UCC पर भोपाल में जनमत: एक कानून से एकजुटता या धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप? जानिए लोग क्या बोले
मध्य प्रदेश सरकार दिवाली से पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की तैयारी में है। भोपाल में जनता की राय सरकार के पक्ष में तो है, लेकिन साथ ही लोगों ने धार्मिक मामलों में अत्यधिक हस्तक्षेप की आशंका भी जताई है। कुछ लोगों ने यूजीसी के नियमों को खत्म करने की भी मांग की है।
"प्रतीकात्मक फोटो:मध्य प्रदेश में यूसीसी को लेकर क्या है तैयारी?
देश के केंद्र में स्थित मध्य प्रदेश अब समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की ओर अग्रसर है। मोहन यादव सरकार इस कानून को दिवाली से पहले प्रदेश में लागू करने की योजना बना रही है। उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश ऐसा करने वाला दूसरा राज्य बन सकता है। इस कानून के लागू होने के बाद, विवाह, तलाक, विरासत जैसे व्यक्तिगत मामलों से जुड़े कानून सभी धर्मों और जातियों के लोगों के लिए समान हो जाएंगे।
जनता क्या कहती है? समर्थन और चिंता दोनों
भोपाल में लोगों की राय ली गई, जिसमें UCC को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
“एक कानून से एकजुटता बढ़ेगी”
जहांगीराबाद के निवासी मकबूल ने इस कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री जी ने UCC लागू करने का जो फैसला लिया है, वह बहुत अच्छा है। इससे हिंदू, मुस्लिम, आदिवासी, सभी के लिए एक समान नियम होगा। इस कानून से लोगों में एकजुटता बढ़ेगी।” हालांकि, उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कोई भी बड़ा कानून लाने से पहले सरकार को सभी धर्मों के लोगों से राय-सुझाव जरूर लेने चाहिए।
“पहले UGC खत्म करो, फिर UCC लाओ”
रीवा के रहने वाले सुधीर पांडेय ने UCC के समर्थन में तो बात की, लेकिन साथ ही UGC (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन) के हालिया नियमों का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना था, “मध्य प्रदेश में UCC जैसा कानून आना चाहिए। लेकिन इससे पहले UGC के जो इक्विटी नियम आए हैं, उन्हें खत्म करना चाहिए और उसके बाद समान नागरिक संहिता लागू करनी चाहिए।”
“निजी धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप गलत”
वहीं, कुछ लोगों ने UCC को लेकर आशंका भी जताई। भोपाल के ही एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि सरकार को धर्म के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “हम क्या खाएं, क्या पहनें, इन चीजों पर सरकार को रोक नहीं लगानी चाहिए।” यह राय UCC के विरोध में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता के संरक्षण पर जोर देती नजर आई।
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