मध्य प्रदेश सरकार ने आयुष्मान भारत योजना को लेकर बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के चार सबसे बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में 31 मार्च के बाद केवल उन्हीं निजी अस्पतालों को योजना में शामिल रखा जाएगा, जिनके पास एनएबीएच (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स) का अंतिम स्तर का प्रमाणपत्र होगा। इस निर्णय के चलते इन शहरों के कुल 480 अस्पतालों में से 295 के योजना से बाहर होने की संभावना है।
क्यों जरूरी है एनएबीएच प्रमाणपत्र और क्या होगा असर?
एनएबीएच प्रमाणपत्र अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन को सुनिश्चित करता है। इसे हासिल करने के लिए अस्पतालों को कड़े मानकों पर खरा उतरना होता है, जिसमें करोड़ों रुपये का निवेश भी लग सकता है।
आम मरीजों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव:
सीमित विकल्प: छोटे निजी अस्पताल और नर्सिंग होम के योजना से बाहर हो जाने से मरीजों को इलाज के लिए कुछ चुनिंदा बड़े अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
बढ़ सकता है दबाव: बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव बढ़ने से इलाज के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची लग सकती है, खासकर आपात स्थिति में परेशानी हो सकती है।
महंगा इलाज: योजना से बाहर होने वाले अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड धारकों को नि:शुल्क इलाज नहीं मिल पाएगा, जिससे उन्हें दूसरे शहरों का रुख करना पड़ सकता है या निजी तौर पर महंगा इलाज करवाना पड़ सकता है।
डॉक्टरों के संगठनों ने जताई आपत्ति
मध्य प्रदेश नर्सिंग होम एसोसिएशन और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की राज्य इकाई ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि एनएबीएच एक स्वैच्छिक मान्यता है, जिसे अनिवार्य बनाना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि न तो क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट और न ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने इसे जरूरी ठहराया है। संगठन यह भी सवाल उठा रहे हैं कि देश के किसी अन्य राज्य में आयुष्मान योजना के लिए यह शर्त लागू नहीं है, तो मध्य प्रदेश और वह भी सिर्फ चार शहरों के लिए ऐसा क्यों किया जा रहा है।
हालांकि, आयुष्मान भारत मप्र के सीईओ डॉ. योगेश भरसट का कहना है कि सरकार का उद्देश्य इलाज की गुणवत्ता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों से मिलकर इस मामले की समीक्षा की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक मरीजों को योजना का लाभ मिल सके। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और अस्पताल संचालकों के बीच इस मुद्दे पर क्या सहमति बनती है और आम जनता पर इसका वास्तविक प्रभाव क्या होता है।
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