सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की एक मौखिक टिप्पणी से जन्मा ‘तिलचट्टा जनता पार्टी’ (Cockroach Janta Party – CJP) नाम का व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया मूवमेंट अब महज एक हफ्ते में ही इंस्टाग्राम पर 1.7 करोड़ (17 मिलियन) से अधिक फॉलोअर्स तक पहुँच गया है। यह आंकड़ा भारत की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी के आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल से भी अधिक है। हालाँकि, यह जोर देना ज़रूरी है कि यह आंदोलन अब तक भारत के चुनाव आयोग में पंजीकृत कोई राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि मुख्य रूप से बेरोजगारी, असमानता और न्यायपालिका की टिप्पणियों के विरोध में युवाओं का एक डिजिटल प्रतिरोध (Digital Resistance) है। इस रिपोर्ट में हम आपको इस पूरे मामले की शुरुआत, अब तक का सफर और नवीनतम आंकड़ों से जुड़ी पूरी जानकारी दे रहे हैं।

यह आंदोलन 15 मई, 2026 को सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान शुरू हुआ था। तब से लेकर अब तक इसने जिस तेजी से लोकप्रियता हासिल की है, वह सोशल मीडिया विश्लेषकों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है। पिछले 24 घंटों में अकेले लगभग 20 लाख नए फॉलोअर्स जुड़े हैं, जो इस आंदोलन की बढ़ती पैठ को दर्शाता है। आइए समझते हैं कि आखिर यह ‘तिलचट्टा जनता पार्टी’ है क्या, इसके पीछे कौन है, और 17 मिलियन का आंकड़ा क्यों मायने रखता है।
पूरा मामला: CJI के ‘तिलचट्टा’ वाले बयान से कैसे शुरू हुआ विवाद?
पूरी घटना 15 मई, 2026 की है। उस दिन भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली एक पीठ सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने बेरोजगारी और न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग से जुड़े कुछ मुद्दों पर चर्चा की। इसी क्रम में सीजेआई ने एक मौखिक टिप्पणी करते हुए कुछ युवाओं को ‘तिलचट्टे’ (Cockroaches) और ‘परजीवी’ (Parasites) जैसे शब्दों से संबोधित कर दिया।
यह टिप्पणी तुरंत सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। हालाँकि इस बयान की कोई आधिकारिक वीडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन सुनवाई में मौजूद वकीलों और कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये शब्द कहे गए थे। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएँ आईं – एक तरफ कुछ लोगों ने इसे सही संदर्भ में बताते हुए न्यायालय का बचाव किया, वहीं दूसरी तरफ बड़ी संख्या में युवाओं ने इसे बेरोजगार युवाओं का अपमान करार दिया।
किसने शुरू की ‘तिलचट्टा जनता पार्टी’? – संस्थापक कौन?
इस टिप्पणी के एक दिन बाद, 16 मई को महाराष्ट्र के पुणे शहर में रहने वाले अभिजीत दीपके नाम के एक युवक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट लिखा। अभिजीत दीपके पेशे से पब्लिक रिलेशन्स (PR) के छात्र हैं। जानकारी के अनुसार, वे पहले आम आदमी पार्टी (AAP) से भी जुड़े रहे हैं, हालाँकि अब उनका उससे कोई संबंध नहीं है। अभिजीत ने अपनी पोस्ट में व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा कि वे ‘सभी तिलचट्टों के लिए एक नया राजनीतिक मंच’ खोल रहे हैं। उन्होंने इस पार्टी में शामिल होने के लिए चार मज़ाकिया शर्तें रखीं, बेरोजगार होना, आलसी होना, लगातार ऑनलाइन रहने की आदत होना, पेशेवर तरीके से लंबी-लंबी बातें (रट) करने की क्षमता होना। यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई। हजारों यूजर्स ने इसे रीट्वीट किया और मजाकिया अंदाज में खुद को इस पार्टी का सदस्य बताना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे इस आंदोलन ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) या ‘तिलचट्टा जनता पार्टी’ नाम पकड़ लिया।
नवीनतम आंकड़ा: 17 मिलियन फॉलोअर्स, कितना बड़ा है यह मूवमेंट?
जो शुरू में एक मजाक था, वह अब एक बड़े डिजिटल आंदोलन का रूप ले चुका है। 21 मई 2026 की शाम तक, इस आंदोलन से जुड़े मुख्य इंस्टाग्राम पेज पर 1.7 करोड़ (17 मिलियन) से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं। पिछली रिपोर्ट में जहाँ यह आंकड़ा 15 मिलियन था, वहीं पिछले 24 घंटों में अकेले लगभग 20 लाख नए फॉलोअर्स जुड़े हैं। तुलना के लिए, भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बीजेपी के आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल के फॉलोअर्स लगभग 1.2 करोड़ (12 मिलियन) हैं। कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक हैंडल के लगभग 80 लाख (8 मिलियन) फॉलोअर्स हैं। यानी, एक हफ्ते पुराने इस व्यंग्यात्मक मूवमेंट ने दोनों बड़ी पार्टियों को फॉलोअर्स के मामले में पीछे छोड़ दिया है।
हालाँकि, यह समझना ज़रूरी है
ये सभी फॉलोअर्स भारत से नहीं हैं। सोशल मीडिया एनालिटिक्स के अनुसार, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और मध्य-पूर्व के कुछ देशों से भी काफी संख्या में फॉलोअर्स जुड़े हैं।
यह स्पष्ट नहीं है कि ये सभी फॉलोअर्स वास्तविक (जेनुइन) हैं या इनमें से कुछ बॉट (स्वचालित खाते) या पेड फॉलोअर्स हैं। किसी भी बड़े सोशल मीडिया ट्रेंड में यह एक आम बहस का विषय होता है।
फॉलोअर्स का होना किसी राजनीतिक पार्टी के वोट या जमीनी समर्थन का मापदंड नहीं है।
क्या है इस पार्टी का ‘घोषणापत्र’ (Manifesto)?
इस मूवमेंट से जुड़े एक वेबसाइट पर एक ‘घोषणापत्र’ भी रखा गया है। हालाँकि यह व्यंग्य के लहजे में लिखा गया है, लेकिन इसमें कुछ गंभीर मांगें भी हैं। मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
मांग विवरण
न्यायपालिका सुधार किसी भी मुख्य न्यायाधीश (CJI) को सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के बाद राज्यसभा की सीट नहीं मिलेगी।
चुनाव सुधार अगर चुनाव आयोग (Election Commission) सही वोट हटाता (डिलीट) पाया जाता है, तो सख्त कार्रवाई होगी।
महिला आरक्षण वर्तमान 33% के बजाय महिला आरक्षण को बढ़ाकर 50% किया जाएगा।
मीडिया स्वामित्व अडानी-अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों के पास जो मीडिया लाइसेंस हैं, उन्हें रद्द कर दिया जाएगा।
नोट: यह घोषणापत्र किसी निर्वाचित निकाय द्वारा पारित नहीं किया गया है। न ही इस पर किसी आधिकारिक पदाधिकारी ने हस्ताक्षर किए हैं। यह एक ऑनलाइन दस्तावेज है।
प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई: X (पूर्व में ट्विटर) ने किया ब्लॉक
जैसे-जैसे यह आंदोलन वायरल हुआ, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ ने इसे लेकर कार्रवाई की। इस आंदोलन से जुड़ा एक अकाउंट ‘@CJP_2029’ को भारत में ब्लॉक कर दिया गया। उस समय तक इस अकाउंट के लगभग 2 लाख (200,000) फॉलोअर्स हो चुके थे। X के नियमों के अनुसार, किसी अकाउंट को स्पैम, गलत सूचना फैलाने, या समुदाय के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर ब्लॉक किया जाता है। हालाँकि, इस अकाउंट को ब्लॉक करने का कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद इस मूवमेंट से जुड़े लोगों ने ‘कॉकरोच इज बैक’ (Cockroach is Back) नाम से एक नया अकाउंट बना लिया।
विशेषज्ञों की राय: क्या यह सिर्फ एक ट्रेंड है?
मीडिया विश्लेषकों और सामाजिक टिप्पणीकारों की इस मामले पर अलग-अलग राय है।
एक पक्ष मानता है कि ‘तिलचट्टा जनता पार्टी’ महज एक मजाक या क्षणिक ऑनलाइन ट्रेंड नहीं है, बल्कि यह देश की युवा पीढ़ी (विशेषकर जेन जेड) की गहरी निराशा को दर्शाता है। दिल्ली के एक वरिष्ठ पत्रकार (जिन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बात की) के अनुसार, “यह आंदोलन तीन बड़ी बातों का संकेत है – पहला, बेरोजगारी का गंभीर संकट। दूसरा, पारंपरिक राजनीतिक दलों से युवाओं का मोहभंग। तीसरा, हास्य और व्यंग्य (Satire) का हथियार के रूप में इस्तेमाल।”
दूसरा पक्ष इसे एक क्षणिक ऑनलाइन घटना मानता है। सोशल मीडिया एनालिस्ट अनुराग शर्मा कहते हैं, “इस तरह के वायरल ट्रेंड्स की उम्र आमतौर पर कम होती है। ये कुछ दिनों या हफ्तों में शांत हो जाते हैं। 17 मिलियन फॉलोअर्स होना प्रभावशाली है, लेकिन यह ज़मीनी राजनीति में तब्दील होगा या नहीं, यह अभी देखना बाकी है।”
निष्कर्ष: क्या यह असली राजनीतिक पार्टी बन सकती है?
फिलहाल, तथ्य यह है कि ‘तिलचट्टा जनता पार्टी’ कोई पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है। इसका न तो अपना कोई संविधान है, न कोई निर्वाचित नेता, न ही चुनाव आयोग में पंजीकरण। यह मुख्य रूप से एक ऑनलाइन व्यंग्य मूवमेंट है, जो सोशल मीडिया की मदद से फैला है। हालाँकि, इतिहास गवाह है कि कई सोशल मीडिया आंदोलनों ने बाद में ज़मीनी रूप ले लिया है। अगर यह आंदोलन आगे बढ़ता है और इसे संगठित रूप मिलता है, तो तकनीकी रूप से यह भविष्य में कोई राजनीतिक पार्टी बन सकती है। लेकिन अब तक इस मूवमेंट से जुड़े किसी भी व्यक्ति (जिसमें अभिजीत दीपके भी शामिल हैं) ने कोई औपचारिक पार्टी बनाने या चुनाव लड़ने की घोषणा नहीं की है। फिलहाल यह एक डिजिटल घटना है,
जिसकाहैंडल #MainBhiCockroach हैशटैग के साथ सक्रिय है। इससे जुड़ी आगे की किसी भी घटनाक्रम पर नज़र रखी जा रही है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह रिपोर्ट 21 मई, 2026 तक उपलब्ध सार्वजनिक तथ्यों और सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। ‘तिलचट्टा जनता पार्टी’ का भारत के चुनाव आयोग में कोई पंजीकरण नहीं है। फॉलोअर्स के आंकड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक रूप से दिखाई देने वाली संख्याओं पर आधारित हैं। इस रिपोर्ट का उद्देश्य केवल सूचना देना है, न कि किसी भी पार्टी या व्यक्ति का समर्थन या विरोध करना।