ईरान-अमेरिका संघर्ष: नए हमले, हार्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव और आगे का रास्ता

फरवरी 2026 में शुरू हुआ ईरान और अमेरिका के बीच का संघर्ष अब एक नए और खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुका है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए। इस हमले ने पूरे मध्य पूर्व में आग लगा दी और ईरान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी ठिकानों और इज़राइल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

अप्रैल 2026 में एक अंतरिम युद्धविराम हुआ, जिसके बाद जून 2026 में पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक समझौता हुआ। इस समझौते के तहत अमेरिका ने ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी हटाई और हार्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति बनी। हालाँकि, यह शांति बहुत लंबी नहीं चली। जुलाई 2026 की शुरुआत में एक बार फिर हमले शुरू हो गए।

अब स्थिति यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 14 जुलाई 2026 को एक बार फिर ईरान के बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर दी है। अमेरिकी सेना ईरान के तटीय रक्षा प्रणालियों, मिसाइलों और ड्रोन ठिकानों पर लगातार हमले कर रही है। वहीं, ईरान ने भी कुवैत, बहरीन, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी ठिकानों और सहयोगियों को निशाना बनाया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिकी आक्रामकता समाप्त नहीं होती, वह हार्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद रखेगा।

इस संघर्ष ने एक बार फिर वैश्विक तेल बाजार को हिलाकर रख दिया है। ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत एक महीने के उच्चतम स्तर 84 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि अगर यह युद्ध जारी रहा तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर धकेल सकता है। आइए, इस जटिल स्थिति, दोनों पक्षों की सैन्य ताकत, हार्मुज़ जलडमरूमध्य के महत्व और इस संघर्ष के संभावित भविष्य पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

हार्मुज़ जलडमरूमध्य: संघर्ष का केंद्र

हार्मुज़ जलडमरूमध्य: संघर्ष का केंद्र और भू-रणनीतिक हथियार

हार्मुज़ जलडमरूमध्य, ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकीर्ण समुद्री मार्ग है, जो दुनिया के कुल कच्चे तेल के व्यापार का लगभग एक-पांचवां हिस्सा और वैश्विक तरलीकृत प्राकृतिक गैस के व्यापार का 20% हिस्सा संभालता है। इसी कारण यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की जीवन रेखा है, और इस पर नियंत्रण की जंग ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान ने अपनी भौगोलिक स्थिति को एक रणनीतिक हथियार में बदल दिया है। कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के वरिष्ठ फेलो आरोन डेविड मिलर का कहना है कि ईरान ने हार्मुज़ जलडमरूमध्य को एक “एटीएम” में बदल दिया है और इसका उपयोग खाड़ी देशों पर अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए कर रहा है। ईरान के लिए यह जलडमरूमध्य सिर्फ एक समुद्री मार्ग नहीं, बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाने का सबसे प्रभावी हथियार है।

जून 2026 में हुए समझौते में एक बड़ी अस्पष्टता रह गई थी। समझौते में कहा गया कि ईरान हार्मुज़ जलडमरूमध्य से व्यापारिक जहाजों के सुरक्षित मार्ग की गारंटी देगा, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस रणनीतिक मार्ग पर नियंत्रण किसके पास होगा। ईरान का तर्क है कि इसका मतलब है कि उसकी जलडमरूमध्य के प्रबंधन में भूमिका है, जबकि अमेरिका और खाड़ी देश इसे केवल नेविगेशन की स्वतंत्रता की गारंटी के रूप में देखते हैं। चैथम हाउस के वरिष्ठ फेलो थॉमस जूनो ने कहा कि समझौते में अस्पष्टता के कारण अलग-अलग व्याख्याएँ हुई हैं और हिंसा का फिर से भड़कना लगभग अपरिहार्य हो गया है।

ईरान इस अस्पष्टता का फायदा उठाकर जलडमरूमध्य में अपनी उपस्थिति और नियंत्रण बनाए हुए है। ईरान ने ओमान के साथ मिलकर हार्मुज़ के माध्यम से यातायात के प्रबंधन के लिए एक तंत्र स्थापित करने की इच्छा जताई है, और साथ ही चेतावनी दी है कि वह ईरान के खिलाफ हमलों का समर्थन करने वाले किसी भी देश के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करेगा।

ईरान की सैन्य ताकत: कितनी बची है?

ईरान की सैन्य ताकत: कितनी बची है और क्या है उसके पास?

लगातार अमेरिकी और इज़राइली हमलों के बावजूद, ईरान के पास अभी भी काफी सैन्य क्षमता बची हुई है। अप्रैल 2026 में युद्धविराम से पहले, अमेरिका ने लगभग 16,000 में से 13,000 ईरानी ठिकानों पर हमले किए थे। इन हमलों में ईरान की कमान और नियंत्रण प्रणाली, मिसाइल साइटों, ड्रोन ठिकानों और रडार प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया।

हालाँकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की अधिकांश सैन्य क्षमता बरकरार है। नाटो के पूर्व निदेशक विलियम अल्बर्क ने कहा कि अमेरिका ने बड़े और आकर्षक ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन हजारों, या यहाँ तक कि दसियों हजारों अतिरिक्त ठिकाने बचे हैं। उनके अनुसार, ईरान की सैन्य क्षमता का 60-80% हिस्सा नष्ट हो गया है, लेकिन खाड़ी में जहाजों पर छोटी क्रूज मिसाइलें दागने की उसकी क्षमता बरकरार है।

ईरान के पास हजारों छोटे और तेज़ गति वाले नौसैनिक जहाज हैं, जो हार्मुज़ जलडमरूमध्य के किनारे सैकड़ों आश्रयों में तैनात हैं। इसके अलावा, ईरान के पास मोबाइल तटीय एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम हैं, जो लगभग पूरे जलडमरूमध्य को कवर कर सकते हैं। ईरान के पास 150-300 किमी की रेंज वाली बैलिस्टिक मिसाइलें और “शाहेद” प्रकार के कामिकेज़ ड्रोन भी हैं, जो इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम और रियल-टाइम संचार से लैस हैं।

ईरान ने अप्रैल 2026 में शुरू हुए युद्धविराम के दौरान अपने ड्रोन उत्पादन को फिर से शुरू कर दिया था और उसकी सेना अनुमान से कहीं अधिक तेज़ी से पुनर्निर्माण कर रही है। रूसी विशेषज्ञ किरिल सेमेनोव का कहना है कि ईरान की सैन्य क्षमता को नष्ट करना संभव नहीं है, क्योंकि सैन्य उत्पादन जारी है और यहाँ तक कि अमेरिकियों ने जो नष्ट किया है, उसकी भरपाई कर ली गई है। हालाँकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि ईरान ने अपनी 84% हथियार उत्पादन क्षमता खो दी है।

ईरान की सेना कमजोर तो हुई है, लेकिन अधिक अनुभवी भी हुई है। उसने युद्ध के दौरान अमेरिकी विमानों को मार गिराने में सफलता पाई है, जो उसके बढ़ते अनुभव को दर्शाता है। हार्मुज़ जलडमरूमध्य को नियंत्रित करने के लिए ईरान को उच्च तकनीक वाले हथियारों की भी आवश्यकता नहीं है; उसके पास मौजूद ड्रोन ही नागरिक जहाजों को रोकने के लिए पर्याप्त हैं।

अमेरिका और इज़राइल की रणनीति

अमेरिका और इज़राइल की रणनीति: नए हमले और धमकियाँ

अमेरिका ने हाल के दिनों में ईरान पर अपने हमलों की तीव्रता को काफी बढ़ा दिया है। 14 जुलाई 2026 को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बंदर अब्बास, बुशहर, चाबहार, जास्क, कोनारक और अबू मूसा द्वीप में ईरानी तटीय रक्षा प्रणालियों, मिसाइलों, ड्रोन और नौसैनिक सुविधाओं पर पाँच घंटे तक हमले किए। इन हमलों में पहली बार अमेरिका ने मानवरहित कामिकेज़ पनडुब्बियों का इस्तेमाल किया, जिन्होंने बंदर अब्बास के नौसैनिक अड्डे पर ईरानी पनडुब्बी और युद्धपोत रखरखाव सुविधा को निशाना बनाया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक वे खुद इसे रोकने का फैसला नहीं कर लेते। उन्होंने धमकी दी है कि अगर ईरान बातचीत की मेज पर नहीं आया, तो अगले हफ्ते अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाएगा। ट्रंप ने कहा, हम उनके सभी बिजली संयंत्रों को नष्ट कर देंगे… हम उनके सभी पुलों को नष्ट कर देंगे, जब तक कि वे बातचीत की मेज पर नहीं आते।

ट्रंप ने यह भी घोषणा की है कि अमेरिका हार्मुज़ जलडमरूमध्य के “गार्जियन” के रूप में कार्य करेगा, और उन्होंने शुरू में जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी कार्गो पर 20% शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा था। हालाँकि, बाद में उन्होंने इस शुल्क प्रस्ताव को वापस ले लिया और इसके स्थान पर खाड़ी देशों के साथ निवेश समझौतों की बात कही।

इज़राइल ने भी इस संघर्ष में सक्रिय रुख अपनाया हुआ है। 28 फरवरी 2026 को इज़राइली वायु सेना ने ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाते हुए अभूतपूर्व हमले किए, जिसमें सुप्रीम लीडर खामेनेई और कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए। इज़राइल ने चेतावनी दी है कि वह ईरान के खिलाफ अपना सैन्य अभियान फिर से शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई

ईरान की जवाबी कार्रवाई और प्रतिरोध की रणनीति

ईरान ने अमेरिकी हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया है। 14 जुलाई 2026 को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। IRGC ने कुवैत में अमेरिकी सेना के संचार प्रणालियों, ईंधन डिपो, पैट्रियट वायु रक्षा प्रणाली, नियंत्रण टॉवर और गोला-बारूद डिपो को निशाना बनाया।

ईरान ने हार्मुज़ जलडमरूमध्य में दो संयुक्त अरब अमीरात के तेल टैंकरों (मोम्बासा और अल बहिया) पर क्रूज मिसाइलों से हमला किया, जिसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और आठ अन्य घायल हो गए। IRGC ने दावा किया कि टैंकरों ने बार-बार चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया और उन्हें निशाना बनाया गया। ईरान ने बहरीन में भी मिसाइल अलर्ट जारी किए, जिससे नागरिकों को आश्रय लेने के लिए कहा गया।

ईरान की रणनीति स्पष्ट है – वह अमेरिका को एक लंबे और महंगे युद्ध में उलझाना चाहता है। ईरानी उप विदेश मंत्री काज़िम घरीबाबादी ने कहा है कि अगर अमेरिका सोचता है कि सैन्य कार्रवाई और आर्थिक नाकाबंदी से ईरान बातचीत के लिए मजबूर हो जाएगा, तो वह गलती कर रहा है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिकी दबाव में बातचीत के लिए नहीं बैठेगा और हार्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता का पूरा अधिकार जताता है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार का सहयोग ईरान की संप्रभुता के खिलाफ “युद्ध” माना जाएगा, और यदि संघर्ष फैलता है तो युद्ध की लपटें क्षेत्र के सभी देशों को अपनी चपेट में ले लेंगी।

युद्ध का वैश्विक प्रभाव: तेल की कीमतें

युद्ध का वैश्विक प्रभाव: तेल की कीमतें और अंतरराष्ट्रीय चिंताएँ

इस संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। जून 2026 में युद्धविराम के बाद हार्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल का प्रवाह तेजी से बढ़ा था, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमत जुलाई 2026 की शुरुआत में लगभग 68 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गई थी। लेकिन 7-8 जुलाई को युद्धविराम के उल्लंघन के बाद कीमतें फिर से बढ़कर लगभग 77 डॉलर प्रति बैरल हो गईं। अमेरिकी नाकाबंदी की बहाली के बाद तेल की कीमतों में 9% से अधिक की वृद्धि हुई।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी है कि हार्मुज़ जलडमरूमध्य में ताज़ा झड़पों ने वैश्विक तेल बाजारों पर अनिश्चितता को फिर से बढ़ा दिया है। IEA के अनुसार, जून 2026 में वैश्विक तेल आपूर्ति में 4.1 मिलियन बैरल प्रति दिन की वृद्धि हुई थी, लेकिन यह अभी भी युद्ध-पूर्व स्तर से 9.4 मिलियन बैरल प्रति दिन कम है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी नवीनतम विश्व आर्थिक आउटलुक रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि यह युद्ध अभूतपूर्व पैमाने पर ऊर्जा संकट पैदा कर सकता है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर धकेल सकता है। IMF के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गौरिनचास ने कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था को एक और बड़ा झटका लग रहा है, खासकर यदि संघर्ष जारी रहता है।

IMF के अनुसार, सबसे खराब स्थिति में, यदि तेल की कीमतें इस साल 110 डॉलर प्रति बैरल और अगले साल 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच जाती हैं, तो वैश्विक विकास दर गिरकर 2% पर आ सकती है, जो वैश्विक मंदी के करीब है। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस क्षेत्रीय उग्रता पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

भविष्य की संभावनाएँ: क्या युद्ध और बढ़ेगा?

भविष्य की संभावनाएँ: क्या युद्ध और बढ़ेगा या बातचीत होगी?

मौजूदा स्थिति को देखते हुए, यह कहना मुश्किल है कि यह संघर्ष कब और कैसे समाप्त होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वे ईरान पर हमले तब तक जारी रखेंगे जब तक मैं यह नहीं कह देता कि बहुत हो गया। दूसरी ओर, ईरान ने बातचीत से इनकार कर दिया है और कहा है कि वह अमेरिकी आक्रामकता का मुंहतोड़ जवाब देगा। हालाँकि, ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि वे समझौते के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, हाँ, मुझे लगता है कि एक समझौता संभव है। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान को बातचीत की मेज पर आना होगा, अन्यथा उनके पास कुछ भी नहीं बचेगा।

ईरान ने कतर, पाकिस्तान और ओमान के मध्यस्थों के साथ बातचीत जारी रखी है, लेकिन उसका कहना है कि जून 2026 का समझौता अब संकट में है और वह तब तक अपने दायित्वों को नज़रअंदाज़ करेगा जब तक अमेरिका ऐसा नहीं करता।

विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पक्ष अपनी शर्तों पर गतिरोध को समाप्त करना चाहते हैं, और उन्हें ऐसा करना मुश्किल हो रहा है, इसलिए हमलों का पैमाना बढ़ रहा है। अटलांटिक काउंसिल के पूर्व पेंटागन अधिकारी एलेक्स प्लिट्सस ने कहा कि ईरान की सैन्य क्षमता का पुनर्निर्माण अनुमान से कहीं अधिक तेज़ी से हो रहा है। इसका मतलब है कि यह संघर्ष लंबा खिंच सकता है, संयुक्त अरब अमीरात ने भी ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है, जिससे यह संघर्ष और भी जटिल हो सकता है। UAE के रक्षा मंत्रालय ने कहा, UAE इस उग्रता का जवाब देने और अपने क्षेत्र, नागरिकों और निवासियों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करने का पूरा अधिकार सुरक्षित रखता है।

ईरान-अमेरिका संघर्ष वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। हार्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की यह जंग न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। अमेरिका ईरान की सैन्य क्षमता को नष्ट करना चाहता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह संभव नहीं है। ईरान ने अपनी भौगोलिक स्थिति को एक हथियार में बदल लिया है और वह अपनी प्रतिरोध की नीति पर कायम है।

युद्धविराम और बातचीत के सभी प्रयास अब तक विफल होते दिख रहे हैं, और हाल के दिनों में हुए हमलों ने इस संघर्ष को और भी खतरनाक बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कोई राजनयिक समाधान निकल पाता है या यह संघर्ष और भी विनाशकारी रूप ले लेता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की निगाहें मध्य पूर्व पर टिकी हैं, जहां दो बड़ी ताकतें आमने-सामने हैं और उनके बीच का तनाव हर गुजरते दिन के साथ बढ़ता जा रहा है।

Author

  • रश्मि शर्मा, पत्रकार व लेखिका। 8+ वर्षों का अनुभव।
    विशेषज्ञता: नेशनल और अंतरराष्ट्रीय राजनीति, क्रिकेट-ओलंपिक, शेयर बाजार, AI-टेक, विज्ञान, स्वास्थ्य नीति व अर्थव्यवस्था, मनोरंजन।
    जटिल खबरों को सरल भाषा में समझाना मेरी पहचान।