बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर परिवहन सेवाओं पर देखने को मिल रहा है। यात्री बसों, ऑटो, ई-रिक्शा और मालवाहक वाहनों में मनमाने ढंग से किराया बढ़ाया जा रहा है। हालांकि, अभी तक किसी भी परिवहन संगठन ने आधिकारिक रूप से भाड़ा वृद्धि की घोषणा नहीं की है।

पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने के बाद वाहन मालिकों ने परिचालन लागत बढ़ने का हवाला देते हुए किराया बढ़ाना शुरू कर दिया है। यात्रियों से निर्धारित किराए से अधिक वसूली की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। वाहन मालिकों का कहना है कि ग्रीस, मोबिल, स्पेयर पार्ट्स, चालक और कंडक्टर के पारिश्रमिक में भी इजाफा हुआ है, जिससे पुराने किराए पर वाहन चलाना मुश्किल हो गया है।
अंतरजिला बसों में 30 प्रतिशत तक अधिक किराया
मुजफ्फरपुर से पटना, मोतिहारी, सीतामढ़ी और शिवहर जैसे अंतरजिला रूटों पर चलने वाली बसों में यात्रियों से 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक किराया वसूला जा रहा है। शहर में ऑटो और ई-रिक्शा चालक भी यात्रियों से दो से तीन रुपये अतिरिक्त वसूल रहे हैं। वहीं, अन्य राज्यों से आने वाले बड़े मालवाहक वाहनों का भाड़ा भी बढ़ चुका है, जिसका असर जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है।
जून में बैठक, किराया बढ़ाने पर हो सकता है फैसला
बिहार मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष उदय शंकर प्रसाद सिंह ने बताया कि एक जून को पटना में बैठक होगी, जिसमें किराया वृद्धि पर फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बस, मालवाहक वाहन, ऑटो और ई-रिक्शा के भाड़े में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि की जा सकती है। यात्रियों की सुविधा और सरकार के दिशा-निर्देशों को भी ध्यान में रखा जाएगा।
मुजफ्फरपुर वाहन चालक संघ के महासचिव तेजकांत सिंह ने कहा कि बकरीद के बाद किराये में 25 से 30 प्रतिशत बढ़ोतरी की जा सकती है। फिलहाल, वर्ष 2017 में आरटीओ द्वारा तय प्रति किलोमीटर किराये के अनुसार ही भाड़ा लिया जा रहा था। मुजफ्फरपुर ऑटो रिक्शा कर्मचारी संघ ने भी संगठन की बैठक के बाद निर्णय लेने की बात कही है।