भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी में एक संवेदनशील मामले में अदालत ने सेवानिवृत्त प्रधान जिला जज को उनकी बहू की आत्महत्या के मामले में अंतरिम जमानत दे दी है। मृतका के परिजनों ने अदालत के इस फैसले पर असंतोष जताया है।
“प्रतिनिधिक तस्वीर”
मृतका के पिता ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की मौत से पहले उसके पति और सास ने उसे प्रताड़ित किया था। फिलहाल पुलिस इस मामले में धारा 80(2) (दहेज मृत्यु) के तहत आगे की जांच कर रही है।
कोर्ट ने क्या कहा?
शनिवार को भोपाल की जिला अदालत ने सेवानिवृत्त प्रधान जिला जज एवं पूर्व जिला उपभोक्ता फोरम अध्यक्ष को उनकी बहू की आत्महत्या के मामले में अंतरिम जमानत प्रदान की। यह जमानत किन शर्तों पर दी गई है, इसका अभी खुलासा नहीं हुआ है। इस मामले में मृतका के पति की जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई होनी है।
परिजनों का आरोप और विरोध
मृतका के परिजनों ने अदालत के इस निर्णय पर नाराजगी व्यक्त की है। नोएडा (उत्तर प्रदेश) निवासी परिवार ने घटना के चार दिन बाद तक शव को लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने मांग की है कि शव का पोस्टमार्टम दिल्ली के एम्स में कराया जाए। मृतका के पिता ने बताया कि उनकी बेटी ने मौत से आधा घंटा पहले उनसे फोन पर बात की थी। इस दौरान उसने बताया कि उसके पति और सास उसे परेशान करते थे। इसके अलावा, परिजनों ने एम्स भोपाल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि जांच अधिकारी फोरेंसिक जांच के लिए सबूत जमा करने में विफल रहे।
पुलिस कार्रवाई और मामले की पृष्ठभूमि
पुलिस आयुक्त संजय कुमार सिंह ने बताया कि परिजनों की शिकायत पर शुक्रवार को मृतका के पति और सास के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 80(2) (दहेज मृत्यु) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की जांच जारी है। जानकारी के अनुसार, मृतका नोएडा की रहने वाली थी और उसकी शादी दिसंबर 2025 में एक डेटिंग ऐप के जरिए मुलाकात के बाद हुई थी। यह पूरा मामला दहेज उत्पीड़न से जुड़ा बताया जा रहा है।
ध्यान दें: यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया नजदीकी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।

