रूस में हिंदुओं की संख्या कितनी है? जनसंख्या, इतिहास और वर्तमान स्थिति

क्या आप जानते हैं कि रूस में हिंदू धर्म का इतिहास 500 साल से भी अधिक पुराना है? साइबेरिया की बर्फीली वादियों में -40°C की कड़ाके की ठंड में भी “हरे कृष्ण” के जयकारे गूंजते हैं और लोग योग-ध्यान में लीन रहते हैं। इस लेख में हम रूस में हिंदुओं की संख्या, उनके इतिहास, वहाँ हिंदू धर्म की वर्तमान स्थिति, प्रमुख संगठनों की गतिविधियों, तथा साइबेरिया के अनोखे आध्यात्मिक गाँव के बारे में विस्तार से जानेंगे।

रूस में हिंदुओं की जनसंख्या: क्या कहते हैं उपलब्ध आँकड़े?

रूस में हिंदुओं की सटीक संख्या ज्ञात करना अत्यंत कठिन है। इसका मुख्य कारण यह है कि रूस में धार्मिक आधार पर जनसंख्या का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं रखा जाता। रूसी कानून नागरिकों से उनकी धार्मिक मान्यताओं के बारे में बयान देने की माँग करने पर रोक लगाता है, जिससे आधिकारिक धार्मिक जनगणना संभव नहीं हो पाती है।

विभिन्न स्रोतों में हिंदुओं की संख्या के लिए अलग-अलग अनुमान दिए गए हैं:

लगभग 140,000 (0.1%) – 2012 के अखिल रूसी जनसंख्या सर्वेक्षण “एरिना” के अनुसार, रूस में 140,000 हिंदू थे, जो कुल जनसंख्या का 0.1% है। 2010 के एक धार्मिक सर्वेक्षण में यह संख्या 240,000 (0.1%) बताई गई थी, जो इंगित करता है कि विभिन्न सर्वेक्षण विधियों के कारण आँकड़ों में अंतर हो सकता है।

ISKCON के अनुयायी – अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (ISKCON) के अनुयायियों की संख्या अकेले लगभग 100,000 होने का अनुमान है। रूस के 20 से अधिक शहरों में ISKCON के अनुयायी सक्रिय हैं। विभिन्न अनुमानों के अनुसार, ISKCON के अनुयायियों की संख्या 15,000 से 250,000 के बीच बताई जाती है, जो इस बात को दर्शाता है कि सटीक आँकड़ा ज्ञात करना कितना कठिन है।

1 से 1.5 लाख – कुछ भारतीय मीडिया स्रोतों में यह अनुमान दिया गया है कि रूस में हिंदुओं की संख्या 1 से 1.5 लाख के बीच हो सकती है। इस अनुमान में नेपाल और अन्य देशों के हिंदू प्रवासी भी शामिल हो सकते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात – रूस में हिंदुओं का अधिकांश हिस्सा जातीय रूप से रूसी है, भारतीय प्रवासी नहीं। यह दर्शाता है कि हिंदू धर्म ने रूसी समाज में अपनी एक अलग पहचान बना ली है और स्थानीय लोग भी इस धर्म को अपना रहे हैं।

यह स्पष्ट है कि ये सभी अनुमान हैं, आधिकारिक आँकड़े नहीं। रूस के विभिन्न शहरों में हिंदू समुदाय के लोग रहते हैं। मॉस्को, सेंट पीटर्सबर्ग, अस्त्रखान, और विशेष रूप से साइबेरिया के ओम्स्क क्षेत्र में स्थित ओकुनेवो गाँव में हिंदू संस्कृति की स्पष्ट उपस्थिति देखने को मिलती है।

रूस में हिंदू धर्म का इतिहास

रूस में हिंदू धर्म का इतिहास

रूस में हिंदू धर्म का इतिहास 16वीं शताब्दी से शुरू होता है, जब भारतीय व्यापारी व्यापार के सिलसिले में अस्त्रखान पहुँचे। ये ज्यादातर पंजाब के मुल्तान क्षेत्र से आए हिंदू व्यापारी थे, जो वैश्य या बनिया जाति से संबंधित थे। वर्ष 1556 में रूस द्वारा अस्त्रखान पर कब्जा करने के बाद, ये भारतीय व्यापारी मॉस्को राज्य के नागरिक बन गए। 17वीं शताब्दी में अस्त्रखान में भारतीय व्यापारियों के लिए “इंडियन कोर्ट” नामक विशेष व्यापारिक स्थल बनाया गया। यहाँ एक हिंदू मंदिर भी था, जिसे स्थानीय भाषा में “कुमिरनित्सा” कहा जाता था, जहाँ भगवान विष्णु और कृष्ण की पूजा होती थी।

18वीं शताब्दी में रूसी सम्राट पीटर द ग्रेट ने अस्त्रखान के हिंदू व्यापारियों से मुलाकात की और उनके अनुरोध पर रूसी सीनेट को हिंदू धार्मिक मान्यताओं की सुरक्षा के लिए कानून बनाने को कहा। वर्ष 1722 में रूसी सीनेट ने यह कानून पारित किया, जो किसी विदेशी धर्म की सुरक्षा के लिए रूस में पहला कानून था, 19वीं शताब्दी तक यह भारतीय समुदाय दक्षिणी रूस के व्यापारिक जगत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा, हालाँकि समय के साथ वे प्रत्यक्ष व्यापार से बैंकिंग की ओर बढ़ गए।

ISKCON: आधुनिक रूस में हिंदू धर्म का प्रमुख चेहरा

• रूस में हिंदू धर्म का आधुनिक प्रसार मुख्य रूप से अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (ISKCON) के कारण हुआ है।

1971 में ISKCON के संस्थापक ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने रूस का दौरा किया और पहले रूसी शिष्य को दीक्षा दी।

• सोवियत काल में ISKCON को अत्यंत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उस समय सोवियत कानून के तहत अनधिकृत धार्मिक गतिविधियाँ अवैध थीं। प्रारंभिक अनुयायियों को वैदिक ग्रंथों के प्रचार के लिए कारावास और मानसिक अस्पतालों में भर्ती करने की सजा भुगतनी पड़ी।

1988 में पेरेस्त्रोइका के बाद ISKCON को पहली बार आधिकारिक पंजीकरण मिला। यह सोवियत संघ में पंजीकृत पहला नया धार्मिक संगठन था। वर्ष 1998 में ISKCON को 1997 के धार्मिक कानून के तहत पुनः पंजीकृत किया गया। उस समय रूस में 120 कृष्ण समुदाय थे, और 2001 के रूसी न्याय मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार 106 आधिकारिक रूप से पंजीकृत कृष्ण समूह थे।

वर्तमान स्थिति: ISKCON की रूस में 300 से अधिक स्थानीय शाखाएँ हैं। मॉस्को में ISKCON का एक मंदिर है, जिसमें अकेले 10,000 अनुयायी होने का दावा है, और यहाँ “भक्तिवेदांत गुरुकुल” नामक एक मान्यता प्राप्त स्कूल भी संचालित होता है।

वर्ष 2004 में मॉस्को के मेयर ने ISKCON को मॉस्को में एक हिंदू मंदिर और वैदिक केंद्र के निर्माण के लिए 1.05 हेक्टेयर भूमि आवंटित की थी। हालाँकि, बाद में रूढ़िवादी चर्च के विरोध के कारण यह योजना विफल हो गई और जमीन वापस ले ली गई।

रूसी ठंड के अनुकूल, यहाँ की रथ यात्रा प्रक्रियाएँ सामुदायिक भक्ति का एक विशेष रूप हैं, जहाँ भक्त कड़ाके की ठंड में भी बड़े उत्साह के साथ भाग लेते हैं।

रूस में हिंदू धर्म के अन्य संगठन

रूस में हिंदू धर्म के अन्य संगठन

ISKCON के अलावा, रूस में कई अन्य हिंदू संगठन सक्रिय हैं:

ब्रह्मा कुमारी – रूस में 20 केंद्र हैं, जहाँ राजयोग ध्यान और आध्यात्मिक शिक्षा दी जाती है।

रामकृष्ण मिशन – मॉस्को में एक केंद्र है, जो स्वामी विवेकानंद के विचारों का प्रचार करता है।

आनंद मार्ग – बरनौल शहर में एक केंद्र है, जो योग और ध्यान पर केंद्रित है।

तंत्र संघ – मॉस्को और निज़नी नोवगोरोड में पंजीकृत शाखाएँ हैं।

अन्य संगठन – वर्ष 2005 तक, रूसी संघीय पंजीकरण सेवा ने 79 हिंदू समूहों को दर्ज किया था, जिनमें ISKCON Revival Movement, Science of Identity Foundation, Sri Chaitanya Saraswat Math, Sri Chaitanya Gaudiya Math, Sri Krishna Chaitanya Mission, Sri Gopinatha Gaudiya Math, और International Pure Bhakti Yoga Society शामिल हैं।

ओकुनेवो: साइबेरिया का आध्यात्मिक गाँव

साइबेरिया के ओम्स्क क्षेत्र में स्थित ओकुनेवो गाँव रूस में हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति की उपस्थिति का एक अनोखा उदाहरण है। यह गाँव तारा नदी के किनारे ओम्स्क शहर से 240 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। यहाँ -40°C की कड़ाके की ठंड में भी “हरे कृष्ण” के जयकारे, भजन-कीर्तन, योग और आध्यात्मिक सभाएँ होती हैं।

हालाँकि, ओकुनेवो को अक्सर “रूस का हिंदू गाँव” या “साइबेरिया में मिनी इंडिया” कहा जाता है, लेकिन यह पूरी तरह से हिंदू बस्ती नहीं है। सत्य यह है कि यहाँ विभिन्न आध्यात्मिक पृष्ठभूमि के लोग रहते हैं। इस गाँव में रूढ़िवादी ईसाई, रॉडनोवरी (स्लाव मूर्तिपूजा), यंगलिज़्म, रोएरिचिज़्म और बाबाजीवाद (शैव धर्म की एक शाखा) जैसे विभिन्न धर्मों और आध्यात्मिक परंपराओं के अनुयायी रहते हैं।

1991 में लिथुआनियाई मूल की अमेरिकी नागरिक रस्मा रोज़िटिस (आध्यात्मिक नाम राधानी) ने इस स्थान को “हनुमान का प्राचीन मंदिर” होने का दावा करते हुए यहाँ बाबाजी आश्रम (ओमकार शिव धाम) की स्थापना की। उनके अनुसार, उनके गुरु मुनिराज ने उन्हें साइबेरिया में वह स्थान खोजने को कहा था जहाँ हनुमान का मंदिर स्थित था। रोज़िटिस ने ओम्स्क क्षेत्र को इसलिए चुना क्योंकि “ओम्स्क” नाम पवित्र “ओम” अक्षर से मेल खाता है, और तारा नदी का नाम भारतीय देवी तारा से संबंधित है।

ओकुनेवो में मौजूद धार्मिक स्थल:

• बाबाजी आश्रम (ओमकार शिव धाम) – 1995 में स्थापित, जिसमें दो मंदिर हॉल, बगीचे, आवासीय और भोजन भवन हैं

• ISKCON का कृष्ण मंदिर

• “ओमकार” – एक समन्वय स्थल जहाँ रूढ़िवादी चैपल, हिंदू धूनी वेदी और रॉडनोवर वेदी स्थित हैं

• रॉडनोवर अनुष्ठान स्थल – देवी तारा की मूर्ति के साथ

• रूढ़िवादी चर्च (पवित्र आत्मा अवतरण चर्च) – रूसी रूढ़िवादी चर्च द्वारा अन्य धार्मिक प्रभावों का मुकाबला करने के लिए निर्मित

हिंदू और वैदिक प्रभाव यहाँ 1990 के दशक से अधिक दिखाई देने लगे हैं। यह गाँव आज “शक्ति स्थल” (place of power) के रूप में जाना जाता है और आध्यात्मिक पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यह दिखाता है कि कैसे भारतीय आध्यात्मिक विचार दुनिया के सबसे दूरस्थ और ठंडे क्षेत्रों तक पहुँच सकते हैं।

रूस में धार्मिक कानून

रूस में धार्मिक कानून और हिंदू समुदाय

रूस का संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है। हालाँकि, 1997 का “धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संगठनों पर कानून” कुछ धर्मों को रूस की “आध्यात्मिक विरासत” का हिस्सा मानता है। इस कानून के तहत केवल रूसी रूढ़िवादी चर्च, इस्लाम, बौद्ध धर्म और यहूदी धर्म को “पारंपरिक धर्म” का दर्जा प्राप्त है। ISKCON को 1988 और 1998 दोनों में आधिकारिक पंजीकरण प्राप्त हुआ है, जिससे यह रूस में कानूनी रूप से संचालित हो सकता है। रूसी कानून दाह संस्कार (cremation) और पूजा-अर्चना की अनुमति देता है।

हालाँकि, रूसी रूढ़िवादी चर्च के कुछ वर्गों ने ISKCON को “खतरनाक” धार्मिक प्रभाव बताते हुए आलोचना की है। 2001 में मॉस्को रूढ़िवादी पितृसत्ता ने ISKCON को एक “खतरनाक” धार्मिक प्रभाव बताया था। 2005 में, मॉस्को के मेयर ने ISKCON को दी गई जमीन वापस ले ली और आर्कबिशप निकॉन ने भगवान कृष्ण को “दुष्ट दानव” बताते हुए एक विवादास्पद पत्र लिखा। हालाँकि, इसके बावजूद ISKCON “अधिकांशतः” स्वतंत्र रूप से कार्य करता है। ISKCON रूस के प्रमुख भक्ति विज्ञान गोस्वामी (वादिम तुनायेव) के अनुसार, हाल के वर्षों में “विशेष रूप से सरकार से” कोई विशेष समस्या नहीं रही है और उनकी स्थिति “अधिक या कम स्वीकृति” वाली है।

रूस में योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति का प्रभाव

रूस में हिंदू धर्म का प्रभाव केवल धार्मिक अनुयायियों तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ दशकों में योग, आयुर्वेद, ध्यान और भारतीय दर्शन रूसी समाज में काफी लोकप्रिय हुए हैं। यह भारतीय संस्कृति और दर्शन के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है, हालाँकि इन गतिविधियों में रुचि रखने वालों को सीधे तौर पर हिंदू धर्म के अनुयायी नहीं माना जा सकता।

भगवद गीता, उपनिषद और अन्य वैदिक ग्रंथों के रूसी अनुवाद उपलब्ध हैं। ओकुनेवो गाँव में -40°C की ठंड में होने वाली योग सभाएँ और भजन-कीर्तन इस बात का प्रमाण हैं कि भारतीय आध्यात्मिक परंपराएँ रूसी धरती पर किस प्रकार जीवित हैं। रूस में रहने वाले भारतीय प्रवासी और हिंदू संगठन सांस्कृतिक कार्यक्रमों, त्योहार समारोहों और भारतीय खाना पकाने की कार्यशालाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देते हैं।

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