सोमवार, 23 मार्च 2026

MP Cyber Slavery Racket: म्यांमार स्कैम हब से भोपाल युवक की रेस्क्यू, दो एजेंट गिरफ्तार

भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस की साइबर सेल ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के लोग बेरोजगार युवाओं को विदेश में नौकरी का झांसा देकर म्यांमार के सीमावर्ती इलाकों में स्थित साइबर स्कैम सेंटरों तक पहुंचाते थे, जहां उनसे जबरन धोखाधड़ी का काम कराया जाता था।

MP Cyber Slavery Racket: म्यांमार स्कैम हब से भोपाल युवक की रेस्क्यू

पुलिस ने इस मामले में बिहार के जमुई जिले और उत्तर प्रदेश के मेरठ से दो एजेंटों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान फैज अकरम (32) और मोहित अग्रवाल (30) के रूप में हुई है। मध्य प्रदेश पुलिस साइबर सेल के एसपी प्रणय नागवंशी ने बताया कि ये दोनों रैकेट की अलग-अलग परतों में काम करते थे, जबकि भारत में इसका मुख्य सरगना अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

इंस्टाग्राम से लेकर म्यांमार तक का सफर

यह पूरा मामला भोपाल के अनुसूचित जाति वर्ग के युवक जितेंद्र अहिरवार से जुड़ा है। जितेंद्र को वर्ष 2025 की शुरुआत में इंस्टाग्राम पर एक विज्ञापन के जरिए नौकरी का झांसा दिया गया। पहले उसका संपर्क फैज अकरम से हुआ, जिसने खुद को रिक्रूटमेंट एजेंसी का कर्मचारी बताकर थाईलैंड में डाटा एंट्री की अच्छी नौकरी का झांसा दिया।

इसके बाद टेलीग्राम पर इंटरव्यू लिया गया, जिसमें मोहित अग्रवाल भी शामिल था। जितेंद्र का चयन होने के बाद उसकी यात्रा का सारा खर्च इन लोगों ने उठाया। वर्ष 2025 की शुरुआत में जितेंद्र थाईलैंड पहुंचा, वहां से टैक्सी के जरिए उसे थाईलैंड-म्यांमार सीमा पर ले जाया गया और फिर नाव के जरिए म्यांमार के म्यावद्दी शहर में पहुंचा दिया गया।

जबरन साइबर स्कैम में ढकेला

म्यावद्दी में जितेंद्र के साथ जबरन मजदूरी करवाई गई। उसे केके पार्क कंपाउंड में एक छोटे से कमरे में बंद रखा गया, जहां सशस्त्र मिलिशिया के लोग पहरा देते थे। यहां भारत, पाकिस्तान, नाइजीरिया, केन्या और इथियोपिया जैसे देशों के अन्य पीड़ित भी रखे गए थे।

जितेंद्र को फर्जी निवेश और रोमांस स्कैम के जरिए लोगों को ठगने के लिए मजबूर किया गया। उसे बताया गया कि उसे म्यांमार लाने में जो खर्च हुआ है, उसे चुकाने के लिए काम करना होगा। साइबर सेल के अनुसार, जितेंद्र को असामान्य रूप से लंबे घंटे काम करना पड़ता था और फ्रॉड के टारगेट पूरे न करने पर उसे भोजन से वंचित रखा जाता था और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। कुछ अन्य युवाओं के साथ तो इससे भी अधिक क्रूरता बरती जाती थी, जिसमें करंट लगाना भी शामिल था।

रेस्क्यू और गिरफ्तारी

दिसंबर 2025 में म्यांमार की सेना ने इस परिसर में छापेमारी की, जिसमें जितेंद्र को मुक्त कराया गया। उसे पहले थाईलैंड भेजा गया और फिर सुरक्षित भारत वापस लाया गया। भोपाल लौटने के बाद जितेंद्र ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया।

जांच में फैज अकरम का पता चला, जिसकी गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ में मोहित अग्रवाल के बारे में जानकारी मिली। पुलिस ने मोहित के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया, जिसके बाद उसे दिल्ली हवाईअड्डे से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, इस रैकेट का मुख्य संचालक उत्तर भारत के किसी राज्य से काम कर रहा है और उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास जारी हैं।

नोट: यह खबर उपलब्ध जानकारी और विभिन्न मीडिया स्रोतों पर आधारित है। समाचार लिखे जाने के समय तक प्राप्त तथ्यों के अनुसार प्रस्तुत किया गया है। स्थिति में बदलाव संभव है और आधिकारिक पुष्टि के बाद अपडेट किया जा सकता है। 


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