MP में भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का ऐलान, 5 जिलों के 2523 गांव होंगे शामिल
मध्यप्रदेश सरकार ने राजधानी भोपाल और उससे सटे पांच जिलों को मिलाकर एक विशाल मेट्रोपॉलिटन रीजन विकसित करने की योजना बनाई है। इस क्षेत्र में कुल 2523 गांवों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। क्षेत्रफल के लिहाज से यह नया क्षेत्र मुंबई से लगभग दोगुना बड़ा होगा।
प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत भोपाल को केंद्र बिंदु मानकर आसपास के जिलों में विकास कार्यों का विस्तार किया जाएगा। भोपाल विकास प्राधिकरण इस परियोजना की मुख्य एजेंसी के रूप में काम करेगा। अधिकारियों के अनुसार, अगले 10 महीनों के भीतर इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली जाएगी।
आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल लगभग 6,300 वर्ग किलोमीटर है। वहीं, प्रस्तावित भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन करीब 12,099 वर्ग किलोमीटर में फैलेगा। क्षेत्रफल के मामले में यह मुंबई से लगभग दोगुने इलाके में विकसित किया जाएगा। इसमें केवल शहरी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों को भी शामिल करके उन्हें शहरी सुविधाओं से जोड़ा जाएगा।
किन जिलों और तहसीलों को किया गया शामिल
पांच जिलों के गांव होंगे विकास का हिस्सा
इस मेट्रोपॉलिटन रीजन के गठन के लिए भोपाल जिले की हुजूर, बैरसिया और कोलार तहसीलों को केंद्र में रखा गया है। इसके अलावा निम्नलिखित जिलों की तहसीलों को इसमें शामिल किया गया है:
सीहोर जिला: आष्टा, इछावर, सीहोर, श्यामपुर और जावर तहसील
विदिशा जिला: ग्यारसपुर, गुलाबगंज और विदिशा तहसील
राजगढ़ जिला: नरसिंहगढ़, ब्यावरा, जीरापुर, पिछोर और खुजनेर तहसील
रायसेन जिला: औबेदुल्लागंज और रायसेन तहसील
बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी पर विशेष जोर
इस परियोजना के तहत सड़क नेटवर्क और हाईवे कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सभी पांच जिलों के बीच आवागमन को सुगम बनाने के लिए सड़क ढांचे का विकास किया जाएगा। इसके अलावा, क्षेत्र के ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की योजना है। सरकार का मानना है कि बेहतर सुविधाओं और कनेक्टिविटी से इस क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी का होगा गठन
इतने विशाल क्षेत्र के प्रबंधन और विकास कार्यों की निगरानी के लिए एक विशेष मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी का गठन किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद भी गांवों और शहरों का मौजूदा प्रशासनिक ढांचा नहीं बदलेगा। नगर निगम और पंचायतें पहले की तरह काम करती रहेंगी, जबकि बड़ी विकास परियोजनाओं का संचालन यह अथॉरिटी करेगी।
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