मद्रास हाईकोर्ट ने थलापति विजय की आगामी फिल्म ‘जन नायकन’ के ऑनलाइन लीक मामले में दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने अदालत को बताया कि फिल्म का पायरेटेड वर्जन अब तक लगभग 1.2 करोड़ बार देखा जा चुका है। यह फिल्म अभी तक आधिकारिक रूप से रिलीज नहीं हुई है और न ही इसे सेंसर बोर्ड से अंतिम मंजूरी मिली है।
मामले की पृष्ठभूमि
सुपरस्टार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। यह मामला तब शुरू हुआ जब केवीएन प्रोडक्शंस ने फिल्म के ऑनलाइन लीक होने की शिकायत दर्ज कराई। 9 अप्रैल को फिल्म की कुछ क्लिप्स और बाद में पूरी फिल्म इंटरनेट पर लीक हो गई थी, शिकायत के बाद चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और इस पूरे पायरेसी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 21 लोगों पर मामला दर्ज किया।
अदालत में पुलिस की दलीलें
हाल ही में मद्रास हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सी. कुमारप्पन के समक्ष सुनवाई के दौरान, चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने मामले की गंभीरता से अवगत कराया। पुलिस ने अदालत को बताया कि ‘जन नायकन’ का पायरेटेड वर्जन अब तक करीब 1.2 करोड़ (12 मिलियन) बार देखा जा चुका है, पुलिस ने यह भी बताया कि इस नेटवर्क के पीछे काम करने वालों ने पहले फिल्म की डिजिटल फाइलें हासिल कीं और फिर उन्हें अलग-अलग माध्यमों से जोड़कर एक पूरा पायरेटेड वर्जन तैयार किया, जिसे बाद में इंटरनेट पर अपलोड कर दिया गया।
हाईकोर्ट का फैसला और आगे की जांच
गिरफ्तार आरोपियों में रजनी और जयप्रकाश ने मद्रास हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। सरकारी पक्ष ने अदालत में दलील दी कि इस मामले में अभी जांच पूरी नहीं हुई है और कई अहम सबूतों की जांच बाकी है, जिसके आधार पर उन्होंने आरोपियों को जमानत देने का विरोध किया, अदालत ने पुलिस की इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं, इस मामले में अभी भी कुछ आरोपी फरार बताए जा रहे हैं, और पुलिस जांच जारी है, इससे पहले, प्रोडक्शन हाउस ने अवैध स्ट्रीमिंग रोकने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद कोर्ट ने इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को ऐसी वेबसाइट्स और लिंक को ब्लॉक करने के निर्देश दिए थे।

