भोपाल: निजी स्कूलों में 25% फीस बढ़ोतरी, किताब-यूनिफॉर्म की फिक्सिंग से परेशान अभिभावक

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के निजी स्कूलों में बढ़ती फीस और किताब-यूनिफॉर्म की अनिवार्य खरीदारी ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन बिना कोई स्पष्ट कारण बताए हर साल फीस बढ़ा देता है और उन्हें निर्धारित दुकानों से ही सामान खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।

भोपाल: निजी स्कूलों में 25% फीस बढ़ोतरी, किताब-यूनिफॉर्म की फिक्सिंग से परेशान अभिभावक

"प्रतीकात्मक फोटो:

फीस वृद्धि और अनिवार्य खर्चों से बढ़ी मुश्किलें

भोपाल के कई प्रतिष्ठित निजी स्कूलों में हर साल 20 से 25 प्रतिशत तक फीस बढ़ोतरी के मामले सामने आ रहे हैं। अभिभावकों के अनुसार, फीस बढ़ाने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं बताया जाता और बच्चों के भविष्य को देखते हुए वे विरोध करने की स्थिति में नहीं होते। विशेष रूप से कक्षा पांचवीं से छठवीं में जाने पर 20 से 25 हजार रुपये तक का अतिरिक्त खर्च आ जाता है। वहीं ग्यारहवीं से बारहवीं कक्षा में यह बोझ और अधिक बढ़ जाता है। सामान्य महंगाई दर से कहीं अधिक तेजी से बढ़ती फीस आम परिवारों के मासिक बजट पर सीधा असर डाल रही है।

किताबों और यूनिफॉर्म का ‘फिक्स’ सिस्टम

अभिभावकों ने स्कूलों के कुछ विशिष्ट दुकानों से सांठगांठ करने के आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि बाजार में सस्ते विकल्प उपलब्ध होने के बावजूद स्कूलों द्वारा निर्धारित लिस्ट के बाहर की किताबें या यूनिफॉर्म स्वीकार नहीं की जाती। सबसे बड़ी शिकायत किताबों को लेकर है। हर साल नए प्रकाशकों की किताबें लागू कर दी जाती हैं, जिससे पिछले साल की किताबें बेकार हो जाती हैं। अभिभावकों का कहना है कि किताबों का मुद्रण लागत से कई गुना अधिक दाम वसूले जा रहे हैं।

छिपे हुए शुल्क और अतिरिक्त खर्चे

नियमित फीस के अलावा स्कूल कई प्रकार के छिपे हुए शुल्क भी वसूल रहे हैं। खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों, प्रतियोगिताओं और अन्य कार्यक्रमों के नाम पर अलग से पैसे लिए जा रहे हैं। अभिभावकों के अनुसार, इन खर्चों का कोई पारदर्शी हिसाब नहीं दिया जाता।

एनसीईआरटी की जगह महंगी निजी पुस्तकें

अभिभावकों का मानना है कि एनसीईआरटी की किताबें किफायती और मानक होती हैं, लेकिन इसके बावजूद स्कूल निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लागू करते हैं। इससे शिक्षा की लागत अनावश्यक रूप से बढ़ जाती है और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

अभिभावकों की मांग: सरकारी दिशानिर्देश जरूरी

माता-पिता सरकार से सख्त नियम बनाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि फीस बढ़ोतरी का एक तय पैमाना होना चाहिए और किताब-यूनिफॉर्म खरीदने की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, अभिभावकों और स्कूल प्रशासन के बीच बेहतर संवाद के लिए एक संयुक्त समिति बनाने की आवश्यकता है, जो फीस और अन्य खर्चों पर निगरानी रख सके।

यह जानकारी केवल सामान्य उद्देश्यों के लिए है। अधिक जानकारी के लिए हमारे Disclaimer पेज देखें।

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