सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अब और किसी प्रकार की छूट संभव नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जिन शिक्षकों की सेवा में पांच साल से कम शेष हैं, उन्हें ही परीक्षा नहीं देनी होगी, अन्य सभी को TET पास करना अनिवार्य होगा।
चार राज्यों की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई
शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर न सिर्फ मध्य प्रदेश, बल्कि उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र सरकार की ओर से भी पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने इन चारों राज्यों के शिक्षक संगठनों की याचिकाओं को आपस में जोड़ते हुए एक साथ सुनवाई की। सभी याचिकाओं में मुख्य मांग वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों को परीक्षा से छूट देने की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
किन शिक्षकों को देनी होगी परीक्षा?
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्टीकरण के अनुसार, जिन शिक्षकों की नौकरी में अब पांच साल से कम का समय शेष है, केवल उन्हें ही टीईटी परीक्षा नहीं देनी होगी। सेवा के पांच या उससे अधिक वर्ष शेष रखने वाले सभी शिक्षकों के लिए यह परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने पिछले साल एक सितंबर को ही स्पष्ट कर दिया था कि 1998 से 2009 के बीच मेरिट के आधार पर भर्ती हुए शिक्षकों को टीईटी देना होगा, अन्यथा उनकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी।
श्रेणीवार आंकड़े पेश करने के निर्देश
मध्य प्रदेश के शिक्षकों की ओर से दायर याचिका (जगदीश यादव बनाम राज्य सरकार) पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अगली तारीख पर सभी शिक्षकों की श्रेणीवार सूची पेश करने का निर्देश दिया है। इस सूची में सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के शिक्षकों की अलग-अलग संख्या स्पष्ट होनी चाहिए। यह आदेश अदालत को मामले की बेहतर समझ के लिए चाहिए।
क्या है शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET)?
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने वर्ष 2010 में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य योग्यता के रूप में लागू किया था। इस परीक्षा का उद्देश्य कक्षा एक से आठ तक के शिक्षकों में न्यूनतम शैक्षणिक स्तर और आवश्यक कौशल सुनिश्चित करना है। यह परीक्षा दो पेपरों में आयोजित की जाती है – पहला पेपर कक्षा 1 से 5 के लिए और दूसरा पेपर कक्षा 6 से 8 के लिए होता है। मध्य प्रदेश में अनुमानित डेढ़ लाख शिक्षक अब इस परीक्षा को दोबारा देने के लिए पात्र होंगे।
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