मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक मुक्तिधाम (श्मशान घाट) पर तैनात गार्ड द्वारा दाह संस्कार रोकने का मामला सामने आया है। पोस्टमार्टम के बाद एक महिला का शव लेकर पहुंचे परिजनों को वहां से लौटना पड़ा। अगले दिन दूसरे श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। नगर निगम ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

यह घटना मुजफ्फरपुर शहर के सिकंदरपुर स्थित बूढ़ी गंडक नदी किनारे बने मुक्तिधाम की है। मृतिका अर्चना कुमारी का पोस्टमार्टम एसकेएमसीएच में हुआ था। इसके बाद 19 मई की रात करीब 12 बजे परिजन और गांव के करीब 50 लोग शव लेकर सिकंदरपुर मुक्तिधाम पहुंचे।
गार्ड ने कथित तौर पर नशे में की अमानवीय हरकत
शिकायतकर्ता रंजन कुमार (ग्राम-खबड़ा) के अनुसार, वहां तैनात गार्ड अर्जुन ने शवदाह से साफ इनकार कर दिया। परिजनों का आरोप है कि गार्ड नशे की हालत में था। काफी मिन्नतें करने पर उसने कथित तौर पर कहा, “मुख्यमंत्री भी बोलेंगे, तब भी दाह संस्कार नहीं होगा।” उसने यह भी कहा कि यहां सिर्फ दीपू और अशोक जी का राज चलता है। करीब तीन घंटे तक परिजन और ग्रामीण हाथ जोड़कर गुहार लगाते रहे, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली। अधिकारियों के नंबर भी बंद मिले। अंततः पीड़ित परिवार आधी रात को शव वापस अपने गांव लेकर लौट गया। अगले दिन सुबह खबड़ा गांव के बगुलिया श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
नगर आयुक्त ने दिए जांच के निर्देश
इस घटना के बाद खबड़ा पंचायत के मुखिया पति पंकज कुमार ने कहा कि मुक्तिधाम 24 घंटे खुला रहना चाहिए और रात में शव को लौटाना निंदनीय है। नगर आयुक्त ऋतुराज प्रताप सिंह ने मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि पीड़ित पक्ष से जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी। दोषी कर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उप महापौर डॉ. मोनालिसा ने इस घटना को शर्मसार करने वाला बताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि मुक्तिधाम की व्यवस्था निगम अधिकारियों के नियंत्रण में नहीं है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन दोनों स्तरों पर मामले की जांच जारी है।