केरल के कासरगोड जिले में इंसानियत की एक मिसाल देखने को मिली है। यहां एक मुस्लिम महिला पंचायत सदस्य ने एक ऐसे हिंदू बुजुर्ग का अंतिम संस्कार कराया, जिसके अपने परिजनों ने ही शव लेने से मना कर दिया था। इस पूरे मामले की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं, जिसके बाद लोग इस महिला के कदम की तारीफ कर रहे हैं।
कैंसर से जूझ रहे थे बुजुर्ग
मृतक बुजुर्ग का नाम नारायणन बताया जा रहा है और वह 64 साल के थे। वह मंजेश्वरम के चिग्रुपडावु इलाके में रहते थे। करीब एक महीने पहले उन्हें कैंसर की बीमारी ने घेर लिया था। इसके बाद से वह कोझिकोड के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे थे। हालांकि, बीमारी ने उन्हें हरा दिया और गुरुवार को अस्पताल में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
दुकान के बरामदे में मिले थे नारायणन
कासरगोड जिला पंचायत की विकास समिति की अध्यक्ष इरफाना इकबाल ने बताया कि करीब एक महीने पहले नारायणन कासरगोड में कहीं एक दुकान के बाहर बेहद खराब हालत में मिले थे। वह इतने कमजोर थे कि खड़े होने की भी हालत नहीं थी। वार्ड सदस्य ने जब इसकी सूचना उन्हें दी, तो उन्होंने तुरंत जिला कलेक्टर और जिला चिकित्सा अधिकारी को इस बारे में बताया। इसके बाद वहां एक स्थानीय संस्था के लोगों की मदद से उन्हें पहले प्राथमिक इलाज दिया गया और फिर अस्पताल में भर्ती कराया गया। इरफाना के अनुसार, पहले उन्होंने सोचा था कि नारायणन को किसी वृद्धाश्रम में भेज देंगे, लेकिन उनकी सेहत इतनी खराब थी कि जांच के बाद पता चला कि उन्हें चौथे स्टेज का कैंसर है, जिसके बाद उन्हें कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराना पड़ा।
परिजनों ने नहीं उठाया शव
जब नारायणन की मौत हो गई, तो पुलिस ने उनके रिश्तेदारों से संपर्क साधा, लेकिन उन्होंने शव को लेने से साफ मना कर दिया। इसके बाद पुलिस ने इरफाना इकबाल को कानूनी तौर पर शव लेने और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने की इजाजत दी। इरफाना ने यह जिम्मेदारी निभाई और वह खुद कासरगोड के उप्पला स्थित हिंदू श्मशान घाट पहुंचीं। उन्होंने वहां हिंदू धर्म के सभी रीति-रिवाजों के साथ नारायणन का अंतिम संस्कार किया।
बेटी की तरह निभाया फर्ज
इरफाना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा कि जब कोई करीबी नहीं आया, तो उन्होंने एक बेटी के रूप में नारायणन का अंतिम संस्कार किया। उनका कहना था कि इंसानियत किसी भी धर्म या राजनीति से बड़ी होती है। उन्होंने यह भी साफ किया कि उनके समुदाय से किसी ने भी इस काम पर कोई एतराज नहीं जताया, क्योंकि उनकी संस्था पहले भी कई बार ऐसे बेसहारा लोगों का अंतिम संस्कार उनके अपने धर्म के अनुसार करा चुकी है। वह आगे भी इस तरह की मदद जारी रखने की बात कहती हैं।
