत्र में नहीं बल्कि कूटनीति और विदेश नीति में विकसित हुआ।

शिक्षा और अकादमिक जीवन

शिक्षा और अकादमिक जीवन

अब्बास अराघची ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों और राजनीति के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त की। विदेश नीति और वैश्विक कूटनीति में उनकी रुचि शुरू से ही स्पष्ट थी, उन्होंने आगे चलकर यूनाइटेड किंगडम के University of Kent से Political Thought विषय में पीएचडी की। उनकी शिक्षा ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून, राजनीतिक सिद्धांत, वैश्विक शक्ति संतुलन और कूटनीतिक रणनीतियों की गहरी समझ प्रदान की।

ईरान लौटने के बाद उन्होंने केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियां ही नहीं निभाईं, बल्कि विदेश नीति से जुड़े विषयों पर शिक्षण और लेखन कार्यों में भी योगदान दिया। उन्हें कई बार विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर व्याख्यान देते हुए भी देखा गया है, उनकी यही शैक्षणिक और व्यावहारिक पृष्ठभूमि आगे चलकर उन्हें ईरान के सबसे अनुभवी राजनयिकों में शामिल करती है।

विदेश मंत्रालय में करियर की शुरुआत

ईरान-इराक युद्ध समाप्त होने के बाद अब्बास अराघची ने 1989 में ईरान के विदेश मंत्रालय में अपने राजनयिक करियर की शुरुआत की। शुरुआती वर्षों में उन्होंने मंत्रालय के विभिन्न विभागों में काम करते हुए अंतरराष्ट्रीय संबंधों और विदेश नीति से जुड़े मामलों का अनुभव प्राप्त किया, उनकी कार्यशैली, शांत स्वभाव और जटिल मुद्दों पर संतुलित दृष्टिकोण के कारण उन्हें धीरे-धीरे बड़ी जिम्मेदारियां मिलने लगीं। आने वाले वर्षों में उन्होंने कई देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरान का पक्ष रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विदेश मंत्रालय में बढ़ती जिम्मेदारियां

विदेश मंत्रालय में बढ़ती जिम्मेदारियां और अंतरराष्ट्रीय पहचान

1989 में विदेश मंत्रालय से जुड़ने के बाद अब्बास अराघची ने अलग-अलग विभागों में काम करते हुए धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी विशेषज्ञता विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय संबंध, सुरक्षा नीति और बहुपक्षीय कूटनीति (Multilateral Diplomacy) में मानी जाती है।

कई वर्षों तक मंत्रालय में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने के बाद उन्हें विदेशों में ईरान का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला। इससे उन्हें वैश्विक राजनीति, अलग-अलग देशों की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ काम करने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ, ईरान की विदेश सेवा में उनका करियर लगातार आगे बढ़ता गया और वे उन अधिकारियों में शामिल हो गए जिन पर सरकार जटिल कूटनीतिक मामलों में भरोसा करती थी।

फिनलैंड और जापान में राजदूत के रूप में भूमिका

अब्बास अराघची को पहले फिनलैंड में ईरान का राजदूत नियुक्त किया गया। इस दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए काम किया। यूरोपीय देशों के साथ संवाद बनाए रखने में इस अनुभव ने उन्हें महत्वपूर्ण समझ प्रदान की।

इसके बाद वे जापान में ईरान के राजदूत बने। जापान एशिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में से एक है और ईरान के लिए ऊर्जा तथा व्यापार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार रहा है। राजदूत के रूप में उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए कई आधिकारिक बैठकों और वार्ताओं में भाग लिया, राजदूत के रूप में मिली सफलता ने उन्हें ईरान के सबसे अनुभवी कूटनीतिज्ञों की सूची में शामिल कर दिया।

ईरान के परमाणु समझौते (JCPOA) में उनकी भूमिका

ईरान के परमाणु समझौते (JCPOA) में उनकी भूमिका

अब्बास अराघची का नाम सबसे अधिक ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी वार्ताओं के कारण चर्चा में आया, साल 2013 के बाद ईरान और विश्व की छह प्रमुख शक्तियों के बीच लंबे समय तक बातचीत चली। इन देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन और जर्मनी शामिल थे। इन वार्ताओं का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताओं का समाधान निकालना था, इन बातचीतों में अब्बास अराघची ईरान की वार्ता टीम के प्रमुख सदस्यों में शामिल रहे। उन्होंने तकनीकी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कई दौर की बैठकों में वे ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए दिखाई दिए।

आखिरकार वर्ष 2015 में Joint Comprehensive Plan of Action (JCPOA) पर सहमति बनी। इस समझौते को उस समय वैशश्विक कूटनीति की बड़ी उपलब्धियों में से एक माना गया, हालांकि बाद के वर्षों में अमेरिका के समझौते से बाहर निकलने और नए प्रतिबंध लगाए जाने के बाद स्थिति बदल गई। इसके बावजूद अब्बास अराघची लगातार वार्ताओं में सक्रिय रहे और विभिन्न देशों के साथ बातचीत जारी रखी, यही अनुभव उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक कुशल और धैर्यवान वार्ताकार के रूप में स्थापित करता है।

उप विदेश मंत्री के रूप में जिम्मेदारियां

परमाणु वार्ताओं में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें ईरान का उप विदेश मंत्री (Deputy Foreign Minister) बनाया गया, इस पद पर रहते हुए वे केवल परमाणु वार्ताओं तक सीमित नहीं रहे बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा, यूरोपीय देशों के साथ संबंध, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, ऊर्जा नीति और पश्चिम एशिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों को भी संभालते रहे, वे अनेक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, संयुक्त बैठकों और द्विपक्षीय वार्ताओं में ईरान का प्रतिनिधित्व करते रहे। उनकी कार्यशैली को अक्सर तथ्यों पर आधारित, संयमित और कूटनीतिक माना गया।

विदेश मंत्री बनने तक का सफर

विदेश मंत्री बनने तक का सफर

वर्ष 2024 ईरान की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण रहा। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के पदभार संभालने के बाद नई सरकार का गठन हुआ और विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी अब्बास अराघची को सौंपी गई, अगस्त 2024 में संसद की मंजूरी मिलने के बाद उन्होंने आधिकारिक रूप से ईरान के विदेश मंत्री का पद संभाला, विदेश मंत्री बनने के बाद उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां थीं। इनमें पश्चिम एशिया की बदलती सुरक्षा स्थिति, अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ संबंध, क्षेत्रीय तनाव, परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंध जैसे मुद्दे शामिल थे।

अपने शुरुआती कार्यकाल से ही उन्होंने कई देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की और ईरान की विदेश नीति को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय कूटनीतिक प्रयास शुरू किए, उनकी नियुक्ति को कई विश्लेषकों ने इसलिए भी महत्वपूर्ण माना क्योंकि उन्हें वर्षों का व्यावहारिक अनुभव था और वे पहले से ही अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं में सक्रिय भूमिका निभा चुके थे।

ईरान-अमेरिका संबंधों में अब्बास अराघची की भूमिका

ईरान और अमेरिका के संबंध पिछले कई दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं। परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया की राजनीति जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच लगातार मतभेद रहे हैं। ऐसे माहौल में अब्बास अराघची उन प्रमुख ईरानी अधिकारियों में शामिल रहे जिन्होंने कूटनीतिक वार्ताओं के माध्यम से समाधान तलाशने की कोशिश की।

उप विदेश मंत्री और बाद में विदेश मंत्री के रूप में उन्होंने कई मौकों पर यह कहा कि किसी भी समझौते के लिए दोनों पक्षों को अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करना होगा। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह भी दोहराया कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता को प्राथमिकता देता है।

अंतरराष्ट्रीय बैठकों में उनका रुख आमतौर पर स्पष्ट लेकिन कूटनीतिक रहा है। वे कई बार यह कह चुके हैं कि यदि वार्ता आपसी सम्मान और व्यावहारिक आधार पर हो, तो संवाद का रास्ता खुला रह सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दबाव और प्रतिबंधों के बीच स्थायी समाधान निकालना कठिन होता है।

इज़राइल-ईरान तनाव और क्षेत्रीय कूटनीति

इज़राइल-ईरान तनाव और क्षेत्रीय कूटनीति

विदेश मंत्री बनने के बाद अब्बास अराघची के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक पश्चिम एशिया की बदलती सुरक्षा स्थिति रही। इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, क्षेत्रीय संघर्षों और सुरक्षा संबंधी घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचा।

इस दौरान उन्होंने कई देशों के विदेश मंत्रियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। विभिन्न मंचों पर उन्होंने ईरान का आधिकारिक पक्ष रखा और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर सरकार की नीति स्पष्ट की, विदेश मंत्री के रूप में उनका कार्य केवल बयान देना नहीं था, बल्कि विभिन्न देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखना, कूटनीतिक वार्ताएं करना और संकट की स्थिति में संवाद के रास्ते खुले रखना भी उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा रहा।

भारत और अन्य देशों के साथ संबंध

भारत और ईरान के बीच लंबे समय से ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग महत्वपूर्ण माना जाता है, विदेश मंत्री बनने के बाद अब्बास अराघची ने भारत सहित एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के कई देशों के विदेश मंत्रियों से बातचीत की। इन बैठकों का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करना था।

ईरान की विदेश नीति में केवल पश्चिमी देशों के साथ संबंध ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि एशियाई देशों, पड़ोसी राष्ट्रों और बहुपक्षीय संगठनों के साथ सहयोग भी प्रमुख स्थान रखता है। अराघची इसी व्यापक रणनीति के तहत अलग-अलग देशों के साथ संवाद बनाए रखते हैं।

अब्बास अराघची की पत्नी और परिवार

अब्बास अराघची की पत्नी और परिवार

अब्बास अराघची के निजी जीवन के बारे में सार्वजनिक जानकारी अपेक्षाकृत सीमित है। उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों के अनुसार उनकी पहली पत्नी बहारेह अब्दोल्लाही (Bahareh Abdollahi) थीं। बाद में दोनों का तलाक हो गया। इसके बाद उन्होंने अरेज़ू अहमदवंद (Arezoo Ahmadvand) से विवाह किया, उनके बच्चों के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ईरान के कई वरिष्ठ राजनेताओं और अधिकारियों की तरह वे भी अपने पारिवारिक जीवन को मीडिया की सुर्खियों से दूर रखते हैं।

इंटरनेट पर उनके परिवार को लेकर कई दावे मिल सकते हैं, लेकिन अधिकांश की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती। इसलिए केवल वही जानकारी स्वीकार करना उचित है।

क्या अब्बास अराघची अभी जीवित हैं?

हाँ। उपलब्ध नवीनतम सार्वजनिक जानकारी के अनुसार अब्बास अराघची जीवित हैं और ईरान के विदेश मंत्री के रूप में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।

वे लगातार आधिकारिक बैठकों, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, द्विपक्षीय वार्ताओं और मीडिया बयानों में भाग लेते रहे हैं। हाल के समय में भी उनकी विभिन्न देशों के नेताओं और विदेश मंत्रियों के साथ मुलाकातें सार्वजनिक रूप से दर्ज की गई हैं, समय-समय पर सोशल मीडिया पर कई अफवाहें फैलती रहती हैं, लेकिन अब तक किसी भी विश्वसनीय या आधिकारिक स्रोत ने उनके निधन या गंभीर स्वास्थ्य संबंधी किसी ऐसी घटना की पुष्टि नहीं की है जिससे यह कहा जा सके कि वे सार्वजनिक जीवन से बाहर हो गए हैं, इसलिए यदि कोई पूछता है “Is Abbas Araghchi still alive?”तो उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर उत्तर हाँ है।

अब्बास अराघची का आधिकारिक X (पूर्व में Twitter) अकाउंट

अब्बास अराघची का आधिकारिक X (पूर्व में Twitter) अकाउंट

डिजिटल दौर में किसी भी वरिष्ठ राजनयिक के लिए सोशल मीडिया एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। अब्बास अराघची भी अपने आधिकारिक विचार, विदेश यात्राओं, कूटनीतिक बैठकों और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर प्रतिक्रिया साझा करने के लिए X (पूर्व में Twitter) का उपयोग करते हैं।

उनका आधिकारिक X हैंडल @araghchi है। इसी अकाउंट पर विदेश मंत्रालय से जुड़े बयान, अन्य देशों के नेताओं के साथ बैठकों की जानकारी और ईरान की विदेश नीति से जुड़े आधिकारिक संदेश प्रकाशित किए जाते हैं। इंटरनेट पर उनके नाम से कई अनौपचारिक या पैरोडी अकाउंट भी दिखाई देते हैं। इसलिए किसी भी पोस्ट या बयान को साझा करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह सत्यापित आधिकारिक अकाउंट से ही प्रकाशित हुआ हो।

अब्बास अराघची की नेट वर्थ

ईरानी सरकार, ईरान के विदेश मंत्रालय या किसी विश्वसनीय सार्वजनिक दस्तावेज़ में उनकी कुल संपत्ति (Net Worth) का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, कुछ वेबसाइटें उनकी नेट वर्थ 2-5 मिलियन डॉलर या इससे अधिक बताती हैं, लेकिन इन दावों के समर्थन में कोई आधिकारिक वित्तीय रिकॉर्ड या विश्वसनीय प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

अब्बास अराघची की प्रमुख उपलब्धियां

लगभग तीन दशकों से अधिक लंबे राजनयिक करियर में अब्बास अराघची ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं।

• ईरान के विदेश मंत्रालय में 1989 से लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाना।

• फिनलैंड और जापान में ईरान के राजदूत के रूप में सेवा देना।

• विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के रूप में कार्य करना।

• ईरान के उप विदेश मंत्री और मुख्य परमाणु वार्ताकार के रूप में अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं का नेतृत्व करना।

• 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) की वार्ताओं में प्रमुख भूमिका निभाना।

• अगस्त 2024 में ईरान के विदेश मंत्री नियुक्त होना।

• पश्चिम एशिया के जटिल भू-राजनीतिक माहौल में ईरान की विदेश नीति का नेतृत्व करना।

अब्बास अराघची से जुड़े रोचक तथ्य

अब्बास अराघची से जुड़े रोचक तथ्य

अब्बास अराघची के बारे में कुछ ऐसे तथ्य भी हैं जो उनके व्यक्तित्व और करियर को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं।

• उनका पूरा नाम सैयद अब्बास अराघची है।

• उनका जन्म 5 दिसंबर 1962 को तेहरान में हुआ।

• उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के दौरान IRGC में सेवा दी।

• वे धाराप्रवाह फ़ारसी के अलावा अंग्रेज़ी और कूटनीतिक स्तर पर अन्य भाषाओं के प्रयोग के लिए भी जाने जाते हैं।

• उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के University of Kent से पीएचडी की है।

• वे कूटनीति में शांत, संयमित और तथ्यों पर आधारित बातचीत के लिए पहचाने जाते हैं।

• अंतरराष्ट्रीय मीडिया उन्हें कई बार ईरान के सबसे अनुभवी परमाणु वार्ताकारों में शामिल कर चुका है।

सैयद अब्बास अराघची आधुनिक ईरान के सबसे अनुभवी और प्रभावशाली राजनयिकों में गिने जाते हैं। लगभग तीन दशक से अधिक समय तक विदेश मंत्रालय में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने के बाद उन्होंने 2024 में विदेश मंत्री का पद संभाला। परमाणु वार्ताओं से लेकर क्षेत्रीय कूटनीति तक, उनकी भूमिका ईरान की विदेश नीति के महत्वपूर्ण अध्यायों से जुड़ी रही है।

Author

  • मैं अनामिका गुप्ता, एक पत्रकार हूँ। पिछले 5 वर्षों में मैंने ब्रेकिंग, राजनीति, अपराध, सामाजिक, मनोरंजन, टेक्नोलोजी, विज्ञान, वित्त एवं निवेश और प्रौद्योगिकी मुद्दों और फीचर स्टोरीज़, हर विधा में काम किया है। जटिल मामलों को सरल भाषा में समझाना मेरी कला है और निष्पक्ष रिपोर्टिंग मेरी पहचान। इस वेबसाइट पर मैं पाठकों तक सच्चाई पहुँचाने का काम करती हूँ।

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