आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन, मुंबई में अंतिम संस्कार
मशहूर गायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया। उन्हें कार्डियक अरेस्ट के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। पिछले कुछ समय से वह सीने में संक्रमण और अत्यधिक थकान से जूझ रही थीं।
पोती ने दी थी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी
आशा भोसले की पोती जनाई भोसले ने सोशल मीडिया के माध्यम से उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी साझा की थी। उन्होंने बताया था कि आशा भोसले को सांस लेने में कठिनाई हो रही थी और उनके फेफड़ों में संक्रमण था। इसके अलावा, उन्हें अत्यधिक कमजोरी का भी अनुभव हो रहा था। जनाई ने प्रशंसकों से उनकी निजता का सम्मान करने की अपील की थी और कहा था कि स्वास्थ्य में किसी भी सुधार की जानकारी वह समय-समय पर देती रहेंगी।
अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार की व्यवस्था
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, आशा भोसले का पार्थिव शरीर 13 अप्रैल को सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक उनके निवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद शाम 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
संगीत यात्रा: 1943 में हुई थी शुरुआत
आशा भोसले ने वर्ष 1943 में मराठी फिल्म 'माझा बाल' से अपने प्लेबैक गायन करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद, 1948 में रिलीज हुई हिंदी फिल्म 'चुनरिया' के गाने 'सावन आया' से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा। 8 सितंबर 1933 को जन्मी आशा भोसले ने अपने लंबे करियर में हिंदी, मराठी, बंगाली, गुजराती सहित कई भाषाओं में हजारों गानों को अपनी आवाज दी। पिछले कुछ वर्षों से उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद, वह संगीत कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से शामिल होती रहीं।
आशा भोसले की जीवनी
पूरा नाम: आशा भोसले (जन्म नाम: आशा मंगेशकर)
जन्म: 8 सितंबर 1933, गोआर, सांगली, महाराष्ट्र
निधन: 12 अप्रैल 2026, मुंबई
पेशा: पार्श्व गायिका, अभिनेत्री, उद्यमी
कार्यकाल: 1943 – 2026 (लगभग 83 वर्ष)
आशा भोसले भारतीय संगीत जगत की सबसे प्रतिष्ठित और बहुमुखी पार्श्व गायिकाओं में से एक थीं। उन्होंने अपने करियर में 12,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए और 20 से अधिक भाषाओं में गाया । 2011 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें संगीत इतिहास में सबसे अधिक रिकॉर्ड किए गए कलाकार के रूप में मान्यता दी
प्रारंभिक जीवन
आशा मंगेशकर का जन्म महाराष्ट्र के सांगली जिले के गोआर नामक छोटे से गाँव में हुआ था। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक और मराठी रंगमंच कलाकार थे। जब आशा मात्र 9 वर्ष की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया, पिता की मृत्यु के बाद परिवार पुणे से कोल्हापुर और फिर मुंबई आ गया। परिवार का भरण-पोषण करने के लिए आशा और उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर ने फिल्मों में गाना और अभिनय करना शुरू कर दिया
पहला गाना
1943 में, मात्र 10 वर्ष की उम्र में, आशा ने मराठी फिल्म 'माझा बाल' के लिए अपना पहला गाना 'चला चला नव बाला' गाया . हिंदी फिल्मों में उनका पहला गाना 1948 में आई फिल्म 'चुनरिया' का 'सावन आया' था। उनका पहला एकल हिंदी फिल्म गाना 1949 की फिल्म 'रात की रानी' के लिए था
निजी जीवन
पहला विवाह
1949 में, 16 वर्ष की उम्र में, आशा ने परिवार की इच्छा के विरुद्ध 31 वर्षीय गणपतराव भोसले से विवाह कर लिया . गणपतराव लता मंगेशकर के प्रबंधक थे। यह विवाह बहुत सुखद नहीं रहा। बाद में आशा ने अपनी जीवनी में उन्हें "सैडिस्ट" (दूसरों को दर्द देने का आनंद लेने वाला) बताया था, गर्भावस्था के दौरान उन्होंने आत्महत्या का प्रयास भी किया था। उन्होंने बताया - "मैं चार महीने की गर्भवती थी और अस्पताल में भर्ती थी। मानसिक पीड़ा के कारण मैंने नींद की गोलियाँ निगल लीं, लेकिन अपने अजन्मे बच्चे के प्रति प्यार ने मुझे जीवन में वापस खींच लिया" 1960 में, जब वे तीसरे बच्चे से गर्भवती थीं, तो उन्होंने अपने पति को छोड़ दिया। गणपतराव भोसले का 1966 में निधन हो गया .
दूसरा विवाह
1980 में आशा ने प्रसिद्ध संगीतकार राहुल देव बर्मन (आर.डी. बर्मन) से विवाह किया, जो उनसे 6 वर्ष छोटे थे . इस विवाह से उनकी कोई संतान नहीं हुई। 1990 के दशक की शुरुआत में दोनों अलग हो गए और 1994 में आर.डी. बर्मन का निधन हो गया
संतान और पारिवारिक त्रासदियाँ
आशा भोसले के पहले विवाह से तीन संतानें थीं :
हेमंत भोसले (पुत्र) - एक संगीतकार थे, 2015 में कैंसर से निधन
वर्षा भोसले (पुत्री) - एक स्तंभकार थीं, 2012 में अवसाद के कारण आत्महत्या कर ली
आनंद भोसले (पुत्र) - उनके करियर का प्रबंधन करते थे
इन दो बच्चों को खोने का दुख उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था।
संगीत करियर
प्रारंभिक संघर्ष
1950 के दशक में, जब लता मंगेशकर, गीता दत्त और शमशाद बेगम का बोलबाला था, आशा को अक्सर वे गाने मिलते थे जो अन्य गायिकाएँ ठुकरा देती थीं - जैसे 'बुरी लड़कियों' (वैम्प्स) के गीत या कम बजट की फिल्मों के गाने .
ओ.पी. नैयर के साथ साझेदारी
ओ.पी. नैयर वह संगीतकार थे जिन्होंने आशा को एक अलग पहचान दी। उन्होंने पहली बार 1952 में आशा को रिकॉर्डिंग के लिए बुलाया। 1956 की फिल्म 'सी.आई.डी.' उनके लिए एक बड़ा ब्रेक साबित हुई
1957 की फिल्म 'नया दौर' की सफलता ने आशा-नैयर की जोड़ी को बहुत लोकप्रिय बना दिया। उनके युगल गीत - 'मांग के साथ तुम्हारा', 'साथी हाथ बढ़ाना', 'उड़ें जब जब जुल्फें तेरी' - आज भी याद किए जाते हैं .
आर.डी. बर्मन के साथ साझेदारी
आशा और आर.डी. बर्मन की जोड़ी भारतीय सिनेमा की सबसे सफल संगीत साझेदारियों में से एक थी। उनके साथ मिलकर बनाए गए कुछ अमर गीत
आशा भोसले ने अपनी आवाज़ से आठ दशकों तक भारतीय संगीत को परिभाषित किया। उनकी विशेषता थी अविश्वसनीय बहुमुखी प्रतिभा - वह शास्त्रीय संगीत, ग़ज़ल, कैबरे नंबर और पॉप गीतों को समान सहजता से गा सकती थीं . उन्होंने एक ऐसे दौर में, जब लता मंगेशकर का साया सबसे बड़ा था, अपनी अलग पहचान बनाई। आज वे न केवल एक गायिका के रूप में, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में याद की जाती हैं।
उनके निधन पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा - "महान संगीत प्रतिभा आशा भोसले के निधन से गहरा दुख हुआ है। वह एक प्रेरणादायक और मंत्रमुग्ध करने वाली गायिका थीं, जिन्होंने पीढ़ियों के दिलों पर राज किया।"
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