ईरानी प्रतिनिधि ने भोपाल में बताई खामेनेई के अंतिम संस्कार पर रोक की वजह

ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि ने कहा कि भीड़ पर संभावित हमले की आशंका के चलते अंतिम संस्कार स्थगित किया गया है।

घटना का संक्षिप्त विवरण

ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार पर रोक के पीछे की वजह सामने आई है। भोपाल आए सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने बताया कि अंतिम संस्कार इसलिए रोका गया है क्योंकि इसमें शामिल होने वाले लोगों पर हमले की आशंका है।

ईरानी प्रतिनिधि ने भोपाल में बताई खामेनेई के अंतिम संस्कार पर रोक की वजह
"प्रतिनिधिक तस्वीर"
भीड़ पर हमले की आशंका के चलते संस्कार स्थगित

मौलाना इलाही के अनुसार, ईरान के मशहद शहर में अंतिम संस्कार में दो करोड़ से अधिक लोगों के शामिल होने का अनुमान है। इतनी बड़ी संख्या में एकत्रित लोगों पर हमला किए जाने की संभावना को देखते हुए सुप्रीम लीडर का अंतिम संस्कार माहौल शांत होने की स्थिति में करने का निर्णय लिया गया है।

भोपाल में आयोजित जलसे में दी जानकारी

डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही रविवार को भोपाल आए। वे कोहेफिजा स्थित एमआईजी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में ‘इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन जलसा’ में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस जलसे में सभी धर्मों के लोग मौजूद रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के बीच पांच हजार साल पुराना संबंध है और यही वजह है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज भारत के लिए खुला है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जो युद्ध हो रहा है, वह ईरान पर थोपा गया है।

डॉ. इलाही के प्रमुख बयान

ईरानी प्रतिनिधि ने जलसे में कई अहम बातें कहीं:

युद्ध को लेकर: “युद्ध ईरान ने नहीं छेड़ा, यह ट्रंप और नेतन्याहू की निजी जंग है।” उन्होंने बताया कि ईरान ने बातचीत की कोशिश की, लेकिन अमेरिका और इज़रायल ने हमला कर दिया।

अमेरिकी दावों पर: “अमेरिका तीन दिनों में ईरान की सरकार गिराने का दावा कर रहा था। युद्ध के बाद ईरान को पांच हिस्सों में बांटने का प्लान था।”

होर्मुज जलडमरूमध्य: उन्होंने बताया कि होर्मुज अस्थायी रूप से बंद है, लेकिन जल्द ही खुल जाएगा।

भारत के समर्थन को याद किया

डॉ. इलाही ने कहा कि मुश्किल वक्त में भारत के लोगों का साथ याद रहेगा। जब दुनिया के कई देशों ने ईरान से मुंह मोड़ा, उस समय सड़कों पर ईरान के समर्थन में लोगों को देखकर हौसला मिला। उन्होंने कहा, “हम शहादत पसंद कौम हैं, कुर्बानी हमें प्यारी है।”

जलसे का आयोजन और उपस्थिति

ऑल इंडिया एआईएमआईएम के माध्यम से कोहेफिजा में यह जलसा आयोजित किया गया। इसमें पूर्व महापौर दीपचंद यादव, सैय्यद साजिद अली, बुद्ध, सिख, मुस्लिम समाज सहित सभी वर्गों और धर्मों के लोग शामिल हुए। सभी ने आयातुल्लाह खामेनेई को खिराज-ए-अकीदत पेश की।

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