उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर रोक के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भी इसी दिशा में कदम उठाया है। राज्य में अब पोस्टपेड मीटर लगाए जाएंगे। यह निर्णय उपभोक्ताओं की लगातार शिकायतों, खासकर ज्यादा बिलिंग और रिचार्ज न होने पर बिजली कटौती की समस्या के बाद लिया गया है। पिछली ममता बनर्जी सरकार को भी इस योजना में दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।
योगी सरकार के बाद बंगाल ने उठाया कदम
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर से जुड़ी अत्यधिक बिलिंग और तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध हुआ था। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने मई 2026 में इस योजना पर रोक लगा दी और प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड में बदलना शुरू कर दिया। अब पश्चिम बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी ने भी यही रास्ता अपनाते हुए कहा है कि नए लगने वाले स्मार्ट मीटर पोस्टपेड होंगे और बिलिंग साइकिल पुरानी व्यवस्था की तरह ही रहेगी।
उपभोक्ताओं की शिकायतें रही हैं प्रमुख वजह
प्रीपेड मीटर व्यवस्था में उपभोक्ताओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। सबसे बड़ी शिकायत यह थी कि रिचार्ज बैलेंस खत्म होते ही बिना किसी सूचना के बिजली आपूर्ति काट दी जाती थी, जबकि कई बार रिचार्ज करने के बाद भी कनेक्शन बहाल होने में घंटों लग जाते थे। इसके अलावा, उपभोक्ताओं ने सामान्य से अधिक बिल आने की भी गंभीर शिकायतें की थीं। सिर्फ बंगाल ही नहीं, पहले भी पश्चिम बंगाल की पिछली ममता बनर्जी सरकार को स्मार्ट मीटर योजना लागू करते समय ऐसी ही मुश्किलों का सामना करना पड़ा था और पिछले साल उन्हें भी यह काम रोकना पड़ा था।
यूपी में क्या है स्थिति?
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने 89.70 लाख घरेलू उपभोक्ताओं में से 85.60 लाख को बिल भेजे हैं, जिनके प्रीपेड मीटर पोस्टपेड में बदले गए हैं। हालांकि, तकनीकी गड़बड़ियों के कारण 3.6 लाख से अधिक बिल अटके हुए हैं। यूपी सरकार ने पूरे राज्य में 3.50 करोड़ स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन विरोध के बाद यह योजना रोक दी गई, एक अधिकारी के अनुसार, प्रीपेड मीटर की निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सॉफ्टवेयर सरकार के नियमों के अनुरूप नहीं था और बैलेंस खत्म होने के कुछ घंटों के भीतर ही आपूर्ति काट देता था। इसी वजह से इस महीने की शुरुआत में UPPCL पर 7.18 लाख रुपये का जुर्माना भी लगा था।
हालांकि, स्विच करने की प्रक्रिया में कुछ उलझनें भी आई हैं। वाराणसी के एक उपभोक्ता जनेश्वर सिंह ने सवाल उठाया कि जब उनके प्रीपेड मीटर पर 4,000 रुपये का बैलेंस था, तो उन्हें 2,500 रुपये का पोस्टपेड बिल क्यों मिला। अधिकारियों का कहना है कि स्विच पूरी तरह लागू होने के बाद बकाया बैलेंस को एडजस्ट कर दिया जाएगा और जुलाई के अंत तक सभी गड़बड़ियों को ठीक कर लिया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के बाद पश्चिम बंगाल में भी प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना पर रोक लगा दी गई है। नई व्यवस्था में पोस्टपेड मीटर लगेंगे, जिससे उपभोक्ताओं को रिचार्ज और अचानक बिजली कटौती की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, पुराने सिस्टम से नए सिस्टम में बदलाव के दौरान कुछ तकनीकी गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिन्हें जुलाई के अंत तक सुलझाने का दावा किया गया है।
